मेरठ : इंसान और पालतू जानवर के बीच का रिश्ता कई बार परिवार के सदस्य जैसा गहरा हो जाता है। घर में वर्षों तक साथ रहने वाला पालतू कुत्ता जब दुनिया छोड़ता है तो परिवार के लिए उसका जाना किसी अपने को खोने जैसा होता है। ऐसा ही एक भावुक मामला सामने आया है, जहां परिवार ने अपने प्यारे डॉगी की मौत के बाद विधि-विधान से तेरहवीं का आयोजन किया। हवन-पूजन कराया गया, लोगों के लिए भोज रखा गया और डॉगी को पसंद आने वाले लड्डू भी खास तौर पर बनवाए गए।
परिवार का कहना है कि डॉगी उनके लिए महज एक पालतू जानवर नहीं था। वह घर का सदस्य था और लंबे समय से परिवार के सुख-दुख का हिस्सा बना हुआ था। यही कारण है कि उसकी मौत के बाद परिवार ने उसे उसी सम्मान और प्यार के साथ विदाई देने का फैसला किया जैसा वे अपने किसी करीबी सदस्य के लिए करते।
घर के सदस्य की तरह था डॉगी
पालतू कुत्ते को रखने वाले लोग अक्सर बताते हैं कि कुछ समय बाद वह परिवार की दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। सुबह उठने से लेकर घर लौटने तक उसकी मौजूदगी महसूस होती है। वह घर के लोगों की आवाज पहचानता है, उनके आने का इंतजार करता है और कई बार परिवार के किसी सदस्य के उदास होने पर उसके पास बैठ जाता है।
इस परिवार के लिए भी उनका डॉगी ऐसा ही था। उसकी अपनी पसंद और आदतें थीं। परिवार के लोग उसकी जरूरतों का ध्यान रखते थे और वह भी हर समय उनके आसपास रहता था। धीरे-धीरे रिश्ता इतना गहरा हो गया कि उसे घर में पालतू जानवर के बजाय सदस्य की तरह देखा जाने लगा।
उसकी मौत ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया। घर में उसकी अनुपस्थिति लगातार महसूस होने लगी। परिवार ने तय किया कि उसकी याद में तेरहवीं का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
तेरहवीं पर कराया हवन-पूजन
डॉगी की मौत के बाद परिवार ने धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार हवन और पूजन कराया। परिवार के सदस्यों ने एक साथ बैठकर उसे याद किया और उसकी स्मृतियों को साझा किया।
तेरहवीं के कार्यक्रम में पूजा-पाठ के साथ हवन किया गया। परिवार के लोगों ने डॉगी की याद में प्रार्थना की। इस दौरान माहौल काफी भावुक रहा।
आमतौर पर तेरहवीं की रस्म किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवारों में देखने को मिलती है। लेकिन यहां पालतू कुत्ते के प्रति परिवार के गहरे लगाव ने इस आयोजन को चर्चा का विषय बना दिया।
परिवार के लिए इसका उद्देश्य किसी परंपरा की तुलना करना नहीं बल्कि अपने प्यारे साथी को अपने तरीके से सम्मान और अंतिम विदाई देना था।
लोगों के लिए रखा गया भोज
हवन-पूजन के बाद परिवार ने भोज का भी आयोजन किया। परिचित और करीबी लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने परिवार के साथ डॉगी को याद किया।
पालतू जानवर की तेरहवीं पर इस तरह भोज आयोजित किए जाने की बात सामने आने के बाद यह घटना लोगों का ध्यान खींच रही है। परिवार ने जिस तरह अपने डॉगी के प्रति प्यार जाहिर किया वह बताता है कि पालतू जानवर इंसान के जीवन में कितनी महत्वपूर्ण जगह बना सकते हैं।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भी परिवार की भावनाओं को समझा और डॉगी से जुड़ी यादों को साझा किया।
पसंद के लड्डू भी बनवाए
इस पूरे आयोजन में सबसे भावुक करने वाली बात डॉगी की पसंद को याद रखना रहा। परिवार ने तेरहवीं के लिए ऐसे लड्डू भी बनवाए जो उसे पसंद थे।
परिवार के सदस्यों के लिए ये लड्डू सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि उससे जुड़ी एक याद थे। जब कोई पालतू जानवर लंबे समय तक परिवार के साथ रहता है तो उसकी पसंद-नापसंद भी घर के लोगों को अच्छी तरह पता होती है।
