लखनऊ : राजधानी लखनऊ की चर्चित समिट बिल्डिंग में सामने आए फर्जी कॉलिंग सेंटर और बड़े साइबर फ्रॉड के मामले में पुलिस कमिश्नरेट ने मंगलवार को बड़ी विभागीय कार्रवाई की है। कोर्ट के आदेश के बाद मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल के लिए कुल नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है, जबकि छह अन्य को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में कार्रवाई की जद में आए पुलिसकर्मियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। अधिकारियों की ओर से उनके नाम गोपनीय रखे गए हैं। फिलहाल संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा।
मामला लखनऊ की समिट बिल्डिंग में चल रहे कथित फर्जी कॉलिंग सेंटर से जुड़ा है। पुलिस ने यहां छापेमारी कर साइबर फ्रॉड से संबंधित गतिविधियों का खुलासा किया था। बताया गया कि कॉल सेंटर के जरिए लोगों को अलग-अलग तरीकों से कथित तौर पर साइबर ठगी के जाल में फंसाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई संदिग्ध गतिविधियों और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लोगों को पकड़ा था।
मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आरोप लगाया गया कि छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचे कुछ पुलिसकर्मियों ने पकड़े गए आरोपियों में से कुछ लोगों के साथ कथित तौर पर सांठगांठ की। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने रिश्वत लेकर आरोपियों को छोड़ दिया। इस तरह के आरोप सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
बताया जा रहा है कि पूरे प्रकरण में अदालत के स्तर से भी जांच और निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर निर्देश दिए गए। इसके बाद पुलिस कमिश्नरेट ने मामले में शामिल बताए जा रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि जांच की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने और किसी भी तरह के साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को खत्म करने के लिए तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।
इसके अलावा छह अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। लाइन हाजिर किए गए पुलिसकर्मियों को फिलहाल उनके नियमित फील्ड कार्य से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। विभागीय जांच के दौरान उनकी भूमिका और मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पहले से दोषी ठहराना नहीं बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस मामले में आंतरिक विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉलिंग सेंटर के खिलाफ हुई कार्रवाई के दौरान कौन-कौन से पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, उनकी क्या भूमिका थी और गिरफ्तार किए गए या संदिग्ध आरोपियों के साथ उनका किस तरह का संपर्क रहा।
जांच के दौरान पुलिसकर्मियों के बयान, मौके से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को भी देखा जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद लखनऊ पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। साइबर अपराध जैसे गंभीर मामलों में पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि किसी पुलिसकर्मी पर आरोपी पक्ष से सांठगांठ या रिश्वत लेने जैसे आरोप लगते हैं तो यह विभाग की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। इसी वजह से पुलिस प्रशासन इस मामले की जांच को गंभीरता से आगे बढ़ा रहा है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही अंतिम कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि विभाग की छवि खराब करने वाले किसी भी कर्मचारी को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल इस मामले में नौ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो चुकी है। तीन निलंबित हैं और छह लाइन हाजिर किए गए हैं। वहीं, उनके नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। अब सभी की नजर विभागीय जांच की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि समिट बिल्डिंग साइबर फ्रॉड मामले में पुलिसकर्मियों की वास्तविक भूमिका क्या रही और रिश्वत लेकर आरोपियों को छोड़ने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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