Yoga Tips: बिना ज्यादा मेहनत के घटानी है पेट की चर्बी तो ये योगासन आएंगे काम

Update: 2025-11-25 03:24 GMT
Yoga Tips: पेट की चर्बी कोई रातों-रात नहीं बढ़ती और न ही रातों-रात घटती है। लेकिन कुछ सरल योगासनों को अपनाकर पेट की चर्बी को पिघलाया जा सकता है। कुछ आसन पाचन में सुधार लाते हैं और शरीर को हल्का महसूस कराने में सहायक है। इस लेख में उन्हीं आसनों के बारे में बताया जा रहा है, जिनके रोजाना 15 से 20 मिनट अभ्यास से पेट की चर्बी को कम किया जा सकता है, वो भी ज्यादा मेहनत या भारीभरकम वर्कआउट किए।
आप सुबह खाली पेट 10-15 मिनट रोजाना अभ्यास करें। नए योगी हैं तो हर आसन 20-30 सेकंड तक करें। लगातार अभ्यास करने से तीन से चार हफ्तों में फर्क दिखने लगता है।
ताड़ासन:
ताड़ासन योगासन की दुनिया का मूल स्वर है। इससे रीढ़ एक सीधी रेखा में आती है। पेट के आसपास की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव आता है और शरीर के संतुलन में सुधार होता है। इसके अभ्यास के लिए दोनों पैर मिलाकर खड़े हो जाएं। फिर हाथ ऊपर उठाएं, उंगलियां जोड़ें और पूरा शरीर आसमान की ओर खींचें। 30- 40 सेकंड इसी स्थिति में रहें। इससे कोर मसल्स एक्टिव होती हैं, शरीर की मुद्रा सुधरती है और पेट का फैलाव कम होता है।
पवनमुक्तासन:
यह आसन पाचन के लिए रामबाण है। गैस, ब्लोटिंग और कब्ज घटाता है और पेट की अंदरूनी चर्बी पर सीधा असर डालता है। इसके अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटें, घुटनों को मोड़कर सीने से लगाएं, हाथों से पकड़कर 20–30 सेकंड तक गहरी सांस लें। पवनमुक्तासन का अभ्यास पाचन तंत्र को सक्रिय करता है। और अगर पाचन सही रहता है तो चर्बी का जमाव कम होता है।
भुजंगासन :
भुजंगासन से पीठ मजबूत होती है और पेट का तनाव कम होता है। यह पेट की चर्बी कम करने में बेहद प्रभावी आसन है। साथ ही कमर और स्पाइन के लिए शक्तिशाली भी है। अभ्यास के लिए पेट के बल लेटें, हथेलियों को कंधों के नीचे रखें और धीरे-धीरे छाती को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि अभ्यास के दौरान कमर पर झटका न दें, शरीर को सिर्फ उतना ही उठाएं जितना आराम से हो।
इस आसन से रीढ़ लचीली होती है और पूरा शरीर रिलैक्स होता है। नियमित अभ्यास से पेट को अंदर खींचने की क्षमता बढ़ती है। यह आसन स्ट्रेस कम करता है, जो कि पेट की चर्बी का बड़ा कारण है। मार्जरी आसन के नियमित अभ्यास के लिए दोनों हाथों और घुटनों के बल शरीर को गाय की आकृति में लाएं। सांस भरते हुए सिर उठाएं। फिर सांस छोड़ते हुए पीठ ऊपर उठाएं।
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