बेंगलुरु। बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) की प्रस्तावित सुरंग परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है। एस्टीम मॉल और वेटनरी कॉलेज के बीच बनने वाली करीब 2.2 किलोमीटर लंबी सुरंग के निर्माण से 893 पेड़ों पर असर पड़ने की संभावना जताई गई है। यह परियोजना उत्तरी बेंगलुरु के महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र (ग्रीन कॉरिडोर) से होकर गुजरेगी, जिसे लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
BDA के अनुसार, सुरंग निर्माण के लिए प्रभावित होने वाले पेड़ों की पहचान की गई है। एक अधिकारी ने बताया कि कुल 893 पेड़ों में से करीब 85 प्रतिशत पेड़ों को दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने की योजना है। इन पेड़ों को यूनिवर्सिटी कैंपस और BDA की अन्य संपत्तियों में पुनर्स्थापित किया जाएगा।
हालांकि, पर्यावरणविदों का कहना है कि पेड़ों को दूसरी जगह लगाना हमेशा पूरी तरह प्रभावी समाधान नहीं होता। उनका तर्क है कि पुराने पेड़ केवल हरियाली ही नहीं देते, बल्कि वे स्थानीय जैव विविधता, पक्षियों और छोटे जीवों के प्राकृतिक आवास का भी हिस्सा होते हैं। ऐसे में पेड़ों के स्थानांतरण से क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।
ग्रेटर बैंगलोर अथॉरिटी (GBA) के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (DCF) सुदर्शन ने बताया कि BDA को अभी इस परियोजना के लिए फॉर्म-1 के तहत पूरी आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी है। आवेदन मिलने के बाद वन विभाग प्रस्ताव की जांच करेगा और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
प्रस्तावित सुरंग मार्ग कई महत्वपूर्ण हरित क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इसमें वेटनरी कॉलेज कैंपस, हेब्बल ट्री पार्क, हेब्बल झील का बफर एरिया और आसपास के संस्थागत परिसर शामिल हैं। ये क्षेत्र शहर के बीच मौजूद जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं।
हेब्बल क्षेत्र उत्तरी बेंगलुरु के प्रमुख पर्यावरणीय क्षेत्रों में से एक है। यहां मौजूद पेड़-पौधे और जल क्षेत्र शहर के तापमान को नियंत्रित करने, वायु गुणवत्ता सुधारने और कई प्रजातियों के लिए प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने में भूमिका निभाते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत अध्ययन जरूरी है। उनका कहना है कि विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
BDA की ओर से प्रस्तावित सुरंग परियोजना का उद्देश्य यातायात दबाव को कम करना और शहर के उत्तरी हिस्सों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाना है। बेंगलुरु में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए प्रशासन नई सड़क और परिवहन परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के दौरान पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जाएगा और पेड़ों को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पेड़ों के स्थानांतरण के साथ-साथ हरित क्षेत्र को बनाए रखने के लिए अन्य उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।
वहीं, स्थानीय नागरिक और पर्यावरण समूह इस बात पर नजर रख रहे हैं कि परियोजना को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है। उनका कहना है कि बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते शहर में हरित क्षेत्रों की सुरक्षा भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहर के विकास के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में वन विभाग की समीक्षा और मंजूरी प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट होगा कि परियोजना किस रूप में आगे बढ़ेगी।
फिलहाल BDA की सुरंग परियोजना पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि अधिकारियों की जांच और निर्णय प्रक्रिया में पर्यावरणीय चिंताओं को कितना महत्व दिया जाता है।