लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर संगोष्ठी कार्यशाला में शामिल हुई मंत्री रजवाड़े
छग
Bhatgaon. भटगांव। भटगांव स्थित सांस्कृतिक भवन में आज एक ऐतिहासिक और प्रेरणास्पद आयोजन के अंतर्गत त्याग, सेवा और न्याय की प्रतीक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी की 300वीं जयंती के अवसर पर विधानसभा स्तरीय संगोष्ठी और कार्यशाला का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और समाज सेवा के आदर्शों से छात्राओं को परिचित कराना और उन्हें प्रेरित करना था। संगोष्ठी में भटगांव विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों से आई छात्राओं ने भाग लिया, साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े का प्रेरणादायक संबोधन
अपने उद्बोधन में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा “लोकमाता अहिल्याबाई होलकर न केवल एक आदर्श शासक थीं, बल्कि वे न्यायप्रियता, समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक थीं। उन्होंने अपने शासनकाल में अनेक धर्मस्थलों, घाटों और सामाजिक संस्थानों का निर्माण कर समाज को एक नई दिशा दी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियां नहीं निभातीं, वे शासन, नेतृत्व और समाज सुधार में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।” मंत्री ने छात्राओं को अहिल्याबाई होलकर के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने अंदर नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता और सेवा भाव को विकसित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवतियों को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों को भी अपनाने की आवश्यकता है।
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर RSS संघ के कार्यवाह विजय शर्मा, नगर पंचायत अध्यक्ष परमेश्वरी राजवाड़े, भाजपा मंडल अध्यक्ष रमेश गुप्ता, तथा जनपद उपाध्यक्ष मनमत बछाड़ ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए छात्राओं और युवाओं को लोकमाता अहिल्याबाई के आदर्शों का अनुसरण करने की प्रेरणा दी। वक्ताओं ने बताया कि अहिल्याबाई ने शासन की जिम्मेदारी उस समय संभाली जब महिलाएं सामाजिक बंधनों में जकड़ी होती थीं, लेकिन उन्होंने यह साबित किया कि महिलाओं में भी दृढ़ इच्छाशक्ति, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक कौशल की कोई कमी नहीं होती।
छात्राओं की सहभागिता
कार्यशाला के दौरान छात्राओं ने भाषण, निबंध लेखन और पोस्टर प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इन प्रतियोगिताओं का विषय था- “अहिल्याबाई होलकर का जीवन दर्शन और आज की नारी”। छात्राओं ने लोकमाता के जीवन प्रसंगों को प्रस्तुत करते हुए अपने विचार साझा किए, जो पूरे सभागार को भावविभोर कर गया। कार्यक्रम में विजेता छात्राओं को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। छात्राओं के जोश और प्रतिभा को देखकर अतिथियों ने सराहना करते हुए कहा कि इन बालिकाओं में ही देश का उज्ज्वल भविष्य निहित है। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास की महान विभूतियों के योगदान को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर, उन्हें व्यवहारिक जीवन में उतारने की आवश्यकता है। अहिल्याबाई होलकर जैसी महान महिलाओं की प्रेरणा आज की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बन सकती है, विशेषकर उन छात्राओं के लिए जो अपने जीवन में कुछ कर दिखाने की चाह रखती हैं।