दोस्ती से इनकार पड़ा भारी चार लड़कियों ने छात्रा को पीटा वीडियो से ब्लैकमेल का आरोप
वीडियो ब्लैकमेल करने का भी आरोप
भोपाल : मध्य प्रदेश में एक छात्रा के साथ मारपीट और ब्लैकमेल किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक लड़के से दोस्ती करने से इनकार करने पर चार लड़कियों ने छात्रा की पिटाई की। इतना ही नहीं, मारपीट का वीडियो भी बनाया गया और बाद में उसी वीडियो के जरिए छात्रा को कथित तौर पर ब्लैकमेल किया गया। मामला सामने आने के बाद पीड़िता और उसके परिजनों ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक छात्रा पर एक लड़के से दोस्ती करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। छात्रा इसके लिए तैयार नहीं थी। आरोप है कि इसी बात को लेकर चार लड़कियां उससे नाराज हो गईं और उसे परेशान करना शुरू कर दिया।
छात्रा को घेरकर पीटने का आरोप
आरोप है कि चारों लड़कियों ने छात्रा को एक जगह बुलाया या घेर लिया और उसके साथ मारपीट की। इस दौरान छात्रा के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की बात भी सामने आई है। पीड़िता कथित तौर पर उनसे खुद को छोड़ने की गुहार लगाती रही, लेकिन मारपीट जारी रही। घटना के दौरान आरोपियों में शामिल किसी लड़की ने मोबाइल फोन से वीडियो भी रिकॉर्ड किया। हालांकि घटनाक्रम की पूरी परिस्थितियां और सभी आरोप जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि मारपीट का वीडियो बनाने के बाद उसे वायरल करने की धमकी दी गई। इसी वीडियो के जरिए उस पर दबाव बनाने और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया गया है। धमकी और मानसिक दबाव के कारण छात्रा शुरुआत में घटना के बारे में खुलकर नहीं बता पाई। बाद में मामले की जानकारी परिजनों तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने छात्रा से पूरी घटना के बारे में जानकारी ली और शिकायत करने का फैसला किया।
वायरल वीडियो की भी होगी जांच
मामले में कथित वीडियो महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हो सकता है। वीडियो कब और कहां रिकॉर्ड किया गया, उसमें कौन-कौन दिखाई दे रहा है और बाद में इसे किन लोगों के साथ साझा किया गया, जैसे पहलुओं की जांच जरूरी होगी। अगर वीडियो सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया है तो उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड भी मामले की जांच में मदद कर सकते हैं। नाबालिगों से जुड़ा मामला होने की स्थिति में उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।
जांच के बाद साफ होगी पूरी घटना
पीड़िता के बयान के साथ अन्य छात्राओं और संभावित प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई जा सकती है। घटना से जुड़े मोबाइल फोन और डिजिटल सामग्री भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच के आधार पर ही आरोपों की वास्तविकता और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी। यह घटना स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के बीच बुलिंग, दबाव और साइबर ब्लैकमेल जैसे मामलों को लेकर भी चिंता बढ़ाती है। किसी छात्र को धमकी या ब्लैकमेल का सामना करना पड़े तो परिजनों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को जल्द जानकारी देना महत्वपूर्ण है।