वह किस चीज को देखकर खुश होता था, किस समय खाना मांगता था और घर में किस जगह बैठना पसंद करता था—ऐसी छोटी-छोटी बातें बाद में उसकी याद बन जाती हैं।
इसी भाव से परिवार ने उसकी पसंद के लड्डू बनवाकर उसे याद किया।
डॉगी के जाने से घर में पसरा सन्नाटा
किसी पालतू जानवर के जाने के बाद उसकी कमी केवल उस जगह पर महसूस नहीं होती जहां वह रहता था। उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों से जुड़ी चीजें भी परिवार को उसकी याद दिलाती रहती हैं।
खाने का बर्तन, सोने की जगह, खिलौने और दरवाजे पर इंतजार करने की उसकी आदत जैसी चीजें अचानक खत्म हो जाती हैं। कई वर्षों तक किसी जानवर के साथ रहने वाले लोगों के लिए इस बदलाव को स्वीकार करना आसान नहीं होता।
परिवार भी डॉगी की मौत के बाद ऐसी ही भावनात्मक स्थिति से गुजरा। उन्होंने उसकी यादों को सहेजते हुए तेरहवीं का कार्यक्रम आयोजित किया।
इंसान और पालतू जानवर का खास रिश्ता
कुत्तों को इंसानों के सबसे करीबी पालतू जानवरों में गिना जाता है। घर में रहने वाला कुत्ता अपने मालिक और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ मजबूत जुड़ाव विकसित कर सकता है।
पालतू जानवरों के साथ रहने वाले लोगों के लिए वे केवल सुरक्षा या मनोरंजन का साधन नहीं रहते। वे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। परिवार के लोग उनसे बात करते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उनकी सेहत का ध्यान रखते हैं।
इसी कारण पालतू जानवर की मौत पर होने वाला दुख भी वास्तविक और गहरा हो सकता है। मनोविज्ञान में पालतू जानवर को खोने से होने वाले शोक को गंभीर भावनात्मक अनुभव माना जाता है।
हर व्यक्ति इससे अलग तरीके से निपटता है। कोई तस्वीरें और वीडियो संभालकर रखता है तो कोई अपने पालतू की याद में पौधा लगाता है या जरूरतमंद जानवरों की मदद करता है। इस परिवार ने हवन-पूजन और भोज के जरिए अपने डॉगी को याद करने का रास्ता चुना।
सोशल मीडिया पर ऐसी घटनाएं क्यों बनती हैं चर्चा का विषय?
पालतू जानवरों से जुड़े भावनात्मक मामले अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ जाते हैं। कुछ लोग ऐसे आयोजनों को अनोखा मानते हैं तो कई पालतू पशु प्रेमी परिवार की भावनाओं से खुद को जोड़कर देखते हैं।
इस तरह के मामलों में अलग-अलग राय सामने आना स्वाभाविक है। लेकिन किसी परिवार के शोक और निजी भावनाओं का सम्मान करना भी जरूरी है।
किसी पालतू जानवर के साथ रिश्ता कितना गहरा था इसका अंदाजा बाहर का व्यक्ति हमेशा नहीं लगा सकता। परिवार के लिए वर्षों से साथ रहने वाला जानवर उनके जीवन की अनेक यादों का हिस्सा हो सकता है।
परिवार ने अपने तरीके से दी विदाई
डॉगी की तेरहवीं पर हवन-पूजन, भोज और उसकी पसंद के लड्डू बनवाने का यह मामला इंसान और जानवर के बीच भावनात्मक रिश्ते की एक अलग तस्वीर पेश करता है।
परिवार ने अपने पालतू साथी को केवल एक जानवर की तरह नहीं देखा बल्कि उसे घर के सदस्य की तरह प्यार दिया। उसकी मौत के बाद भी उन्होंने उससे जुड़ी पसंद और यादों को नहीं भुलाया।
हवन के जरिए प्रार्थना की गई और भोज के माध्यम से करीबी लोगों को शामिल किया गया। उसकी पसंद के लड्डू बनवाकर परिवार ने उन छोटी-छोटी यादों को भी जीवित रखा जो वर्षों के साथ से बनी थीं।
यह घटना बताती है कि किसी पालतू जानवर के साथ रिश्ता कई लोगों के लिए कितना गहरा हो सकता है। दुनिया के लिए वह एक डॉगी हो सकता है लेकिन जिस परिवार के साथ उसने जिंदगी बिताई उसके लिए वह परिवार का सदस्य और अनगिनत यादों का हिस्सा था।