बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में वेटनरी ऑफिसर की भर्ती से जुड़े कथित घोटाले में आरोपी सस्पेंड किए गए IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को अदालत से राहत नहीं मिली है। बेंगलुरु की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने शुरुआती स्तर पर ऐसे साक्ष्य पेश किए हैं, जिनसे गंगवार और आरोपी नंबर 6 बसवराज कन्नाले के बीच कथित संपर्क और पैसों के लेन-देन का संकेत मिलता है।
एडिशनल सिटी सिविल एंड सेशंस जज निर्मला देवी एस ने शुक्रवार को जमानत याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने जांच की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है और इस चरण में आरोपी को रिहा करने पर सबूतों को प्रभावित करने या गवाहों पर असर डालने का जोखिम हो सकता है।यह मामला कर्नाटक लोक सेवा आयोग के माध्यम से वेटनरी ऑफिसर के 400 पदों पर हुई भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि भर्ती परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक किया गया और परीक्षा प्रक्रिया से संबंधित अन्य दस्तावेजों में भी गड़बड़ी की गई। मामले की जांच के दौरान कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को इस मामले में आरोपी नंबर 5 बनाया गया है। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और फिलहाल निलंबित हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि जांच के दौरान गंगवार और बसवराज कन्नाले के बीच संपर्क और वित्तीय लेन-देन से जुड़े शुरुआती साक्ष्य सामने आए हैं।अदालत ने इन तथ्यों को जमानत पर विचार करते समय ध्यान में रखा। हालांकि अदालत का यह आदेश मामले में अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। जमानत याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने जांच की स्थिति और उपलब्ध शुरुआती सामग्री को देखा है। आरोपी के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान साक्ष्यों की जांच के बाद होगा।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों, परीक्षा प्रक्रिया और आरोपियों के बीच कथित संपर्क की पड़ताल कर रही है। ऐसे में जांच के महत्वपूर्ण चरण में आरोपी की रिहाई से जांच प्रभावित होने की आशंका जताई गई।अदालत ने विशेष रूप से सबूतों को नष्ट किए जाने और गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना का उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, जब जांच जारी हो और मामले से जुड़े साक्ष्यों एवं गवाहों की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई हो, तब जमानत के अनुरोध पर सावधानी से विचार करना जरूरी है।
वेटनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा कर्नाटक में सरकारी नौकरी के लिए आयोजित की गई भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा थी। इस भर्ती में कुल 400 पदों को भरे जाने की प्रक्रिया थी। कथित प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे और मामला जांच के दायरे में आया।मामले में OMR शीट से जुड़ी कथित अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है। भर्ती परीक्षाओं में OMR शीट उम्मीदवारों द्वारा दिए गए उत्तरों को दर्ज करने के लिए इस्तेमाल की जाती है और परिणाम तैयार करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभियोजन पक्ष ने भर्ती प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों और परीक्षा सामग्री में कथित गड़बड़ियों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित प्रश्नपत्र लीक कैसे हुआ, परीक्षा से पहले उसकी जानकारी किन लोगों तक पहुंची और भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह का अनुचित लाभ किसे मिला। इसके साथ ही OMR शीट और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड में कथित हेरफेर की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।गंगवार की ओर से जमानत के लिए अदालत का रुख किया गया था। बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष की शुरुआती सामग्री और जांच की स्थिति को महत्व दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और ऐसे समय में जमानत देने से जांच पर असर पड़ने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत के आदेश में गंगवार और बसवराज कन्नाले के बीच कथित वित्तीय लेन-देन तथा संपर्क का भी उल्लेख किया गया। अभियोजन पक्ष ने इन्हें मामले से जोड़ने वाली शुरुआती सामग्री के तौर पर अदालत के सामने रखा। कोर्ट ने इस स्तर पर इन साक्ष्यों का अंतिम मूल्यांकन नहीं किया, बल्कि जमानत के सवाल पर उपलब्ध सामग्री और जांच की स्थिति को देखा।इस मामले में अभी जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी की ओर से जुटाए जा रहे साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। जांच पूरी होने के बाद आरोपों से संबंधित विस्तृत सामग्री अदालत के सामने पेश की जा सकती है। इसके बाद मुकदमे की प्रक्रिया में गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच होगी।
फिलहाल अदालत के फैसले से सस्पेंडेड IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को जमानत नहीं मिल पाई है। वेटनरी ऑफिसर के 400 पदों की भर्ती से जुड़े कथित प्रश्नपत्र लीक, OMR शीट और अन्य अनियमितताओं की जांच आगे भी जारी रहेगी। अदालत ने साफ किया है कि जांच के इस चरण में आरोपी को रिहा करने से सबूतों और गवाहों को प्रभावित करने का जोखिम है।मामले में जमानत खारिज होने का यह फैसला केवल वर्तमान जांच और जमानत के कानूनी मानकों से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि या खंडन मुकदमे के दौरान उपलब्ध कराए जाने वाले साक्ष्यों और अदालत के अंतिम निर्णय से होगा।
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