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Yoga : कितने प्रकार के होते हैं प्राणायाम, फायदे जान लेंगे तो कभी नहीं पड़ेंगे बीमार

Sarita
17 Jun 2025 10:57 AM IST
Yoga : कितने प्रकार के होते हैं प्राणायाम, फायदे जान लेंगे तो कभी नहीं पड़ेंगे बीमार
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Yoga : योग शरीर और मन दोनों को प्राकृतिक रूप से लंबे समय तक स्वस्थ रखने का एक आसान तरीका है। इसमें मुद्राएं और आसन होते हैं जो कि शरीर को अंदर से बाहर तक प्रभावित करती हैं। योग का एक अहम हिस्सा प्राणायाम है। प्राणायाम श्वास नियंत्रण की विद्या है। प्राणााम पूरी तरह से सांस पर आधारित होता है जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी होता है। कई प्रकार के प्राणायाम होते हैं। योग दिवस के मौके पर प्राणायाम के प्रकार और हर एक के फायदों के बारे में जानिए।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम :
यह प्राणायाम नासिकाओं के माध्यम से श्वास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया है, जो मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करती है। अनुलोम विलोम प्राणायाम के अभ्यास से मानसिक तनाव और चिंता में राहत मिलती है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
कपालभाति प्राणायाम :
इसमें तेजी से श्वास को बाहर निकालते हैं और पेट की मांसपेशियों को संकुचित करते हैं। यह शुद्धि और ऊर्जा को बढ़ावा देने वाला प्राणायाम है। कपालभाति का अभ्यास शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है। इसके नियमित अभ्यास से मोटापा और चर्बी कम करने में मदद मिलती है।
भस्त्रिका प्राणायाम :
इसमें तेजी से और गहराई से श्वास लेना और छोड़ना शामिल है। यह फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है। शरीर को ऊर्जावान और स्फूर्ति देता है। साथ ही थकान और मानसिक सुस्ती दूर करता है।
भ्रामरी प्राणायाम:
इसमें श्वास छोड़ते समय भौंरे की गूंज जैसी ध्वनि निकालनी होती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है
इसमें गले से एक हल्की सी घुरघुराहट की आवाज निकालते हुए श्वास लेना और छोड़ना होता है। यह शांति और ध्यान में सहायक होता है।
शीतली प्राणायाम :
इसमें जीभ को मोड़कर श्वास लेना और नाक से श्वास छोड़ना होता है। यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और गर्मी के मौसम में लाभकारी होता है। यह श्वसन प्रणाली को शुद्ध करता है और मानसिक एकाग्रता व धैर्य को बढ़ाता है। प्यास और अधिक गर्मी से राहत देता है और गुस्से व हाई बीपी को शांत करता है।
शीतकारी प्राणायाम :
इसमें दाँतों के बीच से श्वास लेना और नाक से श्वास छोड़ना होता है। यह भी शीतली प्राणायाम की तरह ठंडक प्रदान करता है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम :
यह प्राणायाम नाड़ियों की शुद्धि के लिए किया जाता है और इसमें अनुलोम-विलोम जैसी तकनीक होती है, लेकिन यह ज्यादा ध्यान और शांति प्रदान करने वाला होता है।
सूर्य भेदी प्राणायाम :
इसमें केवल दाईं नासिका से श्वास लेना और बाईं नासिका से छोड़ना होता है। यह शरीर को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करता है।
चंद्र भेदी प्राणायाम:
इसमें केवल बाईं नासिका से श्वास लेना और दाईं नासिका से छोड़ना होता है। यह शरीर को ठंडक और शांति प्रदान करता है। शरीर की ऊर्जा का संतुलन बनाए रखता है। इम्यून सिस्टम मजबूत करता है और ध्यान और मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है।
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