CG: कोर्ट के आदेश पर मोटर कारोबारी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

छग

Update: 2026-06-06 16:21 GMT
Durg. दुर्ग। दुर्ग जिले में पुरानी कार की बिक्री को लेकर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक परिवार ने अपनी कार बेचने के लिए मोटर कारोबारी को सौंपी थी, लेकिन लंबे समय तक वाहन और उससे संबंधित राशि का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिलने पर मामला न्यायालय तक पहुंच गया। अब न्यायालय के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी कारोबारी के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, पदमनाभपुर निवासी हितेश दुलानी ने न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया कि उनके भाई पंकज दुलानी के नाम पर पंजीकृत कार क्रमांक सीजी-10 बीसी-1345 को बिक्री के उद्देश्य से रायपुर स्थित शिवाय मोटर्स के संचालक संजय पटेल को सौंपा गया था। शिकायत के अनुसार वाहन पूरी तरह चालू हालत में था और उसके सभी आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध थे।

परिवार को उम्मीद थी कि वाहन बिकने के बाद उन्हें निर्धारित राशि प्राप्त हो जाएगी, लेकिन समय बीतने के बाद भी न तो वाहन बिक्री की रकम मिली और न ही वाहन की स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब भी वाहन के संबंध में जानकारी मांगी गई, तब यही कहा जाता रहा कि अभी तक कोई खरीदार नहीं मिला है। परिजनों का कहना है कि कई महीने गुजर जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर उन्होंने स्वयं जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उन्हें पता चला कि जुलाई 2023 में उक्त वाहन को CAR24 के माध्यम से करीब 25,230 रुपये में स्क्रैप के लिए भेजा गया था। हालांकि परिवार को स्क्रैप प्रमाण पत्र, चेसिस प्लेट या अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने इस संबंध में CAR24 के अधिकारियों और कर्मचारियों से फोन, ई-मेल, व्हाट्सएप और कार्यालय पहुंचकर संपर्क किया।

पूछताछ के दौरान उन्हें ऐसी जानकारी मिली कि संबंधित वाहन को स्क्रैप करने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया है। इस जानकारी के बाद परिवार ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। परिवार का आरोप है कि वाहन की बिक्री के लिए उनकी ओर से किसी प्रकार का विक्रय अनुबंध, सहमति पत्र या फॉर्म-29 पर हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। ऐसे में वाहन का स्वामित्व हस्तांतरण किस आधार पर किया गया, यह जांच का विषय है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि वाहन अभी भी मूल स्वामी के नाम पर दर्ज है और उसका उपयोग किसी दुर्घटना या अन्य अवैध गतिविधि में होता है तो कानूनी जिम्मेदारी वाहन मालिक पर आ सकती है। हितेश दुलानी ने बताया कि उन्होंने पहले पदमनाभपुर थाना और बाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी शिकायत दी थी।

लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग ने शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण किया। प्रारंभिक स्तर पर मामला धोखाधड़ी से संबंधित प्रतीत होने पर न्यायालय ने पुलिस को अपराध दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वाहन वास्तव में स्क्रैप किया गया था या किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। साथ ही वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण, दस्तावेजों की वैधता और कथित लेन-देन से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है।
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