Gram पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल, डिजिटल योजना पर जोर

Update: 2026-07-16 12:18 GMT

Sravasti श्रावस्ती :   ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, पारदर्शी और विकास की दिशा में मजबूत बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी) भिनगा में विकासखंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पंचायत विकास योजनाओं को प्रभावी बनाने, डिजिटल तकनीक के उपयोग और जनभागीदारी बढ़ाने को लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ फैकल्टी डीपीआरसी बृजेश कुमार पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) गांवों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि पंचायतों की विकास योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं, जब उन्हें स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाए और इसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।

उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि प्रशिक्षण के दौरान दी गई जानकारी को केवल कागजों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे ग्राम स्तर तक पहुंचाकर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में उपयोग करें। उन्होंने कहा कि पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए पारदर्शिता, तकनीक का प्रयोग और जनसहभागिता बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान जिला कॉर्डिनेटर स्वच्छ भारत मिशन राज कुमार तिवारी ने पंचायतों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पंचायत स्तर पर बेहतर कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों के तहत वर्ष 2026 में पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर नए नियम बनाए गए हैं, जिन्हें पंचायतों की विकास योजनाओं में शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गांवों में साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देकर ही स्वस्थ और स्वच्छ ग्रामीण परिवेश तैयार किया जा सकता है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

प्रशिक्षक चंचल देवी ने ग्राम सभा की बैठकों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और इसमें सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा बैठकों का पहले से शेड्यूल तैयार किया जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें।

उन्होंने कहा कि ग्राम सभा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की भागीदारी विशेष रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे गांव की वास्तविक समस्याएं सामने आएंगी और विकास योजनाओं को जरूरत के अनुसार तैयार किया जा सकेगा।

प्रशिक्षण में लाइन विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया जा सकता है और पंचायतों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

कार्यक्रम में ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने की प्रक्रिया, डिजिटल माध्यमों के उपयोग, स्वच्छता अभियान, जनभागीदारी और योजनाओं के प्रभावी संचालन जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि पंचायतों को मजबूत बनाकर ही ग्रामीण क्षेत्रों का तेजी से विकास संभव है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें बेहतर कार्य करने के लिए सक्षम बनाना था। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी के आधार पर जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।

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