नई दिल्ली: देश के कई टोल प्लाजा पर अवैध तरीके से टोल वसूली का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ टोल संचालकों ने बिना FASTag वाली गाड़ियों से शुल्क लेने के लिए अनधिकृत ऐप का इस्तेमाल किया और इस रकम को आधिकारिक सिस्टम से बाहर रखा गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार करीब 100 टोल प्लाजा पर कथित तौर पर दो अनधिकृत ऐप के जरिए बिना FASTag वाहनों से टोल वसूली की गई। इन ऐप के माध्यम से फर्जी रसीदें बनाने और वास्तविक टोल कलेक्शन रिकॉर्ड से अलग रकम जमा करने का आरोप है।

ED ने इस मामले में कई राज्यों में छापेमारी की है। जांच के दौरान नकदी, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध वसूली किए जाने की आशंका है।
FASTag व्यवस्था का उद्देश्य टोल भुगतान को पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। वाहन की विंडशील्ड पर लगे FASTag के जरिए टोल राशि सीधे जुड़े खाते से कटती है और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रिकॉर्ड होती है। लेकिन कथित फर्जी ऐप के जरिए इस व्यवस्था को दरकिनार कर अलग से वसूली की गई।
कैसे किया जा रहा था फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि कुछ जगहों पर टोल कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों ने अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया। बिना FASTag वाले वाहनों से टोल राशि ली जाती थी, लेकिन उसे आधिकारिक NHAI सिस्टम में दर्ज करने के बजाय अलग डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड किया जाता था। आरोप है कि इस तरह की व्यवस्था से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा और टोल संचालन में पारदर्शिता प्रभावित हुई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग और कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल हैं।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
मामले की जांच में कई राज्यों में जुड़े ठिकानों की जानकारी सामने आई है। ED ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर समेत कई स्थानों पर कार्रवाई की है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल सबूतों और वित्तीय लेनदेन की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि अवैध वसूली से कितना आर्थिक नुकसान हुआ।
टोल व्यवस्था पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद टोल प्लाजा की निगरानी और डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टोल संचालन में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर और रिकॉर्ड सिस्टम की नियमित जांच जरूरी है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
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