पटना। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत ने शनिवार को पटना स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (CNLU) में कानून के छात्रों के साथ ओपन हाउस बातचीत की। CNLU की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, किसी मौजूदा मुख्य न्यायाधीश की लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ इस तरह की यह पहली सीधी बातचीत थी। इस दौरान छात्रों को CJI से सीधे सवाल पूछने और कानूनी शिक्षा, न्यायिक व्यवस्था तथा वकालत से जुड़े विभिन्न विषयों पर उनके विचार जानने का अवसर मिला।कार्यक्रम का आयोजन CNLU के अशोक ऑडिटोरियम में किया गया। इस मौके पर पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और CNLU के चांसलर जस्टिस वी. कामेश्वर राव भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों और बड़ी संख्या में कानून के छात्रों ने हिस्सा लिया।
CNLU की एकेडमिक एंड डिबेटिंग कमेटी और लीगल एड सेल के छात्रों ने संयुक्त रूप से इस ओपन हाउस बातचीत का आयोजन किया। कार्यक्रम को पारंपरिक भाषण तक सीमित रखने के बजाय संवाद के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को अपने सवाल सीधे देश के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखने का अवसर मिला।सेशन के दौरान जस्टिस सूर्य कांत ने छात्रों की ओर से पूछे गए कई सवालों के जवाब दिए। चर्चा में कानूनी शिक्षा, विद्यार्थियों के अधिकार, न्यायिक सुधार और युवा वकीलों के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। छात्रों ने न्यायपालिका और कानूनी पेशे से जुड़े मुद्दों को लेकर भी अपनी जिज्ञासाएं सामने रखीं।
कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि उन्हें न्यायपालिका के शीर्ष पद पर मौजूद व्यक्ति से सीधे संवाद का मौका मिला। ओपन हाउस प्रारूप में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों और न्यायपालिका के बीच संवाद को प्रमुखता दी गई। विद्यार्थियों ने अपने शैक्षणिक जीवन से लेकर भविष्य में कानूनी पेशे में आने वाली चुनौतियों तक से संबंधित सवाल पूछे।
कानूनी शिक्षा से जुड़े सवालों पर भी कार्यक्रम में चर्चा हुई। देश में कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के सामने बदलते कानूनी और सामाजिक परिवेश को समझने की चुनौती रहती है। ऐसे में न्यायपालिका से जुड़े अनुभवी लोगों के साथ संवाद छात्रों के लिए व्यावहारिक समझ विकसित करने का माध्यम बन सकता है।छात्रों के अधिकारों से जुड़े विषय भी इस बातचीत का हिस्सा बने। लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान छात्रों के शैक्षणिक वातावरण और उनके अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर सवाल पूछे गए। इसके अलावा न्यायिक व्यवस्था में सुधारों को लेकर भी विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासा सामने रखी, जिनका CJI सूर्य कांत ने जवाब दिया।
युवा वकीलों के सामने आने वाली चुनौतियों का मुद्दा भी ओपन हाउस सेशन में प्रमुखता से उठा। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद अदालतों में प्रैक्टिस शुरू करने वाले नए वकीलों को शुरुआती दौर में कई तरह की पेशेवर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। छात्रों ने इस विषय को लेकर भी सवाल किए और न्यायिक क्षेत्र में अपने भविष्य से जुड़ी बातों पर चर्चा की।इस कार्यक्रम की एक विशेषता यह रही कि इसे CNLU के छात्रों की समितियों ने मिलकर आयोजित किया। एकेडमिक एंड डिबेटिंग कमेटी तथा लीगल एड सेल ने कार्यक्रम की व्यवस्था में संयुक्त भूमिका निभाई। इससे छात्रों को न केवल मुख्य न्यायाधीश के साथ बातचीत का अवसर मिला, बल्कि शैक्षणिक गतिविधियों के साथ न्याय और कानूनी सहायता जैसे विषयों से जुड़े कार्यक्रम के आयोजन में भागीदारी का भी मौका मिला।
CNLU के अशोक ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विश्वविद्यालय के चांसलर जस्टिस वी. कामेश्वर राव की मौजूदगी ने भी कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बनाया। देश और राज्य की न्यायपालिका से जुड़े वरिष्ठ न्यायाधीशों की उपस्थिति में विद्यार्थियों ने कानूनी क्षेत्र से जुड़े सवालों पर चर्चा की।CNLU की प्रेस रिलीज के अनुसार, किसी मौजूदा CJI की ओर से लॉ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के साथ इस प्रकार की सीधी बातचीत पहली बार आयोजित हुई। ऐसे में विश्वविद्यालय के लिए भी यह कार्यक्रम विशेष रहा। ओपन हाउस के माध्यम से छात्रों को औपचारिक संबोधन सुनने के बजाय सवाल-जवाब के जरिए संवाद करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चा का दायरा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा। इसमें कानूनी पेशे में प्रवेश करने वाले युवाओं की चुनौतियां, न्यायिक व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों से संबंधित विषय भी शामिल किए गए। इससे छात्रों को न्यायपालिका और कानूनी पेशे से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का मौका मिला।कुल मिलाकर CNLU में आयोजित यह ओपन हाउस सेशन कानून के विद्यार्थियों और न्यायपालिका के बीच सीधे संवाद का मंच बना। CJI जस्टिस सूर्य कांत ने छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए कानूनी शिक्षा, अधिकारों, न्यायिक सुधारों और युवा वकीलों की चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। विश्वविद्यालय की ओर से इसे मौजूदा CJI और लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच अपनी तरह की पहली सीधी बातचीत बताया गया है।