भारत और मैं: कुरैशी की यादों का एक वृत्तांत

कुरैशी की यादों का एक वृत्तांत

Update: 2026-08-02 01:06 GMT
आम तौर पर लोगों की ज़िंदगी को भारी-भरकम और समय के क्रम में लिखी गई आत्मकथाओं में समेटा जाता है। डॉ. एस.वाई. कुरैशी अपनी किताब 'इंडिया एंड आई: अ हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर' में इस घिसे-पिटे तरीके को तोड़ते हैं।
बड़ी-बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के बजाय, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने सौ ऐसी घटनाओं का ज़िक्र किया है जो अपने आप में पूरी हैं और बेहद निजी हैं। हर याद को ठीक दो पन्नों में लिखा गया है।
जावेद अख्तर इन छोटी-छोटी कहानियों को "शॉर्ट फ़िल्में" कहते हैं। उनका कहना है कि ये भारत की ऐसी तस्वीर पेश करती हैं जिसे कोई एक कहानी बयां नहीं कर सकती। वहीं, शशि थरूर इस किताब को "बेहद ज़रूरी और अहम" बताते हैं, जो पाठकों को देश के संस्थापकों के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।
कुरैशी दिखाते हैं कि किसी देश की असली कहानी छोटी-छोटी और नज़रअंदाज़ की गई घटनाओं में छिपी होती है—जैसे पल भर में लिया गया कोई फ़ैसला, करियर बदलने वाली कोई मुलाक़ात, या सत्ता की असलियत बताने वाली कोई शांत बातचीत।
वे पाठकों को सरकारी दफ़्तरों के नीरस माहौल से कहीं आगे ले जाते हैं। ये किस्से पुरानी दिल्ली में गुज़रे उनके बचपन और इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) में शानदार करियर से लेकर युद्ध से जूझ रहे श्रीलंका और म्यांमार में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर उनके अनुभवों तक का सफ़र तय करते हैं। साफ़ और गहरी समझ वाली भाषा में, कुरैशी नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ अपनी मुलाक़ातों और एक साधारण माली के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र करते हैं। वे दिल्ली के सत्ता के गलियारों की राजनीतिक उठा-पटक और चुनाव सुधारों से जुड़े अहम बदलावों की अंदरूनी जानकारी के बीच बेहतरीन संतुलन बनाते हैं।
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