शराब नष्ट करने के दौरान खेत में बहा हजारों लीटर तरल, 13 कट्ठे की धान की फसल को नुकसान
बांका। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बीच बांका जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। उत्पाद विभाग द्वारा जब्त अवैध शराब को नष्ट करने की प्रक्रिया के दौरान बड़ी मात्रा में तरल पास के एक किसान के खेत में पहुंच गया। किसान का आरोप है कि इससे करीब 13 कट्ठे में लगी धान की हरी-भरी फसल पीली पड़ने लगी और अब फसल के बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, करीब एक सप्ताह पहले उत्पाद विभाग ने विभिन्न मामलों में जब्त की गई अवैध शराब को नष्ट करने की कार्रवाई की थी। बताया गया कि कुल 74 मामलों में जब्त 21 हजार 500 लीटर से अधिक शराब का नष्टीकरण किया गया। इसी दौरान बड़ी मात्रा में शराब और उससे मिला तरल कार्यालय परिसर से बहते हुए पास के खेत तक पहुंच गया।
खेत में उस समय धान की फसल लगी हुई थी। किसान के अनुसार शराबयुक्त तरल खेत में पहुंचने के बाद फसल पर इसका असर दिखाई देने लगा। पहले हरे दिखाई देने वाले धान के पौधे धीरे-धीरे पीले पड़ने लगे। कई हिस्सों में पौधों के झुलसने जैसी स्थिति बन गई है।
किसान का कहना है कि उसने काफी मेहनत और खर्च के बाद खेत में धान की फसल लगाई थी। फसल तैयार होने की उम्मीद थी, लेकिन अचानक खेत में शराबयुक्त पानी पहुंचने के बाद उसकी मेहनत पर संकट खड़ा हो गया। करीब 13 कट्ठे में लगी फसल प्रभावित होने से उसे आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
मामला सामने आने के बाद शराब नष्ट करने की प्रक्रिया और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में शराब को नष्ट करते समय उससे निकलने वाले तरल को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने की व्यवस्था की जानी थी। किसान का आरोप है कि पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण तरल सीधे उसके खेत में पहुंच गया।
बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। शराबबंदी कानून के तहत राज्य में पकड़ी जाने वाली अवैध शराब को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नष्ट किया जाता है। अलग-अलग कार्रवाई में जब्त शराब को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट करने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है।
बांका में भी 74 मामलों में जब्त शराब के नष्टीकरण की कार्रवाई की गई थी। इसमें 21,500 लीटर से अधिक अवैध शराब शामिल बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब नष्ट किए जाने के दौरान तरल के बहाव ने पास के खेत को प्रभावित कर दिया।
किसान के मुताबिक घटना के बाद फसल की स्थिति लगातार खराब होती गई। धान के पौधों का रंग बदलने लगा और खेत के प्रभावित हिस्से में पौधे कमजोर पड़ गए। किसान को आशंका है कि यदि फसल पूरी तरह खराब हो गई तो उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जब्त शराब को नष्ट करते समय आसपास के खेतों और पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे। किसान का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण उसके खेत में शराब पहुंची और फसल प्रभावित हुई। हालांकि नुकसान की वास्तविक मात्रा का आकलन जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
धान की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी सहित कई स्तरों पर खर्च होता है। किसान महीनों तक फसल की देखभाल करता है। ऐसे में कटाई से पहले फसल को नुकसान पहुंचने से किसान को उत्पादन और आय दोनों का नुकसान हो सकता है। प्रभावित किसान भी अब अपनी फसल को लेकर चिंतित है।
घटना की जानकारी स्थानीय स्तर पर फैलने के बाद आसपास के लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई। खेत में लगी धान की फसल के पीले पड़ने की तस्वीरें सामने आने के बाद शराब नष्टीकरण की व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि शराब का नष्टीकरण सरकारी प्रक्रिया के तहत किया गया था। ऐसे में यदि नष्टीकरण के दौरान निकला तरल खेत तक पहुंचा है तो यह जांच का विषय है कि इसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी और इतनी बड़ी मात्रा में तरल खेत तक कैसे पहुंच गया।
किसान की ओर से प्रभावित फसल को लेकर नुकसान की बात कही जा रही है। फसल के कितने हिस्से को वास्तविक नुकसान हुआ है और धान के उत्पादन पर इसका कितना असर पड़ेगा, इसका आकलन कृषि विशेषज्ञों या संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
यह भी जांच का विषय है कि खेत में पहुंचे तरल में शराब की मात्रा कितनी थी और फसल के पीले पड़ने का प्रत्यक्ष कारण वही था या अन्य कारक भी जिम्मेदार हैं। किसान का दावा है कि शराब नष्ट किए जाने के बाद ही फसल की हालत बिगड़ी।
घटना के बाद उत्पाद विभाग द्वारा जब्त शराब के नष्टीकरण के दौरान अपनाई जाने वाली व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित हुआ है। बड़ी मात्रा में शराब नष्ट करते समय उसके सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था जरूरी होती है, ताकि आसपास की जमीन, फसल या जलस्रोत प्रभावित न हों।
फिलहाल किसान अपने 13 कट्ठे में लगी धान की फसल को लेकर परेशान है। उसके मुताबिक फसल तेजी से पीली पड़ रही है और कई पौधे झुलसने की स्थिति में पहुंच गए हैं। किसान को आशंका है कि पूरी फसल खराब होने पर उसे बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
अब संबंधित अधिकारियों की जांच और नुकसान के आकलन के बाद ही स्पष्ट होगा कि किसान की फसल को कितना नुकसान हुआ और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है। घटना ने शराबबंदी के तहत जब्त शराब के नष्टीकरण की प्रक्रिया में सावधानी और सुरक्षित निस्तारण की जरूरत को जरूर सामने ला दिया है।