नौकरी दिलाने के नाम पर 11 लाख की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देने का आरोपी गिरफ्तार
आजमगढ़। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 11 लाख रुपये की कथित ठगी और फर्जी नियुक्ति पत्र देने के मामले में तरवा थाना पुलिस ने सोमवार को एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान पहलवानपुर निवासी नागेंद्र के रूप में हुई है। मामले में पीड़ित की शिकायत के आधार पर पहले मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अब प्रकरण में नामजद अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
रासेपुर गांव निवासी संदीप जायसवाल ने एक जुलाई को पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पहलवानपुर निवासी नागेंद्र यादव और डब्लू यादव तथा गाजीपुर के बिरनो थाना क्षेत्र के भड़सर गांव निवासी दीपक गौड़ ने नौकरी लगवाने के नाम पर उससे संपर्क किया था।
पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को वन विभाग से जुड़ा हुआ बताया और कथित तौर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर असम राइफल्स में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। नौकरी मिलने की उम्मीद में उसने अलग-अलग समय पर आरोपियों को कुल 11 लाख रुपये दे दिए।
सरकारी विभाग से जुड़े होने का किया दावा
शिकायत में आरोप लगाया गया कि तीनों ने खुद को वन विभाग में कार्यरत बताकर पीड़ित का भरोसा जीता था। इसके बाद असम राइफल्स में नौकरी दिलाने का दावा किया गया।
सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद में संदीप उनके झांसे में आ गया। पीड़ित का आरोप है कि नौकरी दिलाने के बदले उससे मोटी रकम की मांग की गई। उसने आरोपियों की बातों पर विश्वास करते हुए कुल 11 लाख रुपये दे दिए।
रकम देने के बाद पीड़ित को नौकरी मिलने का इंतजार था। इसी दौरान उसे कथित नियुक्ति पत्र दिया गया। बाद में नियुक्ति पत्र की वास्तविकता को लेकर संदेह पैदा हुआ।
फर्जी नियुक्ति पत्र देने का आरोप
मामले में आरोप है कि रकम लेने के बाद पीड़ित को जो नियुक्ति पत्र दिया गया था, वह फर्जी निकला। इससे उसे अपने साथ धोखाधड़ी होने का संदेह हुआ।
इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क कर नौकरी के बारे में जानकारी मांगी और अपनी रकम वापस करने की मांग की। जब मामला नहीं सुलझा तो उसने पुलिस की शरण ली।
संदीप जायसवाल ने एक जुलाई को तरवा थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू की और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
सोमवार को पकड़ा गया आरोपी
जांच के दौरान पुलिस ने सोमवार को नागेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पहलवानपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद उससे मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पीड़ित से ली गई 11 लाख रुपये की रकम किस तरह और किन लोगों के बीच पहुंची। इसके साथ ही कथित फर्जी नियुक्ति पत्र कहां और किसने तैयार किया, यह भी जांच का अहम बिंदु है।
यदि नियुक्ति पत्र तैयार करने में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।
अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच
पीड़ित की शिकायत में नागेंद्र यादव के अलावा डब्लू यादव और दीपक गौड़ का भी नाम सामने आया है। पुलिस मामले में उनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है।
यह पता लगाया जा रहा है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने में किस आरोपी की क्या भूमिका थी। साथ ही पीड़ित से संपर्क किसने किया और फर्जी नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने में कौन शामिल था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस उपलब्ध दस्तावेजों, लेन-देन के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
11 लाख रुपये के लेन-देन की पड़ताल
मामले में कुल 11 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है। इतनी बड़ी रकम का भुगतान किस माध्यम से किया गया था, यह जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि पैसा बैंक खाते या डिजिटल माध्यम से दिया गया है तो लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। नकद भुगतान की स्थिति में पुलिस गवाहों और अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर जानकारी जुटा सकती है।
रकम किसके पास गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया, इसका पता लगाने का भी प्रयास किया जा सकता है।
फर्जी नियुक्ति पत्र की होगी जांच
पीड़ित को कथित रूप से दिए गए फर्जी नियुक्ति पत्र की भी जांच महत्वपूर्ण है। दस्तावेज पर इस्तेमाल किए गए नाम, हस्ताक्षर, मुहर और अन्य विवरणों के आधार पर उसके स्रोत का पता लगाया जा सकता है।
यह भी जांच का विषय है कि क्या इसी तरह के नियुक्ति पत्र किसी अन्य व्यक्ति को भी दिए गए हैं। यदि जांच में अन्य पीड़ित सामने आते हैं तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।
नौकरी के नाम पर ठगी से रहें सावधान
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को नौकरी दिलाने का दावा करने वाले लोगों से सावधान रहना जरूरी है। सरकारी विभागों में भर्ती आमतौर पर निर्धारित प्रक्रिया, परीक्षा और आधिकारिक चयन व्यवस्था के माध्यम से होती है।
किसी व्यक्ति की ओर से पैसे लेकर सरकारी नौकरी दिलाने का दावा किए जाने पर उसकी बातों पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। नियुक्ति से संबंधित जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत कार्यालय से सत्यापित की जानी चाहिए।
फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिए ठगी के मामलों में पीड़ित को आर्थिक नुकसान के साथ लंबे समय तक मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। अन्य नामजद लोगों की भूमिका की जांच जारी है। साथ ही कथित फर्जी नियुक्ति पत्र और 11 लाख रुपये के लेन-देन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की अंतिम सत्यता तय होगी। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।