भोपाल। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर सजे ‘ब्रिक्स बाजार’ में मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला ने विदेशी मेहमानों का ध्यान आकर्षित किया। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की बेटी ज़हरा पेज़ेश्कियान ने बाग प्रिंट के स्टॉल पर पहुंचकर भारतीय हस्तशिल्प की इस पारंपरिक विधा को करीब से देखा। उन्होंने कपड़ों पर उकेरे गए डिजाइन और प्राकृतिक रंगों से की जाने वाली छपाई की सराहना करते हुए इसकी निर्माण प्रक्रिया को विस्तार से समझा।

बाग प्रिंट का स्टॉल मध्य प्रदेश के धार जिले से आए प्रसिद्ध शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री और मोहम्मद काज़िम खत्री ने लगाया था। दोनों शिल्पकार ब्रिक्स बाजार में बाग प्रिंट बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन कर रहे थे। स्टॉल पर हाथ से तैयार किए गए कपड़े और बारीक नक्काशी वाले लकड़ी के ब्लॉक रखे गए थे। इनकी सहायता से कपड़े पर अलग-अलग आकृतियों और डिजाइन की छपाई की जाती है।

ज़हरा पेज़ेश्कियान ने स्टॉल पर काफी समय बिताया और बाग प्रिंट से तैयार कपड़ों को बारीकी से देखा। उन्होंने शिल्पकारों से प्राकृतिक रंगों को बनाने और कपड़े पर उनका इस्तेमाल करने की विधि के बारे में जानकारी ली। विशेष रूप से उन्होंने यह जानना चाहा कि बाग प्रिंट में दिखाई देने वाला गहरा काला रंग प्राकृतिक तरीके से कैसे तैयार किया जाता है।

शिल्पकारों ने उन्हें बताया कि इस कला में रंग तैयार करने के लिए पारंपरिक प्रक्रियाओं और प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। बाग प्रिंट की पहचान उसके लाल और काले रंग के खूबसूरत संयोजन से होती है। कपड़े को रंगने और छपाई से पहले कई चरणों से गुजारा जाता है। प्रत्येक चरण में कारीगर की कुशलता और धैर्य की जरूरत होती है। यही कारण है कि हाथ से तैयार होने वाला प्रत्येक बाग प्रिंट कपड़ा अपने आप में विशेष माना जाता है।

जानकारी प्राप्त करने के बाद ज़हरा ने स्वयं बाग प्रिंट बनाने की इच्छा जताई। उन्होंने लकड़ी के पारंपरिक ठप्पे को रंग में डुबोकर कपड़े पर दबाया और इस ऐतिहासिक कला का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। उन्होंने ब्रिक्स इंडिया 2026 के प्रतीक वाले विशेष लकड़ी के ब्लॉक से भी कपड़े पर छपाई की। इस दौरान शिल्पकारों ने उन्हें ठप्पा लगाने का सही तरीका समझाया। ज़हरा की कला के प्रति उत्सुकता और भारतीय हस्तशिल्प में दिलचस्पी ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मास्टर शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री ने ज़हरा पेज़ेश्कियान को पारंपरिक बाग प्रिंट का अंगवस्त्र भेंट किया। उन्होंने ज़हरा की ओर से इस भारतीय कला को समझने और स्वयं आजमाने में दिखाई गई रुचि पर प्रसन्नता व्यक्त की। ज़हरा ने भी शिल्पकारों के काम और प्राकृतिक रंगों पर आधारित इस पर्यावरण अनुकूल कला की प्रशंसा की। 

धार जिले के बाग क्षेत्र से निकली यह हस्तकला सदियों पुरानी मानी जाती है। इसमें लकड़ी के नक्काशीदार ब्लॉक की सहायता से सूती और रेशमी कपड़ों पर हाथ से छपाई की जाती है। इसकी पूरी प्रक्रिया में स्थानीय जलवायु प्राकृतिक रंग और कारीगरों का अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पारंपरिक तरीके से कपड़े को तैयार करने से लेकर रंगाई और छपाई तक का काम हाथों से किया जाता है। मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद बाग के कारीगरों ने इसकी मूल शैली और पारंपरिक पहचान को बनाए रखा है।

ब्रिक्स बाजार में बाग प्रिंट का प्रदर्शन मध्य प्रदेश के कारीगरों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस आयोजन में ब्राजील रूस चीन दक्षिण अफ्रीका ईरान इंडोनेशिया मलेशिया बेलारूस इथियोपिया और दूसरे देशों से आए प्रतिनिधियों को भारत की विविध शिल्प परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिला। विदेशी मेहमानों ने शिल्पकारों से बातचीत करने के साथ कई पारंपरिक कलाओं का प्रत्यक्ष अनुभव भी लिया।

भारत ने वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है और 18वां शिखर सम्मेलन 12 तथा 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया। इसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान आर्थिक सहयोग वैश्विक शासन व्यापार और विकास से संबंधित विषयों पर चर्चा के साथ भारतीय कला और संस्कृति को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया। 

ब्रिक्स बाजार जैसे आयोजन कूटनीतिक बैठकों को सांस्कृतिक संवाद से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। यहां विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को भारत की स्थानीय कलाओं शिल्प परंपराओं और कारीगरों से सीधे जुड़ने का मौका मिला। ज़हरा पेज़ेश्कियान की बाग प्रिंट में रुचि ने मध्य प्रदेश की इस पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ स्थानीय कारीगरों की मेहनत और कौशल को भी वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया है।

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