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Gomukhasana Benefits: घुटनों और जोड़ों के दर्द का अचूक इलाज, जानें कैसे कमाल करता है गोमुखासन

Sarita
22 July 2025 12:18 PM IST
Gomukhasana Benefits: घुटनों और जोड़ों के दर्द का अचूक इलाज, जानें कैसे कमाल करता है गोमुखासन
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Gomukhasana Benefits: इस आसन को करते वक्त शरीर की स्थिति गाय के मुख जैसी लगती है, इसलिए इसका नाम गोमुखासन रखा गया है। यह आसन मुख्यतः पीठ, कंधे, छाती और जांघों की मांसपेशियों पर काम करता है और शरीर में लचीलापन बढ़ाता है। आइए जानते हैं इसके अभ्यास का सही तरीका और इससे मिलने वाले फायदे।
गोमुखासन अभ्यास का तरीका:
स्टेप 1- एक समतल जगह पर चटाई बिछाकर बैठ जाएं।
स्टेप 2- दाएं पैर को मोड़कर बाएं नितंब के पास रखें।
स्टेप 3- अब बाएं पैर को मोड़कर दाएं पैर के ऊपर रखें, दोनों घुटने एक के ऊपर एक होने चाहिएं।
स्टेप 4- दाहिने हाथ को ऊपर उठाकर पीछे की ओर मोड़ें और बाएं हाथ को नीचे से घुमाकर पीछे ले जाएं।
स्टेप 5- दोनों हाथों की उंगलियां आपस में मिलाएं और पीठ के पीछे जकड़ें।
स्टेप 6- छाती को तानते हुए पीठ सीधी रखें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
स्टेप 7- इस स्थिति में कम से कम 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहें, फिर पैर और हाथ बदलकर दोहराएं।
गोमुखासन के फायदे :
कंधों और छाती को खोले
यह आसन पीठ और कंधों की जकड़न दूर करता है और छाती को फैलाने में मदद करता है।
डायबिटीज और हॉर्मोन बैलेंस में सहायक :
यह पाचन और एंडोक्राइन सिस्टम को सुधारता है, जिससे डायबिटीज जैसे रोगों में राहत मिलती है। डायबिटीज के मरीजों को इस आसन का नियमित अभ्यास करना चाहिए। महिलाओं के लिए भी यह आसन असरदार है।
तनाव और एंग्जायटी कम करे :
गोमुखासन के नियमित अभ्यास से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है, जिससे मन शांत होता है और मानसिक तनाव कम होता है।
स्पाइन और हिप्स के लिए फायदेमंद:
इस आसन का अभ्यास रीढ़ और कूल्हों की लचीलापन बढ़ाता है जिससे पीठ दर्द में राहत मिलती है। घंटों डेस्क वर्क करने वालों के लिए यह आसन रामबाण उपाय है, पोस्चर में सुधार और पीठ व कमर दर्द से राहत के लिए।
गठिया और जोड़ों के दर्द में असरदार:
जो लोग जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, उनके लिए यह योगासन बहुत फायदेमंद है। गोमुखासन के अभ्यास से गठिया रोग से राहत मिलती है।
गोमुखासन के अभ्यास की सावधानियां:
अगर कंधों, घुटनों या रीढ़ की हड्डी में कोई गंभीर चोट है तो यह आसन डॉक्टर की सलाह से ही करें।
शुरुआत में योग शिक्षक की निगरानी में अभ्यास करना बेहतर होगा।
जो महिलाएं गर्भवती हैं, उन्हें इस आसन का अभ्यास न करने की सलाह दी जाती है।
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