आबकारी मंत्री शिवलिंगेगौड़ा की बढ़ीं मुश्किलें, विवादित बयान को लेकर लोकायुक्त में शिकायत
बेंगलुरु। कर्नाटक के आबकारी मंत्री और हासन जिले के प्रभारी मंत्री के.एम. शिवलिंगेगौड़ा अपने हालिया विवादित बयान को लेकर मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। सरकारी अधिकारियों को काम पूरा करने के बाद कथित तौर पर “सम्मानपूर्वक” कुछ देने से जुड़े उनके बयान को लेकर कर्नाटक लोकायुक्त के समक्ष शिकायतें पहुंची हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मंत्री का बयान भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को बढ़ावा देने वाला है। हालांकि शिवलिंगेगौड़ा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उन्होंने किसी को रिश्वत देने के लिए नहीं कहा था।
यह विवाद 19 सितंबर को हासन जिले के सकलेशपुर में आयोजित ‘प्रजा सेवा आंदोलन’ जन-शिकायत कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। कार्यक्रम में लोगों ने सरकारी अधिकारियों से काम कराने में कथित तौर पर रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मंत्री के सामने रखी थी। इसी दौरान शिवलिंगेगौड़ा ने कहा था कि काम करने वाले अधिकारियों को लोग अपनी इच्छा से “सम्मानपूर्वक” कुछ दे सकते हैं, लेकिन किसी को जबरन पैसा नहीं लेना चाहिए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया।
बैठक में मौजूद कुछ लोगों ने मंत्री के बयान पर तत्काल आपत्ति जताई थी। अलूर तालुक के किसान पुनीत ने सवाल उठाया कि जब सरकारी अधिकारियों को सरकार की ओर से वेतन मिलता है तो उन्हें काम करने के बदले अलग से कुछ देने की जरूरत क्यों होनी चाहिए। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने भी सवाल उठाए और कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई।
मामला बढ़ने के बाद मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक हासन के अधिवक्ता एम.डी. गोपाल गौड़ा ने 21 सितंबर को हासन लोकायुक्त पुलिस कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई और मंत्री के बयान की वीडियो क्लिप भी सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मंत्री ने खुले तौर पर अधिकारियों को पैसे देने का सुझाव दिया और इस बयान की भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत जांच की जानी चाहिए। हासन लोकायुक्त की पुलिस अधीक्षक बी.एन. नंदिनी ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया था कि इसे आगे की मंजूरी के लिए बेंगलुरु स्थित मुख्यालय भेजा गया है।
इसके अलावा मैसूर स्थित संगठन ‘वॉयस ऑफ पीपल’ ने भी मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दी। अलग-अलग शिकायतों में मंत्री के बयान को उनके संवैधानिक और सार्वजनिक दायित्वों के विपरीत बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। इससे पहले सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि मंत्री का बयान भ्रष्टाचार को प्रोत्साहित करने वाला है। उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामले की जांच की मांग की थी।
विवाद बढ़ने के बाद शिवलिंगेगौड़ा ने अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका आशय अधिकारियों को पैसा देने से नहीं था। उनके मुताबिक कार्यक्रम में किसानों और अधिकारियों के बीच टकराव जैसी स्थिति की शिकायत सामने आई थी और उन्होंने केवल लोगों से सरकारी कर्मचारियों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने और काम पूरा होने पर उनका धन्यवाद करने की बात कही थी।
मंत्री ने बाद में स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी नागरिक को सरकारी अधिकारी को 10 रुपये भी देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी बात को रिश्वत देने की सलाह के रूप में पेश किया गया, जबकि उनका उद्देश्य अधिकारियों और आम लोगों के बीच बेहतर व्यवहार की बात करना था। शिवलिंगेगौड़ा ने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी ने काम करने के बदले रिश्वत की मांग की है तो उसकी जांच कराई जानी चाहिए।
हासन की उपायुक्त के.एस. लता कुमारी ने भी कार्यक्रम के दौरान लोगों को शांत कराने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि मंत्री की टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया है और यदि कोई सरकारी अधिकारी अपना कर्तव्य निभाने के बदले रिश्वत मांगता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री के बयान ने राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। भाजपा नेताओं ने इसे लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। भाजपा नेता सी.टी. रवि ने मंत्री से बयान वापस लेने और लोगों से माफी मांगने की मांग की। वहीं विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि मंत्री की टिप्पणी सरकारी व्यवस्था में रिश्वत को सामान्य बताने जैसी है। ये विपक्षी नेताओं के आरोप हैं, जबकि शिवलिंगेगौड़ा ने कहा है कि उन्होंने रिश्वत देने का समर्थन नहीं किया।
विवाद पर पूर्व मंत्री और जेडीएस नेता एच.डी. रेवन्ना ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि यदि जिले के प्रभारी मंत्री ही अधिकारियों को “सम्मानपूर्वक” कुछ देने जैसी बात कहेंगे तो इससे जनता के बीच क्या संदेश जाएगा।
अब लोकायुक्त के स्तर पर शिकायतों पर आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। हासन में दी गई शिकायत को लोकायुक्त मुख्यालय भेजे जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन शिकायत दर्ज होना अपने आप में आरोप सिद्ध होना नहीं है। मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि उनका बयान रिश्वत देने के समर्थन में नहीं था। ऐसे में आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि लोकायुक्त शिकायत और उपलब्ध वीडियो समेत अन्य सामग्री की जांच के बाद क्या निर्णय लेता है।