उत्तर प्रदेश : बिजली विभाग के एक अधिशासी अभियंता यानी एक्सईएन का कथित पुराना वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद विभाग और पुलिस महकमे में हलचल मच गई। वायरल वीडियो में एक्सईएन एक महिला के साथ गोमतीनगर स्थित एक होटल में नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वीडियो में दिखाई दे रही महिला उसी कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थी। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और बिजली विभाग ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक, वायरल हो रहा वीडियो कई महीने पुराना बताया जा रहा है। इसमें बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता और महिला कंप्यूटर ऑपरेटर होटल के एक कमरे में दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में दोनों सामान्य कपड़ों के बजाय शॉर्ट्स में नजर आते हैं। इसी दौरान महिला के पति को दोनों की होटल में मौजूदगी की जानकारी हुई। इसके बाद महिला का पति होटल पहुंचा और वहां दोनों को देखकर पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम होटल पहुंची और दोनों पक्षों से पूछताछ की। इस दौरान होटल में काफी हंगामा होने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से पूरे घटनाक्रम के संबंध में जानकारी ली। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से किसी आपराधिक घटना की पुष्टि या किसी गिरफ्तारी की जानकारी सामने नहीं आई है।
वायरल वीडियो को लेकर बिजली विभाग के अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वीडियो में उनके साथ दिखाई दे रही महिला उनके कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत बताई जा रही है। ऐसे में विभागीय स्तर पर यह जानकारी जुटाई जा रही है कि महिला को लखनऊ किस काम के लिए बुलाया गया था और होटल में दोनों की मौजूदगी की वास्तविक वजह क्या थी।
मामले को लेकर संबंधित अधिशासी अभियंता ने अपनी सफाई भी दी है। उनका कहना है कि वायरल किया जा रहा वीडियो कई महीने पुराना है और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक उस समय लखनऊ में एक प्रेजेंटेशन होना था। प्रेजेंटेशन की तैयारी में मदद करने के लिए कुछ कंप्यूटर ऑपरेटर भी उनके साथ आए थे। उनका दावा है कि वीडियो के जरिए पूरे घटनाक्रम को तोड़-मरोड़कर अलग रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
अधिकारी की सफाई सामने आने के बाद अब विभागीय जांच का महत्व और बढ़ गया है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि उस समय अधिकारी और महिला कर्मचारी की होटल में मौजूदगी किस आधिकारिक या व्यक्तिगत परिस्थिति में हुई थी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या महिला को विभागीय कार्य के सिलसिले में लखनऊ बुलाया गया था और यदि ऐसा था तो उसके संबंध में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वायरल वीडियो के आधार पर सीधे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पहले वीडियो की वास्तविकता, उसकी तारीख और परिस्थितियों की जांच की जाएगी। इसके अलावा संबंधित अधिकारी और महिला कर्मचारी के बयान भी महत्वपूर्ण होंगे। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर आरोपों को तथ्य मान लेना उचित नहीं है। लाइव हिन्दुस्तान भी वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है।
मामले में महिला के पति की ओर से पुलिस को दी गई सूचना और होटल में हुई पूछताछ की परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि होटल में दोनों की मौजूदगी कब और किस उद्देश्य से हुई थी। वहीं, बिजली विभाग यह देख रहा है कि पूरे प्रकरण में विभागीय नियमों या सेवा आचरण से संबंधित किसी प्रावधान का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात विभागीय जांच की रिपोर्ट होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या था और उसमें लगाए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई है। संबंधित अधिशासी अभियंता ने वीडियो को पुराना बताते हुए अपना पक्ष रख दिया है, जबकि विभाग ने तथ्यों की पड़ताल शुरू कर दी है। ऐसे में अब जांच के निष्कर्ष का इंतजार है।