भोपाल। गणेश चतुर्थी के साथ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल भक्ति और उल्लास के रंग में डूब गई है। घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की गई है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में तैयार की गईं अनोखी और कलात्मक गणपति प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पुराने शहर में विशाल व्हेल मछली पर विराजमान गणपति से लेकर प्रसिद्ध ‘भोपाल के राजा’ और एक पैर पर संतुलित ‘बैलेंसिंग बप्पा’ तक कई रचनात्मक स्वरूप देखने को मिल रहे हैं।

शहर के पंडालों में सोमवार सुबह से पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु परिवारों के साथ गणपति के दर्शन करने पहुंचे। शाम होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से सजे पंडालों में भीड़ बढ़ गई। कई स्थानों पर भजन, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बच्चों और युवाओं में अलग-अलग थीम पर बनाई गईं प्रतिमाओं के साथ तस्वीरें और वीडियो बनाने का खास उत्साह दिखाई दिया।

विशाल व्हेल पर विराजे भगवान गणेश



पुराने भोपाल के इतवारा ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में स्थापित एक अनोखी गणेश प्रतिमा सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां भगवान गणेश को एक विशाल नीली व्हेल मछली के आकार वाली संरचना पर विराजमान दिखाया गया है। आयोजकों के अनुसार व्हेल के आकार की यह संरचना करीब 42 फीट लंबी है।

नीले रंग की रोशनी और सुनहरे कलात्मक पैटर्न से सजाई गई संरचना रात के समय बेहद आकर्षक दिखाई देती है। इसके शीर्ष पर विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा भक्तों को दूर से ही नजर आती है। विशाल संरचना और गणपति के शांत स्वरूप का संयोजन इस पंडाल को शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर रहा है।

श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने के साथ इस अनोखी कलाकृति को देखने के लिए भी पहुंच रहे हैं। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों को मोबाइल फोन से तस्वीरें और वीडियो बनाते देखा गया। व्हेल पर विराजमान गणपति की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी साझा की जा रही हैं।

आयोजकों ने इस स्वरूप के माध्यम से धार्मिक आस्था और रचनात्मक कला को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। हालांकि, समुद्री जीव से जुड़ी थीम का कोई अलग धार्मिक दावा सामने नहीं रखा गया है। इसे उत्सव के लिए तैयार की गई कलात्मक प्रस्तुति के रूप में देखना अधिक उचित है।

भोपाल के राजा के दर्शन को उमड़े भक्त

शहर में ‘भोपाल के राजा’ के नाम से प्रसिद्ध गणपति प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। गणेश चतुर्थी से पहले इसका प्रथम स्वरूप सामने आने के बाद से ही भक्तों में दर्शन को लेकर उत्साह था। प्रतिमा की भावपूर्ण आंखें, पारंपरिक तिलक और बारीक सजावट इसकी विशेषता हैं।

मूर्ति कलाकारों ने प्रतिमा के आभूषण, वस्त्र और चेहरे के भावों पर बेहद बारीकी से काम किया है। ‘आ रहे हैं भोपाल के राजा’ संदेश के साथ इसकी पहली झलक सोशल मीडिया पर साझा की गई थी। इसके बाद प्रतिमा को देखने और आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी।

सार्वजनिक गणेशोत्सव में प्रतिमा के साथ पंडाल की सजावट का भी विशेष महत्व होता है। भोपाल के राजा के आयोजन स्थल को रोशनी, फूलों और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया है। सुबह और शाम होने वाली आरती में स्थानीय परिवारों के साथ बड़ी संख्या में युवा भी भाग ले रहे हैं।

बैलेंसिंग बप्पा की अनोखी बनावट

इस वर्ष भोपाल में ‘बैलेंसिंग बप्पा’ नाम से स्थापित प्रतिमा ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। आयोजकों ने इसे शहर की पहली बैलेंसिंग गणपति प्रतिमा बताया है। इसमें भगवान गणेश को एक पैर पर संतुलन बनाए हुए दिखाया गया है। प्रतिमा की छह भुजाएं हैं और बप्पा अपने सिर के ऊपर सुदर्शन चक्र धारण किए दिखाई देते हैं।

रविवार रात इस प्रतिमा का अनावरण किया गया। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की वर्षा और विशेष धुएं के प्रभाव के बीच बप्पा का स्वरूप श्रद्धालुओं के सामने आया। संतुलित मुद्रा वाली प्रतिमा की संरचना और कलात्मक कौशल को देखकर लोग प्रभावित हुए।

इस तरह की प्रतिमा तैयार करना मूर्तिकारों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उसे देखने में संतुलित दिखाने के साथ वास्तविक रूप से मजबूत और सुरक्षित रखना भी जरूरी है। भारी प्रतिमा की स्थापना के दौरान आधार, वजन और सुरक्षा के मानकों का विशेष ध्यान रखा जाता है। आयोजकों की ओर से ‘शहर की पहली’ प्रतिमा का दावा किया गया है, हालांकि इसका कोई स्वतंत्र आधिकारिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है। भोपाल की अनोखी गणपति प्रतिमाओं की रिपोर्ट

पंडालों में बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

गणेशोत्सव शुरू होने के साथ शहर के प्रमुख मार्गों और पंडालों के आसपास भीड़ बढ़ गई है। आयोजक समितियों ने दर्शन के लिए प्रवेश और निकास के अलग रास्ते तैयार किए हैं। भीड़ वाले स्थानों पर स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को कतार में आगे बढ़ाने और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं।

कई पंडालों में सीसीटीवी कैमरे और अग्निशमन उपकरण लगाने की व्यवस्था की गई है। बिजली की सजावट के बीच शॉर्ट सर्किट जैसी घटना से बचने के लिए तारों तथा उपकरणों की नियमित जांच जरूरी है। बड़ी प्रतिमाओं और संरचनाओं की मजबूती पर भी आयोजकों को विशेष ध्यान देना होगा।

भोपाल में गणेश उत्सव के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक संदेश देने वाली गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। कहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है तो कहीं जरूरतमंदों के लिए सहायता अभियान चलाने की तैयारी है। मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री से बनी पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को भी लोग पसंद कर रहे हैं।

दस दिनों तक रहेगा उत्सव का उल्लास

गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा, आरती, भजन और प्रसाद वितरण होगा। कई समितियों ने बच्चों के लिए सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।

शहर में व्हेल पर विराजमान गणपति, भोपाल के राजा और बैलेंसिंग बप्पा ने इस वर्ष के उत्सव को खास पहचान दी है। इन प्रतिमाओं में मूर्तिकारों की मेहनत, आयोजकों की कल्पनाशीलता और श्रद्धालुओं की आस्था का सुंदर मेल दिखाई देता है। अनोखे स्वरूपों ने भोपाल के गणेशोत्सव में नई रौनक भर दी है।