लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विकास और निर्माण कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में विभिन्न अभियंत्रण विभागों के अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। लोक निर्माण विभाग यानी PWD के सिविल अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों की सीमा पांच गुना तक बढ़ाई गई है। वहीं विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों से जुड़े अभियंताओं के अधिकारों में दो गुना बढ़ोतरी की गई है।
सरकार का मानना है कि वित्तीय अधिकार बढ़ने से छोटे-बड़े निर्माण कार्यों की स्वीकृति के लिए फाइलों को बार-बार उच्च स्तर तक भेजने की जरूरत कम होगी। इससे टेंडर, अनुबंध और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों की सीमा करीब तीन दशक पहले वर्ष 1995 में तय की गई थी। इसके बाद निर्माण सामग्री, श्रम और परियोजनाओं की लागत में बड़ा बदलाव आया, लेकिन वित्तीय सीमा उसी स्तर पर बनी हुई थी। अब सरकार ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसे संशोधित किया है।
PWD के सिविल अभियंताओं की सीमा पांच गुना
कैबिनेट के फैसले के अनुसार लोक निर्माण विभाग में सिविल कार्यों से जुड़े अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों की सीमा पांच गुना की गई है। इसका लाभ विभाग में अलग-अलग स्तर पर कार्यरत अभियंताओं को उनकी निर्धारित श्रेणी के अनुसार मिलेगा।
इस बदलाव का उद्देश्य परियोजनाओं से संबंधित वित्तीय निर्णयों को विभागीय स्तर पर तेजी से पूरा करना है। पहले कम वित्तीय सीमा होने के कारण कई मामलों में स्वीकृति के लिए फाइल उच्च स्तर पर भेजनी पड़ती थी। इससे प्रक्रिया में समय लग सकता था।
नई व्यवस्था के बाद संबंधित अधिकारी निर्धारित बढ़ी हुई सीमा तक अपने स्तर पर वित्तीय स्वीकृति दे सकेंगे। इससे विभाग के अंदर निर्णय प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चीफ इंजीनियर को 10 करोड़ तक का अधिकार
PWD के सिविल कार्यों के मामले में अधिकारियों की वित्तीय सीमा में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले मुख्य अभियंता यानी चीफ इंजीनियर को दो करोड़ रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार था। इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक किया गया है।
इसी तरह अधीक्षण अभियंता की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये की गई है। अधिशासी अभियंता पहले 40 लाख रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति दे सकते थे, जिसे बढ़ाकर दो करोड़ रुपये किया गया है।
सहायक अभियंताओं के अधिकारों में भी बदलाव किया गया है। उन्हें निर्धारित सीमित दायरे में छोटे कार्यों और टेंडर से संबंधित स्वीकृतियों के लिए अधिक अधिकार दिए जाने की व्यवस्था की गई है।
विद्युत और यांत्रिक अभियंताओं के अधिकार भी बढ़े
योगी सरकार का फैसला केवल PWD के सिविल इंजीनियरों तक सीमित नहीं है। विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों से जुड़े अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों की सीमा दो गुना करने को भी मंजूरी मिली है।
इसके अलावा सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण और भूगर्भ जल विभाग के अभियंताओं की वित्तीय सीमा में भी दो गुना बढ़ोतरी की गई है।
हर विभाग में अलग-अलग श्रेणी के अभियंताओं के मौजूदा वित्तीय अधिकार अलग हैं। इसलिए नई सीमा भी उनकी संबंधित श्रेणी और पहले से निर्धारित अधिकारों के आधार पर लागू होगी।
1995 में तय हुई थी पुरानी सीमा
सरकार के मुताबिक अभियंत्रण विभागों में वित्तीय अधिकारों की सीमा लंबे समय से संशोधित नहीं हुई थी। पिछली बार वर्ष 1995 में उस समय की परिस्थितियों और निर्माण लागत के अनुसार ये अधिकार तय किए गए थे।
