महराजगंज। नेपाल में बाढ़ से आई त्रासदी का असर अब भारत-नेपाल सीमा पर होने वाली पर्यटकीय गतिविधियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के सोनौली सीमा मार्ग से नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बाढ़ और उससे हुए नुकसान की खबरों के कारण भारतीय पर्यटक फिलहाल नेपाल के अंदरूनी तथा पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने से बच रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव सीमा क्षेत्र के पर्यटन कारोबार, होटल, ट्रैवल एजेंसी, टैक्सी और अन्य छोटे व्यवसायों पर पड़ रहा है।

स्थानीय पर्यटन कारोबारियों के अनुसार, सामान्य दिनों में सोनौली सीमा से प्रतिदिन 60 से अधिक छोटे-बड़े पर्यटक वाहन नेपाल में प्रवेश करते थे। इनमें निजी कार, टैक्सी, टेंपो ट्रैवलर और अन्य यात्री वाहन शामिल रहते थे। नेपाल जाने वाली पर्यटक बसों को भी जोड़ दिया जाए तो वाहनों की संख्या प्रतिदिन 85 से 90 के बीच पहुंच जाती थी। यात्रियों की लगातार आवाजाही के कारण सोनौली और आसपास के इलाकों में दिनभर चहल-पहल बनी रहती थी।

बाढ़ की त्रासदी के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। अब प्रतिदिन केवल 10 से 12 पर्यटक वाहन ही सोनौली के रास्ते नेपाल जा रहे हैं। बसों को मिलाकर भी यह आंकड़ा करीब 20 वाहनों तक सीमित रह गया है। इस तरह सीमा से नेपाल जाने वाले पर्यटक वाहनों की संख्या में लगभग तीन-चौथाई तक कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों की कोई विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और ये मुख्य रूप से सीमा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों के आकलन पर आधारित हैं।

नेपाल जाने वाले अधिकतर भारतीय पर्यटक भी अब सीमित दूरी की यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं। यात्रियों का सफर प्रमुख रूप से लुंबिनी, भैरहवा और बुटवल तक सिमट गया है। नेपाल के दूरस्थ, पहाड़ी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की ओर जाने वाले पर्यटकों की संख्या बेहद कम हो गई है। सड़क मार्ग की स्थिति, मौसम की अनिश्चितता और यात्रा के दौरान संभावित परेशानियों को देखते हुए लोग फिलहाल लंबी दूरी की बुकिंग कराने से बच रहे हैं।

सोनौली को भारत और नेपाल के बीच आवागमन के प्रमुख स्थलीय प्रवेश द्वारों में गिना जाता है। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी जाने वाले भारतीय और विदेशी पर्यटकों के लिए भी यह सीमा बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पोखरा, काठमांडू, मनोकामना और मुक्तिनाथ जैसे प्रसिद्ध धार्मिक तथा पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले बड़ी संख्या में लोग सोनौली के रास्ते ही नेपाल जाते हैं। पर्यटन सीजन में सीमा पर पर्यटक बसों और निजी वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात है।

वाहनों की संख्या कम होने से स्थानीय पर्यटन कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। टैक्सी संचालकों, बस मालिकों, ट्रैवल एजेंटों और होटल व्यवसायियों का कहना है कि बुकिंग में तेजी से गिरावट आई है। जिन वाहनों को पहले नियमित रूप से नेपाल के अलग-अलग पर्यटन स्थलों के लिए बुकिंग मिलती थी, वे अब कई-कई दिन तक खड़े रह रहे हैं। अग्रिम बुकिंग कराने वाले कुछ यात्री भी फोन करके रास्तों और मौसम की स्थिति की जानकारी मांग रहे हैं।

सीमा क्षेत्र में पर्यटन पर निर्भर छोटे कारोबार भी प्रभावित हुए हैं। सोनौली में होटल, भोजनालय, चाय-नाश्ते की दुकान, मुद्रा विनिमय केंद्र, वाहन मरम्मत की दुकान और ट्रैवल एजेंसियां काफी हद तक पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर हैं। वाहनों और यात्रियों की संख्या घटने से इन प्रतिष्ठानों की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय कामगारों और वाहन चालकों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।

ट्रैवल एजेंसियों से जुड़े लोगों का कहना है कि पर्यटक किसी भी यात्रा से पहले सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। बाढ़, भूस्खलन और रास्ते बंद होने की खबरें सामने आने के बाद परिवार के साथ यात्रा की योजना बना रहे लोग अधिक सतर्क हो जाते हैं। कई लोग नेपाल की यात्रा को कुछ सप्ताह के लिए टाल रहे हैं, जबकि कुछ पर्यटक केवल सीमा से नजदीक स्थित धार्मिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण करके वापस लौट रहे हैं।

पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद है कि मौसम सामान्य होने और नेपाल के प्रमुख राजमार्गों पर आवागमन पूरी तरह सुचारु होने के बाद पर्यटकों की संख्या दोबारा बढ़ सकती है। इसके लिए नेपाल के विभिन्न मार्गों की सही स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटक स्थलों तक उपलब्ध परिवहन सेवाओं की प्रमाणित जानकारी यात्रियों तक पहुंचाना जरूरी माना जा रहा है। स्पष्ट यात्रा परामर्श जारी होने से पर्यटकों के बीच बनी अनिश्चितता दूर की जा सकती है।

सीमा से नेपाल जाने वाले यात्रियों को भी सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम, सड़क मार्ग और अपने गंतव्य की मौजूदा स्थिति की जानकारी अवश्य लें। लंबी दूरी के पहाड़ी सफर के लिए स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित परिवहन एजेंसी से संपर्क करना उपयोगी हो सकता है। यात्रियों को आपातकालीन नंबर, जरूरी दवाइयां और पहचान संबंधी दस्तावेज साथ रखने चाहिए।

फिलहाल बाढ़ की त्रासदी का भय सोनौली सीमा के पर्यटन कारोबार पर भारी पड़ रहा है। लुंबिनी, बुटवल और भैरहवा तक सीमित हुए यात्रियों के कारण नेपाल के दूरस्थ पर्यटन स्थलों के लिए होने वाली बुकिंग लगभग ठहर गई है। अब कारोबारियों की नजर मौसम में सुधार और नेपाल के प्रभावित मार्गों पर सामान्य आवागमन बहाल होने पर टिकी हुई है।

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