लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नकली पान मसाला तैयार करने वाली कथित फैक्ट्री के खुलासे का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां तैयार किए जा रहे पान मसाले को बाजार में प्रचलित कमला पसंद, राजश्री और विमल जैसे ब्रांडों से मिलते-जुलते रैपर में पैक कर असली उत्पाद के नाम पर बेचा जाता था। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री, पान मसाला बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान और मशीनें मिलने की बात सामने आई है। अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों और सप्लाई चेन की जांच की जा रही है।
मामला केवल नकली ब्रांडेड सामान बेचने तक सीमित नहीं है। खाद्य उत्पाद से जुड़ा होने के कारण इसमें लोगों के स्वास्थ्य का सवाल भी महत्वपूर्ण है। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि कथित फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाली सामग्री क्या थी, उसकी गुणवत्ता कैसी थी और तैयार माल किन बाजारों में भेजा जा रहा था।
हालांकि किसी इकाई में नकली उत्पाद तैयार होने और ब्रांडों के नाम के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट से होगी।
नाम बड़े ब्रांड का सामान कथित तौर पर नकली
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू नामी ब्रांडों की पैकेजिंग के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। आरोप है कि फैक्ट्री में तैयार पान मसाले को कमला पसंद, राजश्री और विमल जैसे बाजार में पहचाने जाने वाले नामों के रैपर में पैक किया जाता था।
ऐसा करके ग्राहक को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती थी कि वह संबंधित कंपनी का असली उत्पाद खरीद रहा है।
अगर जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला ट्रेडमार्क और बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन के साथ उपभोक्ताओं को धोखा देने से भी जुड़ सकता है।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि जिन ब्रांडों के नाम वाले कथित नकली रैपर मिलने की बात कही गई है, इसका अर्थ उन मूल ब्रांड कंपनियों की इस अवैध गतिविधि में भागीदारी नहीं है। बल्कि उनके नाम और पैकेजिंग के कथित दुरुपयोग की जांच हो रही है।
फैक्ट्री के अंदर चल रहा था पैकिंग का काम
कार्रवाई के दौरान ऐसी सामग्री मिलने का दावा है जिससे बड़े स्तर पर पान मसाला तैयार और पैक किए जाने का संदेह पैदा हुआ।
जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि फैक्ट्री कितने समय से संचालित हो रही थी और एक दिन में कितनी मात्रा में माल तैयार किया जाता था।
इसके अलावा मशीनों और पैकिंग सामग्री की खरीद कहां से हुई, इसका भी पता लगाया जा सकता है।
किसी संगठित नकली उत्पाद नेटवर्क में केवल उत्पादन करने वाले लोग ही शामिल नहीं होते। पैकिंग सामग्री उपलब्ध कराने वाले, माल को गोदाम तक पहुंचाने वाले और बाजार में सप्लाई करने वाले लोगों की भूमिका भी हो सकती है।
इसी कारण जांच का दायरा फैक्ट्री से आगे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंच सकता है।
असली जैसा दिखाने के लिए ब्रांडेड रैपर?
नकली उत्पादों के कारोबार में पैकेजिंग सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। ग्राहक अक्सर दुकान पर उत्पाद खरीदते समय पैकेट का रंग, डिजाइन और ब्रांड का नाम देखकर उसकी पहचान करता है।
अगर पैकेजिंग देखने में असली उत्पाद जैसी हो तो सामान्य ग्राहक के लिए पहली नजर में अंतर पहचानना मुश्किल हो सकता है।
इस मामले में भी आरोप है कि नामी पान मसाला ब्रांडों से मिलते-जुलते रैपर इस्तेमाल करके कथित नकली उत्पाद बाजार में पहुंचाए जा रहे थे।
अब जांच में यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि रैपर कहां छापे गए और उन्हें फैक्ट्री तक किसने पहुंचाया।
अगर अलग जगह पर नकली पैकेजिंग तैयार की जा रही थी तो उस इकाई तक भी जांच पहुंच सकती है।
कहां-कहां भेजा जाता था माल?
