अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली महत्वपूर्ण बैठक को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। बैठक फिलहाल दो सितंबर को प्रस्तावित बताई जा रही है, हालांकि जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए इसकी तारीख में बदलाव की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। चार सितंबर को जन्माष्टमी होने के कारण ट्रस्ट के कई सदस्य बैठक की तारीख को थोड़ा आगे या पीछे करने के पक्ष में हैं। ऐसे में ट्रस्टियों के बीच बैठक की नई तारीख को लेकर विचार-विमर्श जारी है। बैठक की अंतिम तारीख पर जल्द निर्णय होने की संभावना है।
यह बैठक इसलिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम पदों पर निर्णय लिया जाना है। सबसे प्रमुख फैसला राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति को लेकर होगा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से अपने प्रशासनिक ढांचे को और व्यवस्थित करने के लिए CEO पद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस पद के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया भी पूरी होने की बात सामने आई है। अब ट्रस्ट की बैठक में चयनित नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
ट्रस्ट की बैठक में केवल CEO ही नहीं, बल्कि प्रवक्ता पद को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला होना है। जानकारी के अनुसार इस पद के लिए सार्वजनिक रूप से आवेदन नहीं मांगे गए हैं। ट्रस्टियों के बीच विचार-विमर्श के बाद कुछ संभावित नाम बैठक के सामने रखे जाएंगे। इसके बाद सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर किसी एक व्यक्ति को प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी जा सकती है। संभावित नामों में विश्व हिंदू परिषद के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी या उससे जुड़े किसी अनुषांगिक संगठन के व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है।
बैठक में ट्रस्ट के सचिव पद को लेकर भी निर्णय होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार जगदीश आफले का नाम लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा राम मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले नरपत डुकिया के नाम पर भी मुहर लग सकती है। नरपत डुकिया ट्रस्ट के चार्टर्ड अकाउंटेंट की जिम्मेदारी से भी जुड़े रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्रस्ट की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस बैठक का महत्व और बढ़ गया है। हाल के दिनों में मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े विवाद के बाद ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में कई बदलाव हुए हैं। विवाद के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और दूसरे ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को इस्तीफा देना पड़ा। इसके अलावा मंदिर निर्माण और प्रबंधन से जुड़े प्रभारी गोपाल राव की भी जिम्मेदारी समाप्त कर दी गई।
इसके बाद तत्काल व्यवस्था संचालन के लिए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई। कृष्ण मोहन ट्रस्ट से जुड़े ट्रस्टी भी रहे हैं। ट्रस्ट की 22 जुलाई को हुई बैठक में पूर्णकालिक महासचिव के नाम पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी। इसके कारण अंतरिम व्यवस्था को आगे जारी रखना पड़ा।
अब दो सितंबर को प्रस्तावित अगली बैठक में पूर्णकालिक महासचिव के नाम पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि, संगठन के शीर्ष स्तर पर अभी तक इस पद के लिए अंतिम नाम तय नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि पूर्णकालिक महासचिव की नियुक्ति विश्व हिंदू परिषद से किए जाने को लेकर संगठन स्तर पर सहमति बनी है। इसी वजह से पूर्व महासचिव चंपत राय की संभावित वापसी को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं।
हालांकि, मौजूदा संकेतों के अनुसार अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को ही कुछ और समय के लिए जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। यदि पूर्णकालिक महासचिव के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो अंतरिम व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सकता है।
ट्रस्ट की आगामी बैठक में मतदान का अधिकार रखने वाले सभी ट्रस्टियों की भौतिक उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CEO, प्रवक्ता, सचिव और महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर निर्णय के लिए ट्रस्टियों की मौजूदगी और उनकी सहमति जरूरी होगी। इसी वजह से बैठक की तारीख तय करने में भी सभी सदस्यों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जा रहा है।
जन्माष्टमी के कारण प्रस्तावित तारीख में बदलाव की संभावना के बावजूद ट्रस्ट की यह बैठक राम मंदिर के प्रशासनिक भविष्य के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। CEO की नियुक्ति से मंदिर प्रबंधन को पेशेवर स्वरूप देने की कोशिश होगी, जबकि प्रवक्ता और अन्य प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां ट्रस्ट की नई कार्यप्रणाली को दिशा दे सकती हैं। अब सभी की नजर बैठक की अंतिम तारीख और उसमें होने वाले फैसलों पर टिकी है।
Tags: