जब DM बने हलवाई, खुद बनाए पेड़े और बढ़ाया स्थानीय कारोबारियों का हौसला

Update: 2026-07-21 14:33 GMT

जमुई। बिहार के जमुई जिले में मंगलवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला, जब जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल अचानक घनबेरिया स्थित प्रसिद्ध पेड़ा दुकानों पर पहुंच गए। अधिकारियों के इस दौरे का उद्देश्य सिर्फ निरीक्षण करना नहीं था, बल्कि स्थानीय कारोबारियों और कारीगरों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना भी था। इस दौरान जिलाधिकारी खुद पेड़ा बनाने की प्रक्रिया में शामिल हुए और पारंपरिक तरीके से पेड़ा तैयार कर स्थानीय उत्पाद की गुणवत्ता को परखा।

घनबेरिया का प्रसिद्ध पेड़ा लंबे समय से अपनी खास स्वाद और पारंपरिक बनाने की शैली के लिए जाना जाता है। जिलाधिकारी ने दुकानदारों से पेड़ा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने दूध को तैयार करने, उसे गाढ़ा करने और पेड़े का आकार देने जैसे कामों को करीब से देखा। इसके बाद उन्होंने खुद अपने हाथों से पेड़ा बनाकर देखा और उसका स्वाद भी चखा।

डीएम नवीन ने घनबेरिया के पेड़े की गुणवत्ता और स्वाद की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मिठाई नहीं बल्कि जमुई की पहचान और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा उत्पाद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि घनबेरिया के पेड़े को भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग दिलाने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर जरूरी पहल की जाएगी। GI टैग मिलने से इस स्थानीय उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है और कारोबारियों को भी इसका फायदा मिलेगा।

जिलाधिकारी ने पेड़ा कारोबारियों से अपील की कि वे अपने उत्पाद की गुणवत्ता को हमेशा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि घनबेरिया क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी व्यापार और पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। यहां गिद्धेश्वर मंदिर, गरही डैम और भगवान महावीर की जन्मस्थली जाने वाले मार्ग से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक गुजरते हैं। ऐसे में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर क्षेत्र में रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

इस दौरान पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने भी दुकानों और आसपास के क्षेत्र का जायजा लिया। उन्होंने व्यापारियों से कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की। साथ ही उन्होंने दुकानदारों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने और बाहर से आने वाले पर्यटकों के साथ बेहतर व्यवहार करने की सलाह दी।

निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने घनबेरिया के पास स्थित ऐतिहासिक नौलखा गढ़ के संरक्षण और उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना था कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक महत्व रखता है, लेकिन उचित देखरेख और विकास के अभाव में इसकी पहचान सीमित रह गई है।

ग्रामीणों की मांग पर जिलाधिकारी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए जल्द समीक्षा बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि नौलखा गढ़ के संरक्षण, जीर्णोद्धार और घनबेरिया के पेड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विकास की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

डीएम और एसपी के इस दौरे से स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला। व्यापारियों ने कहा कि पहली बार किसी बड़े अधिकारी ने उनके पारंपरिक कारोबार को इतनी गंभीरता से समझने की कोशिश की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन की पहल से घनबेरिया के पेड़े को नई पहचान मिलेगी और क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इस मौके पर पैक्स अध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार सिंह सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। अधिकारियों के इस आत्मीय संवाद और स्थानीय उत्पाद को बढ़ावा देने की पहल को क्षेत्र के विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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