इस तरह के मामले में सबसे बड़ा सवाल तैयार माल की सप्लाई से जुड़ा होता है। अगर फैक्ट्री लंबे समय से चल रही थी तो संभव है कि उत्पाद विभिन्न दुकानों या थोक कारोबारियों तक पहुंचा हो।
लेकिन जब तक जांच एजेंसी किसी क्षेत्र या बाजार का नाम आधिकारिक रूप से नहीं बताती तब तक यह दावा नहीं किया जाना चाहिए कि नकली माल किसी खास जिले या राज्य में बेचा जा रहा था।
जांच में बिक्री से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन, संपर्क नंबर और परिवहन से संबंधित जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
इनसे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि फैक्ट्री से तैयार माल किसके पास जाता था और आगे कौन उसे बाजार में बेचता था।
स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर मामला
नकली खाद्य या उपभोग योग्य उत्पादों में सबसे बड़ी चिंता उनकी सामग्री और गुणवत्ता को लेकर होती है।
किसी प्रतिष्ठित कंपनी का असली उत्पाद निर्धारित विनिर्माण प्रक्रिया और नियामकीय आवश्यकताओं के तहत तैयार किया जाता है। दूसरी तरफ अवैध रूप से तैयार किए गए उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर भरोसा नहीं किया जा सकता।
इसलिए बरामद पान मसाले के नमूनों की प्रयोगशाला जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
जांच से यह पता चल सकता है कि उसमें कौन-कौन से पदार्थ मौजूद थे और क्या वह लागू खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप था।
वैसे भी तंबाकू और सुपारी से जुड़े उत्पाद स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़े होते हैं। नकली उत्पादों में अनियंत्रित सामग्री का इस्तेमाल अतिरिक्त चिंता पैदा कर सकता है।
ब्रांड कंपनियों को भी नुकसान
नकली सामान का कारोबार केवल ग्राहक को नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि असली उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को भी आर्थिक और प्रतिष्ठागत नुकसान पहुंचा सकता है।
अगर किसी ग्राहक को नकली पैकेट असली समझकर बेचा जाता है और उसकी गुणवत्ता खराब निकलती है तो वह संबंधित असली ब्रांड को जिम्मेदार समझ सकता है।
इसके अलावा नकली उत्पादों की बिक्री से वास्तविक कंपनी की बिक्री प्रभावित हो सकती है और सरकार को मिलने वाले वैध टैक्स राजस्व पर भी असर पड़ सकता है।
इसी कारण बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड और ट्रेडमार्क के गलत इस्तेमाल के मामलों में कानूनी कार्रवाई करती हैं।
दुकानदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में
अगर कथित नकली पान मसाला बाजार तक पहुंच चुका था तो जांच में यह भी देखा जा सकता है कि इसे किन चैनलों के जरिए बेचा जा रहा था।
हालांकि किसी दुकानदार के पास नकली उत्पाद मिलने का मतलब यह अपने आप साबित नहीं करता कि उसे उत्पाद के नकली होने की जानकारी थी।
यह जांच का विषय होगा कि सप्लायर ने उसे क्या जानकारी दी थी, बिल या इनवॉइस उपलब्ध कराया गया था या नहीं और माल किस कीमत पर दिया गया था।
जानबूझकर नकली ब्रांडेड उत्पाद बेचने और अनजाने में संदिग्ध सप्लाई प्राप्त करने की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।
पैकिंग सामग्री से खुल सकती हैं कई कड़ियां
बरामद कथित नकली रैपर जांच में महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकते हैं।
अगर रैपर किसी प्रिंटिंग प्रेस या पैकेजिंग यूनिट में तैयार किए गए थे तो उनके डिजाइन, प्रिंटिंग और सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड से नेटवर्क के दूसरे लोगों तक पहुंचा जा सकता है।
इसके अलावा बड़ी मात्रा में एक ही ब्रांड की पैकेजिंग मिलने से यह अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है कि उत्पादन किस स्तर पर किया जा रहा था।
हालांकि वास्तविक उत्पादन मात्रा का दावा तभी किया जाना चाहिए जब अधिकारियों के पास उससे जुड़े ठोस रिकॉर्ड या साक्ष्य हों।
असली-नकली की पहचान में सावधानी
ग्राहकों के लिए नकली पैकेट पहचानना हमेशा आसान नहीं होता। फिर भी पैकेजिंग में खराब प्रिंटिंग, गलत स्पेलिंग, संदिग्ध सील, जरूरी वैधानिक जानकारी का अभाव या सामान्य कीमत से असामान्य रूप से कम कीमत कुछ संकेत हो सकते हैं।
लेकिन केवल पैकेट देखने के आधार पर किसी उत्पाद को नकली घोषित करना भी सही नहीं है।
संदेह होने पर ग्राहक संबंधित कंपनी की आधिकारिक उपभोक्ता सेवा या खाद्य सुरक्षा विभाग से जानकारी ले सकता है।
कई कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई
अगर जांच में नकली ब्रांडेड पान मसाला तैयार करने और बेचने के आरोप साबित होते हैं तो मामले में परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न कानूनों के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, ट्रेडमार्क उल्लंघन और खाद्य सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधान शामिल हो सकते हैं। कौन-सी धाराएं वास्तव में लगाई गई हैं, इसकी पुष्टि FIR या संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी से ही की जानी चाहिए।
गिरफ्तार व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक आरोपी ही कहा जाना चाहिए।
नेटवर्क के पीछे कौन?
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल इस कथित फैक्ट्री के संचालन और नेटवर्क के पीछे मौजूद लोगों को लेकर है।
जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री का संचालन कौन कर रहा था, कच्चा माल कहां से आता था, नकली रैपर किसने उपलब्ध कराए और तैयार माल को बाजार तक कौन पहुंचाता था।
अगर पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन सामने आते हैं तो कारोबार के वास्तविक आकार का अंदाजा भी लगाया जा सकता है।
फिलहाल कमला पसंद, राजश्री और विमल जैसे ब्रांडों के नाम वाले कथित नकली रैपर में पान मसाला पैक कर बेचे जाने का मामला गंभीर है। लेकिन बरामदगी की सटीक मात्रा, आरोपियों की संख्या, सप्लाई वाले इलाकों और उत्पाद की गुणवत्ता के संबंध में **संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट को अंतिम आधार मानना जरूरी होगा।**
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कथित नकली कारोबार को मूल ब्रांड कंपनियों से जोड़कर न देखा जाए। आरोप उनके ब्रांड नाम और पैकेजिंग की नकल या दुरुपयोग का है, न कि संबंधित कंपनियों द्वारा नकली माल बनाने का।
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