इसके बाद करीब तीन दशकों में निर्माण कार्यों की लागत काफी बढ़ चुकी है। सरकार के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि कॉस्ट इन्फ्लेशन के आधार पर 1995 की तुलना में निर्माण लागत कई गुना बढ़ी है।
ऐसे में पुरानी वित्तीय सीमा के कारण अधिकारियों को अपेक्षाकृत छोटे कार्यों के लिए भी उच्च स्तर से वित्तीय स्वीकृति लेनी पड़ सकती थी। सरकार ने इसी व्यवस्था को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए वित्तीय सीमा में बदलाव किया है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताई वजह
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि वर्तमान जरूरतों को देखते हुए अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में बढ़ोतरी आवश्यक थी।
सरकार के अनुसार केवल अधिकारियों की वित्तीय खर्च स्वीकृति सीमा में बदलाव किया गया है। इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा।
यानी सरकार ने किसी परियोजना के लिए अतिरिक्त बजट देने के बजाय पहले से उपलब्ध धनराशि के उपयोग और स्वीकृति की प्रशासनिक सीमा में बदलाव किया है।
विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
इस फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य निर्माण परियोजनाओं को समय पर पूरा करना है। PWD प्रदेश में सड़क, पुल और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक निर्माण कार्यों को संभालता है। बड़ी संख्या में परियोजनाओं में वित्तीय स्वीकृति एक महत्वपूर्ण चरण होती है।
अगर हर छोटे वित्तीय निर्णय के लिए फाइल उच्च अधिकारियों तक भेजी जाती है तो मंजूरी में अतिरिक्त समय लग सकता है। वित्तीय अधिकार बढ़ने के बाद विभागीय स्तर पर ज्यादा फैसले लिए जा सकेंगे।
इससे टेंडर प्रक्रिया, अनुबंध गठन और निर्माण कार्य शुरू करने में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी
वित्तीय अधिकार बढ़ने का मतलब केवल अधिक स्वायत्तता नहीं बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ना भी है। अब अधिक मूल्य के कार्यों की स्वीकृति विभागीय अभियंता अपने स्तर पर दे सकेंगे।
ऐसे में वित्तीय नियमों, टेंडर प्रक्रिया, गुणवत्ता और पारदर्शिता का पालन सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा। बढ़े हुए अधिकारों के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना सरकार के लिए अहम चुनौती होगी।
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था वित्तीय अनुशासन को बनाए रखते हुए प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेगी।
बार-बार उच्च स्तर से मंजूरी की जरूरत होगी कम
वित्तीय अधिकारों की सीमा कम होने पर किसी परियोजना की लागत निर्धारित सीमा से अधिक होते ही मामला अगले स्तर के अधिकारी के पास जाता था। इससे फाइलों की संख्या बढ़ती थी और निर्णय प्रक्रिया लंबी हो सकती थी।
अब पांच गुना तक सीमा बढ़ने के बाद सिविल कार्यों से संबंधित बड़ी संख्या में प्रस्ताव संबंधित स्तर पर ही स्वीकृत हो सकेंगे। इसका असर खासतौर पर सड़क निर्माण, मरम्मत, पुल और दूसरे सार्वजनिक निर्माण कार्यों पर दिखाई दे सकता है।
तीन दशक बाद बड़ा बदलाव
PWD के वित्तीय अधिकारों में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी मूल सीमाएं करीब 30 वर्ष पुरानी थीं। पिछले तीन दशकों में निर्माण सामग्री की कीमतों से लेकर परियोजनाओं के आकार तक में बड़ा बदलाव आया है।
नई वित्तीय सीमा को सरकार इसी बदलाव के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने की कोशिश बता रही है।
अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद संबंधित विभागों में नई वित्तीय सीमाओं को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे अभियंताओं को ज्यादा वित्तीय स्वायत्तता मिलेगी और सरकार को उम्मीद है कि प्रदेश में निर्माण तथा विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।