Supaul. सुपौल। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुपौल में उन्होंने कहा कि कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल में लंबे समय से बाढ़ की समस्या बनी हुई है और इसके स्थायी समाधान के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना चाहिए।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सिंचाई व्यवस्था और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर वर्षों से बड़ी रकम खर्च हुई, लेकिन हालात नहीं सुधरे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा बाढ़ में कई जगह नाव, सामुदायिक रसोई, पॉलिथीन, पशुओं के लिए चारा, शौचालय और पेयजल जैसी जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े उनके कुछ दावों से अलग तस्वीर दिखाते हैं। बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के 23 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 15 जिलों में करीब 50.49 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित थे। छह राहत शिविरों में 7,714 लोगों को रखा गया था, तीन सामुदायिक रसोई संचालित थीं और राहत-बचाव में एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की 35 टीमें और 391 नावें लगाई गई थीं। पप्पू यादव ने करीब 56 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा किया और कहा कि वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गांव-गांव जाकर हालात देख चुके हैं। इससे पहले भी उन्होंने 22 जिलों में करीब 56 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा किया था।
उन्होंने केंद्र सरकार पर बिहार की अनदेखी का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री और केंद्र की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार की 16 सितंबर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री के निर्देश पर बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था और केंद्र की ओर से हरसंभव वित्तीय एवं बुनियादी सहायता का आश्वासन दिया था।
पप्पू यादव ने राज्य सरकार और विपक्ष दोनों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं पर राजनीतिक दलों को गंभीरता से काम करना चाहिए। बक्सर से लेकर बगहा, बेतिया, गोपालगंज, छपरा, पटना, मुंगेर और लखीसराय तक कई इलाकों की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने राहत व्यवस्था बढ़ाने की मांग की। बिहार में हाल के दिनों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। 23 सितंबर तक 576 ग्राम पंचायतें प्रभावित थीं और कोसी तथा गंगा कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं।
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