उत्तर प्रदेश : सीज किए गए एक ट्रक के थाने से चोरी होने और फिर बरामद होने का मामला चर्चा में आ गया है। आरोप है कि ओवरलोडिंग के मामले में आरटीओ की टीम द्वारा सीज किया गया ट्रक करीब 22 दिन पहले एकता थाने से गायब हो गया था।
पुलिस ने लखनऊ एक्सप्रेस-वे के टोल प्लाजा के फुटेज की मदद से ट्रक को ट्रेस किया और पीछा करते हुए उसे सिद्धार्थ नगर से बरामद कर लिया। इस मामले में ट्रक मालिक और उसके बेटे को भी पकड़ा गया, लेकिन बाद में उन्हें थाने से छोड़ दिया गया।
अब तक इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
थाने से गायब हुआ था सीज ट्रक
जानकारी के अनुसार, आरटीओ की टीम ने ओवरलोडिंग के मामले में कार्रवाई करते हुए ट्रक को सीज किया था।
कार्रवाई के बाद ट्रक को एकता थाने में खड़ा कराया गया था। नियमानुसार सीज किए गए वाहन को पुलिस अभिरक्षा में रखा जाता है, लेकिन कुछ समय बाद ट्रक थाने से गायब हो गया।
ट्रक के गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया।
टोल प्लाजा फुटेज से मिला सुराग
ट्रक की तलाश के दौरान पुलिस ने आसपास के रास्तों और टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
जांच के दौरान लखनऊ एक्सप्रेस-वे के टोल प्लाजा पर ट्रक दिखाई दिया।
फुटेज के आधार पर पुलिस ने ट्रक की लोकेशन का पता लगाया और उसका पीछा शुरू किया।
सिद्धार्थ नगर से बरामद हुआ ट्रक
पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए ट्रक को सिद्धार्थ नगर से बरामद कर लिया।
ट्रक मिलने के बाद पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई शुरू की।
बताया जा रहा है कि इस दौरान ट्रक मालिक और उसके बेटे को भी पुलिस ने पकड़ लिया था।
मालिक और बेटे को छोड़ने पर उठे सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब ट्रक थाने से गायब हुआ और बाद में बरामद किया गया तो आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने ट्रक मालिक और उसके बेटे को थाने लाकर पूछताछ की, लेकिन बाद में दोनों को छोड़ दिया गया।
इस मामले में अब तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
जुर्माना जमा कर ट्रक कराया रिलीज
बताया जा रहा है कि ट्रक मालिक ने आरटीओ कार्यालय में निर्धारित जुर्माना जमा कर दिया।
इसके बाद उसने वाहन को रिलीज भी करा लिया।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चोरी हुए सीज वाहन को बरामद करने के बाद पुलिस ने कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की और वाहन रिलीज कैसे हो गया।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
थाने से सीज वाहन का गायब होना पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सीज किए गए वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित थाने की होती है।
ऐसे में वाहन के गायब होने और फिर बरामद होने की पूरी प्रक्रिया जांच के दायरे में आ सकती है।
जांच की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई वाहन पुलिस अभिरक्षा से गायब होता है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मामले में यह भी जांच का विषय है कि ट्रक थाने से कैसे बाहर निकला और किन परिस्थितियों में उसे ले जाया गया।
इसके अलावा यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि इसमें किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं थी।
आगे की कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल इस मामले में पुलिस की ओर से कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
मुकदमा दर्ज नहीं होने के कारण पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।
अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कदम उठाया जाता है।