विंध्य के पर्यटन स्थलों पर महिलाएं चलाएंगी फूड कार्ट पर्यटकों को मिलेगा शुद्ध भोजन
मिर्जापुर। विंध्य क्षेत्र के ईको पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को अब स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की पहल के तहत प्रमुख पर्यटन स्थलों पर महिला समूहों के लिए फूड कार्ट तैयार किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर खानपान की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और नियमित आय से जोड़ना है।
प्रस्तावित योजना के तहत विंढम फॉल सिरसी फॉल लखनिया दरी और सिद्धनाथ दरी सहित विंध्य क्षेत्र के अन्य पर्यटन स्थलों पर फूड कार्ट स्थापित किए जाएंगे। इनका संचालन स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं करेंगी। पर्यटकों को स्थानीय व्यंजनों के साथ नाश्ता पेयजल चाय और अन्य खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकते हैं। खाद्य सामग्री की सूची और कीमतों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश योजना के क्रियान्वयन के दौरान तय किए जाने की संभावना है।
विंध्य क्षेत्र प्राकृतिक झरनों पहाड़ियों जंगलों और धार्मिक स्थलों के कारण पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। बरसात और सर्दियों के मौसम में इन स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बावजूद कई स्थानों पर व्यवस्थित खानपान सुविधा का अभाव रहता है। लोगों को खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री पर निर्भर रहना पड़ता है जिसकी गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर हमेशा भरोसा नहीं होता।
नई पहल के माध्यम से पर्यटन स्थलों पर व्यवस्थित फूड कार्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। इन्हें ऐसे स्थानों पर स्थापित किया जाएगा जहां पर्यटक आसानी से पहुंच सकें और प्राकृतिक क्षेत्र की सुंदरता या यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। फूड कार्ट की डिजाइन में स्वच्छता कचरा प्रबंधन और खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण का ध्यान रखना आवश्यक होगा।
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को फूड कार्ट का संचालन सौंपे जाने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। समूहों से जुड़ी महिलाएं पहले से अचार पापड़ मसाले नमकीन मिठाई और अन्य घरेलू उत्पाद तैयार करती हैं। पर्यटन स्थलों पर बिक्री का स्थायी मंच मिलने से उनके उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकेंगे और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित करता है। बैंक से ऋण कौशल प्रशिक्षण उत्पादन और विपणन में सहायता देकर महिलाओं को छोटे कारोबार से जोड़ा जाता है। फूड कार्ट योजना इसी दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है।
फूड कार्ट चलाने वाली महिलाओं को खाद्य सुरक्षा स्वच्छता ग्राहक व्यवहार हिसाब-किताब डिजिटल भुगतान और कचरा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत होगी। प्रशिक्षण के बाद वे न केवल गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध करा सकेंगी बल्कि अपने कारोबार का बेहतर प्रबंधन भी कर पाएंगी। डिजिटल भुगतान की सुविधा मिलने से पर्यटकों को भी आसानी होगी।
स्थानीय व्यंजनों को प्रमुखता देना इस योजना की खासियत हो सकती है। विंध्य क्षेत्र के पारंपरिक भोजन और ग्रामीण महिलाओं के हाथ से तैयार उत्पाद पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से परिचित कराएंगे। इससे महिला समूहों की आमदनी बढ़ने के साथ क्षेत्र के खानपान को भी पहचान मिल सकती है। पर्यटक पैकेटबंद स्थानीय उत्पाद अपने साथ भी ले जा सकेंगे।
