Cobra Pose Benefits: भुजंगासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है, भुजंग यानी सांप और आसन यानी मुद्रा। इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए सांप जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे कोबरा पोज कहा जाता है। इसे रीढ़ की लचीलापन बढ़ाने वाला प्रमुख आसन माना गया है। इस लेख में जानिए भुजंगासन के फायदे, अभ्यास का सही तरीका और सावधानियां।
भुजंगासन करने का सही तरीका:
भुजंगासन को सही तकनीक से करना बेहद जरूरी है। इस आसन के अभ्यास के लिए कुछ स्टेप्स को अपनाएं।
स्टेप 1- पेट के बल योग मैट पर लेट जाएं। अब पैरों को सीधा रखें और एड़ियों को पास रखें। हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें।
स्टेप 2- शरीर को ऊपर उठाते हुए गहरी सांस लें। धीरे-धीरे सिर, गर्दन और छाती को ऊपर उठाएं। नाभि तक का हिस्सा जमीन से ऊपर आए। कोहनियां हल्की मुड़ी रहें।
स्टेप 3- अंतिम स्थिति में सिर को हल्का पीछे की ओर झुकाएं। 15- 30 सेकंड तक सामान्य सांस लेते रहें।
स्टेप 4- अब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे शरीर को नीचे लाएं। 3-5 बार इसे दोहराएं।
भुजंगासन के फायदे:
1. रीढ़ की हड्डी मजबूत बनाता है:
यह आसन स्पाइन को लचीला और मजबूत बनाता है।
2. पेट की चर्बी कम करने में सहायक:
नियमित अभ्यास से पेट की अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद मिलती है।
3. फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है:
छाती फैलने से सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है।
4. तनाव और डिप्रेशन कम करता है:
यह आसन मानसिक शांति देता है और तनाव कम करता है।
5. पाचन तंत्र को सुधारता है:
पेट के अंगों की मालिश होती है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या कम होती है।
6. पीठ दर्द में राहत:
कमर और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
भुजंगासन करते समय सावधानियां:
गर्भावस्था में इस आसन को न करें।
गंभीर पीठ दर्द या स्लिप डिस्क वाले लोग डॉक्टर से सलाह लें।
हर्निया या पेट की सर्जरी के बाद इसे न करें।
अत्यधिक जोर न लगाएं।
भुजंगासन कब और कितनी देर करें?
सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा समय है।
धीरे-धीरे समय बढ़ाकर 1 मिनट तक कर सकते हैं।
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