बेलगावी। कर्नाटक में गन्ने के बेहतर दाम और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा दशहरा के बाद किसानों, चीनी मिल मालिकों और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक बुलाने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी किसानों ने अपना संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री ने बेलगावी जिले के कित्तूर पहुंचकर आंदोलनकारी किसानों से मुलाकात की और उनसे आंदोलन समाप्त कर बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। हालांकि, किसानों ने साफ कर दिया कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की ओर से भी उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने केंद्रीय मंत्री को 18 अक्टूबर को कित्तूर आने का निमंत्रण दिया है।

कित्तूर पहुंचे मुख्यमंत्री, किसानों से की मुलाकात

कर्नाटक में गन्ने के उचित मूल्य की मांग को लेकर चल रही पदयात्रा शनिवार को बेलगावी जिले के कित्तूर पहुंची। यहां कुछ समय के लिए आंदोलनकारियों का मार्च रुका हुआ था।

इसी दौरान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार किसानों के बीच पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध करते हुए भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से ले रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों की आर्थिक परेशानियों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता है। इसके लिए किसानों, चीनी मिल संचालकों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों को एक साथ बैठना होगा।

उन्होंने किसान संगठनों से अपील की कि वे सरकार को समस्या के समाधान के लिए समय दें।

दशहरा के बाद सुवर्ण विधान सौधा में होगी बैठक

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने किसानों को आश्वासन दिया कि दशहरा त्योहार के बाद बेलगावी स्थित सुवर्ण विधान सौधा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में गन्ना उत्पादकों, चीनी मिल मालिकों और संबंधित अधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में गन्ने की कीमत, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और किसानों की अन्य समस्याओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय अधिकारियों को इस बैठक में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े मुद्दों पर एक साथ बातचीत हो सके।

हालांकि, बैठक की अंतिम तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। मुख्यमंत्री ने संबंधित पक्षों से चर्चा करने के बाद तारीख तय करने की बात कही है।

किसानों ने कहा- केवल आश्वासन से नहीं रुकेगा आंदोलन

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद प्रदर्शनकारी किसान आंदोलन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हुए।

किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से गन्ने के बेहतर दाम की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकला है।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

किसान संगठनों का कहना है कि केवल बैठक आयोजित करने की घोषणा पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपनी फसल के लिए उचित मूल्य और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले फैसले चाहिए।

किसानों ने केंद्र सरकार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से स्पष्ट आश्वासन की मांग की।

प्रह्लाद जोशी को 18 अक्टूबर को कित्तूर आने का निमंत्रण

प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को रविवार, 18 अक्टूबर को कित्तूर आने के लिए आमंत्रित किया है।

किसानों ने उनसे रानी चेन्नम्मा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने और आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन देने की मांग की।

किसानों ने कहा कि यदि केंद्रीय मंत्री कित्तूर पहुंचकर उनकी मांगों पर सकारात्मक भरोसा दिलाते हैं, तो उनका स्वागत भव्य माला पहनाकर किया जाएगा।

आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार से गन्ना और चीनी की कीमतों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की।

फिलहाल प्रह्लाद जोशी के 18 अक्टूबर को कित्तूर पहुंचने या किसानों से मुलाकात करने की पुष्टि नहीं हुई है।

हुबली तक पदयात्रा निकालने की तैयारी

गन्ना किसानों ने अपनी मांगों को लेकर हुबली तक पदयात्रा करने का निर्णय लिया है।

प्रदर्शनकारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के आवास का घेराव करने की योजना के तहत आगे बढ़ रहे हैं।

इससे पहले किसानों ने पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्होंने दोबारा पदयात्रा शुरू की।

रिपोर्टों के अनुसार, किसानों के सोमवार तक हुबली पहुंचने की संभावना जताई गई है।

आंदोलन में बड़ी संख्या में गन्ना उत्पादक शामिल हैं। किसानों का कहना है कि वे अपनी आर्थिक मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं।

गन्ने की लागत बढ़ी, किसानों की आमदनी पर दबाव

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्वीकार किया कि गन्ना किसानों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि खेती की लागत बढ़ने के बावजूद किसानों की आय पर दबाव बना हुआ है।

गन्ने की खेती में श्रम, सिंचाई, खाद, परिवहन और अन्य कृषि संसाधनों पर खर्च होता है। ऐसे में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना किसानों की समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य गन्ना उत्पादक राज्यों में भी कीमतों से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं।

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान केंद्र और राज्य सरकारों के साथ चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों के सहयोग से ही संभव है।

चीनी मिल मालिकों को भी बातचीत में शामिल करेगी सरकार

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए चीनी मिल मालिकों की भागीदारी भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि कुछ चीनी मिल संचालक घाटे का सामना करने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, मिल मालिकों को किसानों की आर्थिक परेशानियों को भी समझना चाहिए।

मुख्यमंत्री के अनुसार, गन्ना उत्पादकों और चीनी मिलों के बीच संतुलन बनाकर ऐसा समाधान तलाशना होगा, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिले और उद्योग भी संचालित रह सके।

उन्होंने संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाकर सामूहिक निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।

केंद्र ने भी बनाई समिति

गन्ना किसानों की मांगों के बीच केंद्र सरकार ने भी इस मुद्दे पर कदम उठाया है।

केंद्र ने कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की समस्याओं की समीक्षा के लिए पूर्व नीति आयोग सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।

यह समिति गन्ने के बेहतर मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी जैसी मांगों का अध्ययन करेगी।

समिति की सिफारिशें किसानों की समस्याओं के समाधान से जुड़े आगामी निर्णयों में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, अभी इसकी अंतिम रिपोर्ट या किसी मूल्य वृद्धि के फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।

सरकार के अगले कदम पर किसानों की नजर

कर्नाटक में गन्ना किसानों का आंदोलन अब केंद्र और राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने दशहरा के बाद बैठक आयोजित करने और केंद्र सरकार के समक्ष किसानों की मांगें उठाने का भरोसा दिया है।

इसके बावजूद किसान संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। उनका कहना है कि ठोस निर्णय आने तक वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।

अब किसानों की नजर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की प्रतिक्रिया और सुवर्ण विधान सौधा में प्रस्तावित बैठक पर टिकी है। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत से यह स्पष्ट हो सकेगा कि गन्ने के दाम और किसानों की अन्य मांगों पर क्या समाधान निकलता है।

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