UP News: फुटबॉलर को ईयरफोन लगाना पड़ा महंगा, शव को 500 मीटर तक घसीटा गया
UP News: चंदौली के अलीनगर थाना क्षेत्र के तारापुर में बंद रेलवे फाटक पार करते समय बाइक सवार दो युवकों की मौत हो गई। दोनों फुटबॉल खिलाड़ी थे और खेलने निकले थे। दोनों के कानों में ईयरफोन लगा था, जिससे वे ट्रेन की आवाज नहीं सुन सके। गेटमैन भी चिल्लाता रहा। बाइक ट्रेन में फंस गई और 500 मीटर तक घसीटती चली गई। घटना के कारण ट्रेन भी आधे घंटे तक रुकी रही।
जानकारी के अनुसार शहाबगंज थाना क्षेत्र के अरारी गांव निवासी सुदर्शन पासवान का पुत्र प्रमोद पासवान (22) दयालपुर स्थित अपने ननिहाल में रहकर सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही वह फुटबॉल का अच्छा खिलाड़ी भी था।
वहीं जीवनपुर गांव निवासी मुन्नी लाल का पुत्र आकाश यादव (22) भी फोर्स की तैयारी के साथ-साथ फुटबॉल खेलता था। दोनों दोस्त प्रतिदिन की तरह रविवार की सुबह छह बजे तारापुर स्थित खेल के मैदान में जाने के लिए बाइक से घर से निकले थे। सुबह करीब साढ़े छह बजे वे तारापुर स्थित रेलवे फाटक के पास पहुंचे। इस दौरान जब उन्होंने फाटक बंद पाया तो मोटरसाइकिल को साइड से लेकर रेलवे लाइन पार करने लगे। इसी बीच दूसरी तरफ से ट्रेन आ गई। दोनों के कान में ईयरफोन लगा होने के कारण वे ट्रेन की आवाज नहीं सुन सके। गेटमैन भी जोर-जोर से चिल्ला रहा था। लेकिन जब वे सुन नहीं सके तो ट्रेन की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों पीडीयू नगर की ओर जा रही मेमो ट्रेन के इंजन में फंस गए और करीब 500 मीटर तक घसीटते चले गए।
इससे ट्रेन वहीं रुक गई। सूचना मिलने पर पहुंचे रेलवे कर्मचारियों व अधिकारियों ने मोटरसाइकिल को इंजन से हटाकर ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया। करीब आधे घंटे तक ट्रेन रुकी रही। खेल के मैदान में खेल रहे अन्य खिलाड़ियों ने दोनों युवकों की पहचान कर पुलिस व परिजनों को सूचना दी। घटना की जानकारी जैसे ही परिजनों को हुई तो कोहराम मच गया। आसपास के लोगों की भारी भीड़ जुट गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। इस संबंध में अलीनगर थाना प्रभारी विनोद मिश्रा ने बताया कि आगे की कार्रवाई की जा रही है। परिवार को दोनों युवा खिलाड़ियों पर गर्व था। लेकिन ईयरफोन ने दोनों परिवारों के चिराग बुझा दिए। प्रमोद की मई माह में शादी होनी थी। एक माह बाद आकाश की बहन की भी शादी होनी थी। लेकिन यह खुशी गम में बदल गई।