बेंगलुरु । कर्नाटक की नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने नवरात्रि के पावन अवसर पर सामाजिक समरसता और बेटियों के सम्मान का संदेश दिया। रविवार को उन्होंने बेंगलुरु स्थित अपने आधिकारिक कार्यालय एवं निवास 'लोक भवन' में विशेष कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने शहर के गांधीनगर क्षेत्र स्थित नागम्मानगर झुग्गी बस्ती की जरूरतमंद बच्चियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया। उन्होंने पारंपरिक विधि-विधान से बच्चियों का कन्या पूजन किया और उनके साथ बैठकर भोजन भी किया। कार्यक्रम के बाद राज्यपाल ने बच्चियों को स्कूल बैग, किताबें और स्टेशनरी सामग्री उपहार स्वरूप भेंट की। राज्यपाल की इस पहल को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता और बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

लोक भवन में आयोजित हुआ विशेष कन्या पूजन

नवरात्रि के अवसर पर बेंगलुरु स्थित लोक भवन में विशेष कन्या पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बच्चियों को आमंत्रित किया गया।

राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने गांधीनगर के नागम्मानगर झुग्गी क्षेत्र की बच्चियों को लोक भवन बुलाकर उनका स्वागत किया।

इसके बाद उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कन्या पूजन किया। कार्यक्रम के माध्यम से बेटियों के प्रति सम्मान और समाज में समानता का संदेश देने का प्रयास किया गया।

सामान्यतः लोक भवन में प्रशासनिक एवं औपचारिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, लेकिन इस बार नवरात्रि के अवसर पर जरूरतमंद परिवारों की बच्चियों को विशेष अतिथि बनाया गया।

जरूरतमंद बच्चियों को दिया विशेष सम्मान

राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने नवरात्रि उत्सव को समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बच्चियों के साथ मनाने का निर्णय लिया।

इस पहल के तहत उन्होंने झुग्गी बस्ती की बच्चियों को कन्या पूजन के लिए आमंत्रित किया।

कार्यक्रम में बच्चियों को सम्मानपूर्वक बैठाकर पारंपरिक तरीके से पूजा की गई।

भारतीय धार्मिक परंपरा में नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर छोटी बच्चियों को देवी दुर्गा के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है।

राज्यपाल द्वारा जरूरतमंद बच्चियों को इस कार्यक्रम में शामिल करने से धार्मिक आयोजन को सामाजिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास सामने आया।

बच्चियों के साथ बैठकर किया भोजन

कन्या पूजन संपन्न होने के बाद राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने बच्चियों के साथ भोजन किया।

इस दौरान कार्यक्रम में शामिल बच्चियों को विशेष सम्मान दिया गया और उनके साथ आत्मीय वातावरण में समय बिताया गया।

राज्यपाल का बच्चियों के साथ भोजन करना इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

ऐसे कार्यक्रमों में सामूहिक भोजन को सामाजिक समरसता और आपसी सम्मान के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि धार्मिक उत्सवों की खुशियां समाज के सभी वर्गों के साथ साझा की जा सकती हैं।

स्कूल बैग, किताबें और स्टेशनरी भेंट की

कन्या पूजन और भोजन के बाद राज्यपाल ने बच्चियों को उपहार भी प्रदान किए।

इन उपहारों में स्कूल बैग, किताबें और स्टेशनरी सामग्री शामिल थी।

बच्चियों को शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने का उद्देश्य उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना और शिक्षा के महत्व को रेखांकित करना रहा।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए किताबें, स्कूल बैग और अन्य आवश्यक सामग्री उपयोगी होती है।

इस तरह राज्यपाल ने नवरात्रि के धार्मिक आयोजन को बालिका शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश से भी जोड़ा।

हालांकि, कार्यक्रम में शामिल बच्चियों की कुल संख्या और वितरित सामग्री की मात्रा के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

16 अक्टूबर को राज्यपाल पद की ली थी शपथ

डॉ. सुधा यादव ने हाल ही में कर्नाटक की राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला है।

उन्होंने 16 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के लोक भवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल पद की शपथ ली थी।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी।

समारोह में निवर्तमान राज्यपाल थावरचंद गहलोत, राज्य सरकार के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

डॉ. सुधा यादव कर्नाटक की दूसरी महिला राज्यपाल हैं। उनसे पहले वीएस रमादेवी ने वर्ष 1999 से 2002 के बीच राज्यपाल का पद संभाला था।

कौन हैं राज्यपाल डॉ. सुधा यादव?

डॉ. सुधा यादव हरियाणा की वरिष्ठ राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों में शामिल रही हैं।

वह वर्ष 1999 से 2004 तक हरियाणा के महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं।

इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है।

उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी उल्लेखनीय है। उन्होंने रसायन विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त की और पीएचडी की उपाधि हासिल की।

उनके पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल में डिप्टी कमांडेंट थे और वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए थे।

राजनीतिक और सामाजिक जीवन के अनुभव के बाद अब डॉ. सुधा यादव कर्नाटक की राज्यपाल के रूप में संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रही हैं।

बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का संदेश

लोक भवन में आयोजित कन्या पूजन कार्यक्रम ने बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के महत्व को भी सामने रखा।

समाज में बेटियों के लिए शिक्षा, सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बच्चियों को शिक्षा से जोड़ना उनके भविष्य के लिए आवश्यक है।

राज्यपाल की ओर से स्कूल बैग और पुस्तकें भेंट करने की पहल इस दिशा में एक प्रतीकात्मक प्रयास रही।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, विद्यालय जाने वाली बच्चियों को आवश्यक शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करना भी जरूरी होता है।

नवरात्रि में कन्या पूजन की विशेष परंपरा

नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्वों में शामिल है। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं।

नवरात्रि के अंतिम दिनों में कन्या पूजन की परंपरा विशेष महत्व रखती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्याओं का पूजन देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने का माध्यम है।

इस अवसर पर बच्चियों को भोजन कराया जाता है और उपहार प्रदान किए जाते हैं।

कर्नाटक की राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने इसी परंपरा को निभाते हुए जरूरतमंद बच्चियों के साथ नवरात्रि का उत्सव मनाया।

सामाजिक सहभागिता की मिसाल बना कार्यक्रम

लोक भवन में आयोजित कन्या पूजन कार्यक्रम की विशेषता केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रही।

झुग्गी बस्ती की बच्चियों को आमंत्रित करने, उनके साथ भोजन करने और उन्हें पढ़ाई की सामग्री भेंट करने से आयोजन में सामाजिक सहभागिता का संदेश भी शामिल हुआ।

यह पहल दर्शाती है कि धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों को जरूरतमंद समुदायों के साथ संवाद और सहयोग का माध्यम बनाया जा सकता है।

नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. सुधा यादव के इस कार्यक्रम ने नवरात्रि के अवसर पर बेटियों के सम्मान और शिक्षा के महत्व को प्रमुखता दी।

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