योजना में खाद्य पदार्थों की शुद्धता और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय होगा। फूड कार्ट पर साफ पानी ढके हुए बर्तन हाथ धोने की सुविधा और कचरे के लिए अलग डिब्बे उपलब्ध होने चाहिए। गर्म और ठंडी खाद्य सामग्री को उचित तापमान पर रखने की व्यवस्था भी जरूरी है। महिलाओं को खाद्य पदार्थ तैयार करने और परोसने के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन करना होगा।
खाद्य सामग्री की कीमतें भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जानी चाहिए ताकि पर्यटकों से मनमाना पैसा वसूलने की शिकायत न आए। फूड कार्ट पर संचालक समूह का नाम संपर्क नंबर और मूल्य सूची लगाई जा सकती है। नियमित निरीक्षण के माध्यम से भोजन की गुणवत्ता और सफाई की निगरानी करना भी जरूरी होगा।
ईको पर्यटन स्थलों पर फूड कार्ट स्थापित करते समय पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखना होगा। प्लास्टिक की प्लेट गिलास और बोतलों के बजाय पर्यावरण अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। पत्तल मिट्टी या दोबारा उपयोग योग्य बर्तनों को प्राथमिकता देने से कचरा कम होगा। गीले और सूखे कचरे को अलग एकत्र करने की व्यवस्था भी आवश्यक है।
झरनों और जंगलों के आसपास खाद्य कचरा फेंकने से बंदर पक्षी और अन्य वन्यजीव आकर्षित हो सकते हैं। इससे पर्यटकों और जानवरों दोनों के लिए खतरा पैदा होता है। फूड कार्ट संचालकों को बचे भोजन का सुरक्षित निस्तारण करना होगा। पर्यटन स्थल बंद होने के बाद परिसर में किसी प्रकार का कचरा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
विंढम फॉल सिरसी फॉल लखनिया दरी और सिद्धनाथ दरी जैसे स्थानों पर छुट्टी के दिनों में पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में महिलाओं को बिक्री का अच्छा अवसर मिल सकता है। हालांकि कारोबार को केवल एक मौसम तक सीमित रखने के बजाय पूरे वर्ष चलाने के लिए अलग-अलग उत्पादों की योजना बनानी होगी।
गर्मियों में ठंडे पेय नींबू पानी छाछ और हल्के नाश्ते की मांग रह सकती है। बारिश और सर्दियों के दौरान चाय पकौड़ी स्थानीय व्यंजन तथा गर्म भोजन लोकप्रिय हो सकते हैं। इसी तरह धार्मिक और पारिवारिक पर्यटकों की जरूरत के अनुसार शाकाहारी विकल्प उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
फूड कार्ट योजना के सफल संचालन के लिए पर्यटन विभाग ग्रामीण आजीविका मिशन स्थानीय प्रशासन और पंचायतों के बीच समन्वय जरूरी होगा। कार्ट के लिए सुरक्षित स्थान बिजली पानी और कचरा उठाने की व्यवस्था संबंधित विभागों को सुनिश्चित करनी होगी। महिला समूहों के चयन में पारदर्शिता और आवश्यकता के आधार पर प्राथमिकता देना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
इस पहल से पर्यटन स्थलों पर अव्यवस्थित दुकानों की समस्या कम हो सकती है। यदि फूड कार्ट एक निर्धारित क्षेत्र में लगाए जाते हैं तो रास्तों पर अतिक्रमण नहीं होगा और पर्यटकों को भी एक ही जगह जरूरी खानपान की सुविधा मिल सकेगी। आपात स्थिति में संचालक महिलाएं पर्यटकों को स्थानीय सहायता और जरूरी संपर्कों की जानकारी भी दे सकती हैं।
महिलाओं के लिए यह केवल रोजगार की योजना नहीं बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने का अवसर भी है। घर तक सीमित रहने वाली महिलाएं समूह के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों में शामिल होंगी। नियमित आय मिलने से परिवार के खर्च बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जरूरतों में सहायता मिल सकती है।
फिलहाल प्रमुख ईको पर्यटन स्थलों पर फूड कार्ट निर्माण की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है। कार्ट की संख्या संचालन शुरू होने की तारीख समूहों के चयन और उपलब्ध कराए जाने वाले उत्पादों का विस्तृत विवरण आना बाकी है। योजना प्रभावी रूप से लागू हुई तो पर्यटकों को साफ और सुरक्षित भोजन मिलेगा जबकि ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध होगा।