संतकबीरनगर: परंपरागत बुनकरी से जुड़े परिवारों को आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए जिले के 150 बुनकरों का चयन मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना के तहत किया गया है। चयनित बुनकरों को सरकारी अनुदान पर पावरलूम मशीन और उसे संचालित करने के लिए कार्यशाला अथवा भवन तैयार करने में सहायता दी जाएगी। योजना के माध्यम से लूंगी, तौलिया, गमछा और अन्य कपड़ा उत्पादों का स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है।

हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की इस योजना का उद्देश्य परंपरागत बुनकरों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता और आमदनी में वृद्धि करना है। पावरलूम स्थापित होने के बाद बुनकर कम समय में अधिक कपड़ा तैयार कर सकेंगे। इससे बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करना और बड़े व्यापारियों को नियमित आपूर्ति देना आसान होने की उम्मीद है।

चयनित लाभार्थियों में खलीलाबाद और मेंहदावल तहसील क्षेत्र के बुनकर शामिल हैं। इन क्षेत्रों के कई गांवों में लंबे समय से बुनकरी का काम होता रहा है, लेकिन पूंजी की कमी, पुरानी मशीनों, महंगे कच्चे माल और कमजोर बाजार व्यवस्था के कारण परिवारों को अपेक्षित आय नहीं मिल पा रही थी।

बुनकर बाहुल्य गांवों से आए थे आवेदन

खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के अंसार टोला, अमरडोभा, बखिरा, लेडुआ-महुआ और नौरो सहित कई गांवों के बुनकरों ने पावरलूम स्थापित करने के लिए आवेदन किया था। वहीं मेंहदावल तहसील क्षेत्र के बारागद्दी, ठाकुरद्वारा और दूसरे बुनकर बाहुल्य गांवों से भी आवेदन प्राप्त हुए थे।

इच्छुक बुनकरों ने विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर अपने दस्तावेज जमा किए थे। आवेदन मिलने के बाद विभाग ने पात्रता, बुनकरी के अनुभव, उपलब्ध स्थान और दूसरे आवश्यक मानकों के आधार पर सत्यापन कराया। इस प्रक्रिया के बाद 150 बुनकरों को पावरलूम स्थापना के लिए चयनित किया गया है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, योजना में लाभार्थियों को मशीन खरीदने के साथ पावरलूम चलाने के लिए जरूरी कार्यस्थल तैयार करने में भी सहायता दी जानी है। इससे ऐसे बुनकरों को विशेष राहत मिलेगी, जिनके पास मशीन खरीदने की क्षमता तो दूर, उसे लगाने के लिए उचित भवन भी उपलब्ध नहीं है।

उत्पादन क्षमता में हो सकती है वृद्धि

हाथ से चलने वाले परंपरागत करघे पर कपड़ा तैयार करने में ज्यादा समय और श्रम लगता है। इसके विपरीत पावरलूम के माध्यम से कम समय में अधिक कपड़ा बुना जा सकता है। हालांकि, मशीन का लाभ तभी मिलेगा जब बुनकरों को नियमित बिजली, गुणवत्तापूर्ण धागा, तकनीकी प्रशिक्षण और तैयार उत्पाद के लिए बाजार भी उपलब्ध हो।

चयनित बुनकर पावरलूम से लूंगी, तौलिया, गमछा, चादर और मांग के अनुसार अन्य वस्त्र तैयार कर सकेंगे। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से व्यापारियों को बाहर से कपड़ा मंगाने की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके साथ ही बुनकरी से जुड़े धागा विक्रेताओं, रंगाई इकाइयों, पैकिंग और परिवहन के काम में भी नए अवसर बनने की संभावना है।

यदि मशीनें नियमित रूप से चलती हैं और तैयार माल के लिए उचित बाजार मिलता है तो चयनित परिवारों की आय में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, आवेदन का चयन होते ही आर्थिक स्थिति बदलने की गारंटी नहीं होती। मशीन की स्थापना, प्रशिक्षण, बिजली आपूर्ति, उत्पादन लागत और बिक्री व्यवस्था योजना की वास्तविक सफलता तय करेंगे।

स्थानीय युवाओं को भी मिल सकता है काम

पावरलूम इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष लाभ चयनित बुनकरों को मिलेगा, लेकिन इससे स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए भी काम के अवसर बन सकते हैं। मशीन संचालन, धागा तैयार करने, कपड़ा काटने, सिलाई, पैकिंग और उत्पादों की बिक्री जैसे कामों में अतिरिक्त लोगों की जरूरत पड़ सकती है।

बुनकर परिवारों में नई पीढ़ी का इस पारंपरिक व्यवसाय से मोहभंग भी एक बड़ी चुनौती रही है। कम आमदनी और अस्थिर काम के कारण कई युवा बुनकरी छोड़कर दूसरे शहरों में मजदूरी या निजी नौकरी के लिए चले जाते हैं। आधुनिक मशीन और बेहतर बाजार उपलब्ध होने पर कुछ युवा फिर इस कारोबार से जुड़ सकते हैं।

महिलाएं भी घर या कार्यशाला स्तर पर धागे की तैयारी, उत्पादों की फिनिशिंग और पैकिंग में योगदान कर सकती हैं। यदि स्वयं सहायता समूहों और विपणन संस्थाओं से समन्वय किया जाए तो स्थानीय कपड़ा उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

विपणन और प्रशिक्षण सबसे बड़ी जरूरत

बुनकरों के सामने मशीन की कमी के अलावा तैयार उत्पाद बेचने की समस्या भी रहती है। कई बार बिचौलियों के कारण उन्हें उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। ऐसे में केवल पावरलूम उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। विभाग को उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रदर्शनी, ऑनलाइन बिक्री और सरकारी विपणन केंद्रों से जुड़ाव पर भी काम करना होगा।

तकनीकी प्रशिक्षण के अभाव में नई मशीनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। लाभार्थियों को मशीन संचालन, मरम्मत, डिजाइन तैयार करने, गुणवत्ता नियंत्रण और लागत प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी होगा। इसके साथ ही बिजली आपूर्ति और धागे की कीमतों में उतार-चढ़ाव का समाधान भी योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

उत्तर प्रदेश हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना को लाभार्थी योजनाओं में शामिल किया गया है। विभाग बुनकरों के लिए बिजली दर में राहत, सौर ऊर्जा और अन्य सहायता कार्यक्रम भी संचालित करता है।  

जिले में 150 बुनकरों के चयन से परंपरागत वस्त्र उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है। अब लाभार्थियों को अनुदान जारी होने, मशीनों की खरीद और कार्यशाला निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। योजना का वास्तविक प्रभाव इकाइयों के संचालन और उत्पादों को मिलने वाले बाजार के बाद सामने आएगा।

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