राशन कार्ड धारकों के लिए जरूरी खबर, 'मेरा राशन' ऐप से घर बैठे e-KYC नहीं होगी मान्य
बेंगलुरु। कर्नाटक में राशन कार्ड धारकों के लिए खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने अहम चेतावनी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के ‘मेरा राशन’ मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे की गई राशन कार्ड e-KYC को कर्नाटक में आधिकारिक तौर पर मान्यता नहीं दी जाएगी। विभाग ने लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही गलत और भ्रामक जानकारी पर भरोसा नहीं करने की अपील की है।
दरअसल, राशन कार्ड की e-KYC कराने के लिए उचित मूल्य की दुकानों पर लोगों को कई बार लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा सर्वर से जुड़ी समस्याओं के कारण भी e-KYC की प्रक्रिया में परेशानी आने की बात सामने आई है। इसी बीच सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और संदेश प्रसारित होने लगे, जिनमें दावा किया गया कि राशन कार्ड धारक केंद्र सरकार के ‘मेरा राशन’ या ‘मेरा eKYC’ मोबाइल ऐप की मदद से घर बैठे ही अपनी e-KYC पूरी कर सकते हैं।
इन वीडियो को देखकर कई राशन कार्ड धारकों ने मोबाइल ऐप डाउनलोड किया और फेशियल रिकग्निशन यानी चेहरे की पहचान के माध्यम से घर बैठे e-KYC की प्रक्रिया पूरी करना शुरू कर दिया। लोगों को लगा कि ऐप पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी e-KYC राशन कार्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी अपडेट हो जाएगी। हालांकि, कर्नाटक खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने इसे लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
राज्य के रिकॉर्ड में अपडेट नहीं हो रही e-KYC
खाद्य विभाग के अनुसार केंद्र सरकार का ‘मेरा राशन’ मोबाइल ऐप ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना से जुड़ा हुआ है। लेकिन कर्नाटक राज्य खाद्य विभाग के राशन सॉफ्टवेयर और इस मोबाइल ऐप के सर्वर के बीच डेटा का सीधा लिंक नहीं है। इसी वजह से मोबाइल ऐप पर e-KYC की प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उसकी जानकारी कर्नाटक सरकार के संबंधित रिकॉर्ड में अपडेट नहीं हो रही है।
इसका मतलब यह है कि यदि कोई राशन कार्ड धारक केवल ‘मेरा राशन’ या संबंधित मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे e-KYC करता है तो उसे यह नहीं मानना चाहिए कि कर्नाटक खाद्य विभाग के रिकॉर्ड में भी उसकी e-KYC पूरी हो गई है।
खाद्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर के.पी. मधुसूदन ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए लोगों से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही गलत जानकारी से सावधान रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि मोबाइल ऐप पर e-KYC करने के बावजूद राज्य सरकार के राशन रिकॉर्ड में जानकारी अपडेट नहीं होती है।
सोशल मीडिया वीडियो से फैला भ्रम
इस पूरे मामले में भ्रम की मुख्य वजह सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो बताए जा रहे हैं। इनमें मोबाइल फोन के जरिए फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल कर घर बैठे राशन कार्ड की e-KYC करने की प्रक्रिया बताई जा रही है। उचित मूल्य की दुकानों पर लगने वाली कतार और सर्वर संबंधी परेशानियों से बचने के लिए लोगों ने इस विकल्प को आसान समझा और बड़ी संख्या में इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया।
लेकिन राज्य खाद्य विभाग के मुताबिक तकनीकी स्तर पर दोनों व्यवस्थाओं के बीच डेटा लिंक नहीं होने के कारण ऐप पर पूरी हुई प्रक्रिया राज्य के राशन सॉफ्टवेयर तक नहीं पहुंच रही है। ऐसे में मोबाइल ऐप पर प्रक्रिया पूरी दिखाई देने के बावजूद राज्य के रिकॉर्ड में संबंधित राशन कार्ड धारक की e-KYC लंबित रह सकती है।
विभाग की ओर से यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया गया है ताकि राशन कार्ड धारक गलतफहमी में न रहें। यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर मोबाइल ऐप से प्रक्रिया पूरी करके यह मान लेता है कि उसकी e-KYC आधिकारिक रूप से पूरी हो चुकी है तो बाद में उसे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
विभाग ने लोगों को किया सतर्क
खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने राशन कार्ड धारकों से कहा है कि वे e-KYC से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों और वीडियो पर आंख बंद करके भरोसा न करें। खास तौर पर घर बैठे मोबाइल ऐप से e-KYC पूरी होने के दावों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।
विभाग ने साफ किया है कि ‘मेरा राशन’ ऐप केंद्र सरकार की व्यवस्था के तहत काम करता है, जबकि कर्नाटक में राशन कार्ड से संबंधित रिकॉर्ड राज्य खाद्य विभाग के अपने सॉफ्टवेयर में दर्ज हैं। दोनों के बीच डेटा लिंक नहीं होने के कारण ऐप के माध्यम से की गई e-KYC राज्य के रिकॉर्ड में स्वतः दर्ज नहीं होती।
ऐसे में राशन कार्ड धारकों के लिए जरूरी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनकी e-KYC राज्य खाद्य विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी पूरी हुई है। केवल मोबाइल ऐप पर प्रक्रिया पूरी दिखाई देने को राज्य स्तर पर e-KYC पूरी होने का प्रमाण नहीं माना जाएगा।
खाद्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर के.पी. मधुसूदन ने लोगों से किसी भी भ्रामक सूचना से बचने और आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार ही राशन कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल जानकारी के कारण लोगों में पैदा हुए भ्रम को दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण दिया गया है।