बेंगलुरु। कर्नाटक की कला, संस्कृति, पारंपरिक कौशल और कारीगरों को मंच देने वाले ‘कर्नाटक पर्व 2026’ का शनिवार को बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड्स स्थित त्रिपुरावासिनी में आगाज हुआ। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और सभा को संबोधित करते हुए कहा कि विविधता में एकता और कौशल में आत्मनिर्भरता इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। पांच दिवसीय यह कार्यक्रम 26 से 30 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक पर्व का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि कला को जीवित रखना, पारंपरिक कौशल को आगे बढ़ाना और कारीगरों के जीवन में सुधार के लिए अवसर पैदा करना भी है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें संस्कृति और कौशल के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी महत्व दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कारीगर, कलाकार, उद्यमी और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। आयोजन में पारंपरिक हस्तशिल्प और उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और कारोबार से जुड़े सत्र भी रखे गए हैं।
सभी धर्मों के नेताओं की मौजूदगी का जिक्र
कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि इस आयोजन की शुरुआत एक मशाल जलाकर की गई है और यूटी खादर ने इसकी अच्छी शुरुआत की है। उन्होंने कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के नेताओं की मौजूदगी का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक की पहचान विविधता और आपसी सद्भाव से जुड़ी है। कर्नाटक पर्व के माध्यम से अलग-अलग समुदायों की कला, संस्कृति और परंपराओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस आयोजन को राज्य की सांस्कृतिक विविधता के साथ पारंपरिक कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में 180 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां कारीगर अपने उत्पादों को प्रदर्शित और बेच सकेंगे।
कारीगरों को बाजार से जोड़ने पर जोर
कर्नाटक पर्व 2026 का एक प्रमुख उद्देश्य कारीगरों को सीधे ग्राहकों और खरीदारों से जोड़ना है। आयोजन में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगर अपने पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।
सरकार के अनुसार कार्यक्रम के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने, नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और कारोबार बढ़ाने के अवसर देने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, आधुनिक कारोबारी तरीकों और बाजार विस्तार से जुड़े प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के अलावा खान-पान से जुड़े स्टॉल भी लगाए गए हैं। इससे कर्नाटक की अलग-अलग सांस्कृतिक और खाद्य परंपराओं को भी लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
कला और कौशल को बढ़ावा देने की पहल
डीके शिवकुमार ने कहा कि कला और कौशल को आगे बढ़ाना कर्नाटक पर्व की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार पारंपरिक कला और हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि इनसे जुड़े कारीगरों की आजीविका भी मजबूत हो सके।
कार्यक्रम में पारंपरिक नृत्य, लोक कला और संगीत की प्रस्तुतियां भी हो रही हैं। आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा अलग-अलग विषयों पर पैनल चर्चा का भी प्रावधान है। इनमें उद्यमिता, तकनीक, वित्तीय समावेशन, महिलाओं और युवाओं का सशक्तिकरण तथा कौशल को कारोबार से जोड़ने जैसे विषय शामिल हैं।
कर्नाटक को शांति का बगीचा बताया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूटी खादर ने कर्नाटक को सभी देशों के लिए शांति का बगीचा बताया। उन्होंने कर्नाटक पर्व की शुरुआत को इतिहास और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों से जोड़ा।
खादर ने अपने संबोधन में बुद्ध और बसव के घर छोड़ने, ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाए जाने, पैगंबर द्वारा ईश्वरीय वाणी सुनने, भीमबाई द्वारा बाबासाहेब अंबेडकर को जन्म देने, महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस का नेतृत्व करने और सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने जैसे प्रसंगों का उल्लेख किया।
उन्होंने इन घटनाओं को कार्यक्रम की व्यापक अवधारणा से जोड़ते हुए इतिहास, विचार, संस्कृति और सामाजिक बदलाव के अलग-अलग संदर्भ सामने रखे।
पांच दिन तक चलेगा आयोजन
‘कर्नाटक पर्व 2026’ का आयोजन 26 से 30 सितंबर तक बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड्स में किया जा रहा है। आयोजन स्थल पर 180 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। यहां कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री का अवसर दिया गया है।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। आयोजन के पहले दिन गायक विजय प्रकाश की प्रस्तुति रखी गई है, जबकि अगले दिनों में लोक कला, संगीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
सरकार की ओर से आयोजन में आम लोगों को भी शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। प्रवेश निशुल्क रखा गया है। इसका उद्देश्य लोगों को राज्य की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों से जोड़ना है।
उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने की कोशिश
कर्नाटक पर्व में कला और संस्कृति के साथ आर्थिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कारीगरों को केवल प्रदर्शनी तक सीमित रखने के बजाय उन्हें संभावित ग्राहकों और खरीदारों तक पहुंच देने पर जोर है।
आयोजकों के मुताबिक डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स जैसे विषयों पर प्रशिक्षण से कारीगरों को पारंपरिक बाजार से आगे बढ़कर ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही उद्यमिता और बाजार विस्तार पर चर्चा भी की जा रही है।
महिलाओं और युवाओं को कौशल और उद्यमिता से जोड़ने के विषय को भी कार्यक्रम में जगह दी गई है। इस तरह आयोजन को सांस्कृतिक प्रदर्शन के साथ कौशल विकास और कारोबार के अवसरों से जोड़ने की कोशिश की गई है।
‘कर्नाटक पर्व 2026’ के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विविधता में एकता, कला संरक्षण और कौशल आधारित आत्मनिर्भरता को आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बताया। वहीं यूटी खादर ने कर्नाटक की विविध सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान पर जोर दिया। पांच दिन तक चलने वाले इस आयोजन में कला, हस्तशिल्प, खान-पान, संगीत, संस्कृति और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।