बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने रविवार को बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उन्हें सरकार की ओर से प्रति एकड़ 3 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा किसानों को 50 फीसदी विकसित साइट देने का भी फैसला किया गया है।
डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार जमीन देने वाले किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित और बेहतर मुआवजा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पिछली सरकार की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय किसानों की जमीन के लिए केवल 25 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर तय की गई थी। मौजूदा सरकार ने किसानों को इससे काफी अधिक मुआवजा देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन लेने के दौरान उनके हितों की अनदेखी नहीं करना है। सरकार चाहती है कि जिन किसानों की जमीन परियोजना के लिए ली जा रही है, उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य मिले और विकास प्रक्रिया में उन्हें भी लाभ का हिस्सा मिले।
3 करोड़ रुपये से अधिक प्रति एकड़ मुआवजा
बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के तहत जमीन देने वाले किसानों के लिए घोषित मुआवजा क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, किसानों को प्रति एकड़ 3 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा।
डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसानों को उनकी जमीन के बदले बेहतर आर्थिक लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा तय की गई 25 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर की तुलना में मौजूदा सरकार का प्रस्ताव काफी अधिक है।
सरकार की ओर से मुआवजे के साथ 50 फीसदी विकसित साइट देने का निर्णय भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ यह है कि टाउनशिप के विकास के बाद किसानों को विकसित जमीन में हिस्सेदारी दी जाएगी। इस व्यवस्था से किसानों को परियोजना से भविष्य में भी आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहेगी।
किसानों के हित को बताया प्राथमिकता
डीके शिवकुमार ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया में किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती, जिससे जमीन देने वाले किसानों को नुकसान हो।
उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन केवल आर्थिक संपत्ति के रूप में नहीं देखते, बल्कि उससे उनकी आजीविका और परिवार का भविष्य जुड़ा होता है। इसलिए जमीन अधिग्रहण के दौरान उन्हें बेहतर मुआवजा और विकास में हिस्सेदारी देना जरूरी है।
उपमुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि बिदादी टाउनशिप परियोजना से किसानों और क्षेत्र के लोगों को भी लाभ मिले। विकसित टाउनशिप बनने के बाद यहां बुनियादी सुविधाओं, आवास, वाणिज्यिक गतिविधियों और अन्य विकास कार्यों के बढ़ने की संभावना है।
पिछली सरकार से तुलना
अपने बयान में डीके शिवकुमार ने मौजूदा और पिछली सरकार की नीतियों की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने जमीन देने वाले किसानों के लिए प्रति एकड़ 25 लाख रुपये का मुआवजा तय किया था। इसके विपरीत वर्तमान सरकार ने मुआवजा बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये से अधिक करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर दर देने का फैसला सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही 50 फीसदी विकसित साइट देने की व्यवस्था किसानों को परियोजना के विकास में प्रत्यक्ष भागीदार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बिदादी टाउनशिप परियोजना पर नजर
बिदादी क्षेत्र बेंगलुरु के आसपास तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में शामिल है। टाउनशिप परियोजना को क्षेत्र के शहरी विकास और भविष्य की आवासीय एवं बुनियादी जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है। परियोजना के लिए जमीन की उपलब्धता और किसानों के साथ मुआवजे से जुड़े मुद्दे इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं।
सरकार का प्रयास है कि परियोजना के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में किसानों की सहमति और हितों को महत्व दिया जाए। इसी क्रम में बेहतर मुआवजे और विकसित साइट में हिस्सेदारी की घोषणा को किसानों के लिए राहत देने वाला कदम माना जा रहा है।
विकास के साथ किसानों को भी लाभ
सरकार की योजना के मुताबिक, बिदादी टाउनशिप का विकास होने पर क्षेत्र में शहरी सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो सकता है। ऐसे में जमीन देने वाले किसानों को केवल एकमुश्त मुआवजा देने के बजाय विकसित साइट में हिस्सा देने से उन्हें भविष्य के विकास का लाभ भी मिल सकता है।
डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसानों को उनकी जमीन का बेहतर मूल्य देने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि विकास और किसान हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।
बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर उपमुख्यमंत्री की यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब बड़े शहरी विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण और किसानों को उचित मुआवजा देने का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। प्रति एकड़ 3 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा और 50 फीसदी विकसित साइट देने का प्रस्ताव सरकार की ओर से किसानों को परियोजना से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
फिलहाल सरकार के इस ऐलान के बाद बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने वाले किसानों के बीच मुआवजे और विकसित साइट से जुड़े प्रावधानों को लेकर चर्चा तेज होने की उम्मीद है। परियोजना की आगे की प्रक्रिया में जमीन अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और विकसित साइट से जुड़े नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।