नई दिल्ली।भारतीय खानपान की सबसे खास बात यह है कि यहां हर क्षेत्र के अपने पारंपरिक व्यंजन हैं, जिनमें सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि संस्कृति और यादें भी जुड़ी होती हैं। ऐसा ही एक पारंपरिक व्यंजन है **‘महेरी’**, जिसका स्वाद आज भी बुंदेलखंड और बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को अपने गांव और बचपन की याद दिला देता है।
साधारण सामग्री से बनने वाली महेरी कभी ग्रामीण घरों की रोजमर्रा की थाली का हिस्सा हुआ करती थी। कम खर्च में पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन तैयार करने वाली यह डिश अब धीरे-धीरे लोगों की यादों और पारंपरिक रसोई तक सीमित होती जा रही है। हालांकि सोशल मीडिया और देसी खाने के प्रति बढ़ते लगाव के कारण महेरी जैसे पुराने व्यंजन फिर से चर्चा में आने लगे हैं।
क्या है महेरी?
महेरी एक पारंपरिक देसी व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से **मकई, बाजरा, ज्वार या अन्य अनाज** से तैयार किया जाता है।
अलग-अलग क्षेत्रों में इसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। बुंदेलखंड और बिहार में इसे खास अंदाज से बनाया जाता है, जहां इसका स्वाद मिट्टी की खुशबू और गांव की रसोई की याद दिलाता है।
यह व्यंजन खासतौर पर ठंड के मौसम में ज्यादा पसंद किया जाता है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री शरीर को ऊर्जा देने वाली मानी जाती है।
गांव की रसोई से जुड़ी कहानी
पुराने समय में गांवों में लोग स्थानीय अनाज और उपलब्ध सामग्री से भोजन तैयार करते थे।
महेरी भी उसी परंपरा का हिस्सा रही है। जब बाजार में तरह-तरह के पैकेट वाले खाद्य पदार्थ नहीं हुआ करते थे, तब घर की महिलाएं अनाज, दूध, दही और मसालों से स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन तैयार करती थीं।
महेरी की खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन इसका स्वाद बेहद खास होता है।
महेरी बनाने के लिए जरूरी सामग्री
महेरी बनाने के लिए सामान्य तौर पर इन चीजों की जरूरत होती है—
* मोटा अनाज (मकई/बाजरा/ज्वार का आटा)
* छाछ या दही
* पानी
* नमक
* हल्दी
* जीरा
* हरी मिर्च
* घी या तेल
* धनिया पत्ती
क्षेत्र के अनुसार इसमें कुछ अन्य मसाले भी जोड़े जा सकते हैं।
महेरी बनाने की आसान विधि
सबसे पहले मोटे अनाज के आटे को अच्छी तरह छान लिया जाता है।
इसके बाद आटे को पानी या छाछ के साथ मिलाकर घोल तैयार किया जाता है। ध्यान रखना जरूरी है कि घोल में गांठ न रहें।
अब एक बर्तन में घी या तेल गर्म करके उसमें जीरा और हरी मिर्च का तड़का लगाया जाता है।
इसके बाद तैयार घोल को इसमें डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है।
लगातार चलाते रहना जरूरी होता है ताकि मिश्रण नीचे न लगे और स्वाद अच्छा बना रहे।
जब महेरी अच्छी तरह गाढ़ी हो जाए तो इसमें नमक और अन्य मसाले मिलाए जाते हैं।
कुछ देर पकाने के बाद इसे गर्मागर्म परोसा जा सकता है।
स्वाद बढ़ाने के देसी तरीके
महेरी का असली स्वाद बढ़ाने के लिए कई लोग इसमें देसी घी का इस्तेमाल करते हैं।
ऊपर से घी डालने से इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं।
इसे कई जगह हरी चटनी, अचार, दही या सब्जी के साथ खाया जाता है।
गांवों में इसे मिट्टी के चूल्हे पर पकाने की परंपरा रही है, जिससे इसका स्वाद और भी खास माना जाता है।
क्यों खास है महेरी?
महेरी सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि पोषण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मोटे अनाजों में फाइबर, खनिज और ऊर्जा देने वाले तत्व पाए जाते हैं।
आज जब लोग हेल्दी डाइट की ओर लौट रहे हैं, तब पारंपरिक मोटे अनाजों से बने व्यंजनों की मांग फिर बढ़ रही है।
महेरी भी इसी देसी और पौष्टिक भोजन की श्रेणी में आती है।
बुंदेलखंड और बिहार की पहचान
बुंदेलखंड और बिहार दोनों ही अपनी समृद्ध खानपान परंपरा के लिए जाने जाते हैं।
जहां एक ओर बुंदेलखंड के व्यंजनों में सादगी और देसी स्वाद की झलक मिलती है, वहीं बिहार का भोजन भी स्थानीय अनाज और पारंपरिक तरीकों के लिए प्रसिद्ध है।
महेरी इन दोनों क्षेत्रों की ग्रामीण संस्कृति और खानपान की विरासत को दर्शाती है।
नई पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत
समय बदलने के साथ कई पारंपरिक व्यंजन लोगों की रसोई से दूर होते जा रहे हैं।
फास्ट फूड और आधुनिक खानपान की वजह से पुराने देसी व्यंजनों की जगह कम होती जा रही है।
ऐसे में महेरी जैसे व्यंजनों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है ताकि हमारी पारंपरिक खाने की विरासत बची रहे।
स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी विकल्प
आज लोग कम तेल, प्राकृतिक सामग्री और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
महेरी इसी सोच के अनुरूप एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
अगर इसे संतुलित मात्रा में बनाया जाए तो यह स्वाद के साथ-साथ पोषण भी दे सकती है।
मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच ऐसे पारंपरिक व्यंजनों का महत्व और बढ़ गया है।
घर पर जरूर करें ट्राई
अगर आप गांव के पुराने स्वाद को महसूस करना चाहते हैं तो महेरी को घर पर आसानी से बना सकते हैं।
इसमें ज्यादा मेहनत या महंगी सामग्री की जरूरत नहीं होती।
बस सही तरीके से पकाने और देसी मसालों का इस्तेमाल करने से इसका स्वाद शानदार बन जाता है।
एक बार खाने के बाद यह आपको पुराने दिनों और गांव की रसोई की याद जरूर दिला सकता है।