लखनऊ। राजधानी के विकास नगर इलाके में एक मॉडल शॉप पर नाबालिग को शराब बेचे जाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने कार्रवाई की है। जांच में दुकान के सेल्समैन का व्यवहार नियमों के विपरीत मिलने पर उसे नौकरी से हटा दिया गया। इसके साथ ही संबंधित दुकान के अनुज्ञापी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। विभाग ने शराब दुकानों के संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कम उम्र के लोगों को किसी भी परिस्थिति में शराब न बेची जाए।

मामला विकास नगर स्थित एक मॉडल शॉप का बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक बच्चा दुकान से शराब लेता दिखाई देने का दावा किया गया। वहां मौजूद एक ग्राहक ने इसका विरोध किया और सेल्समैन से पूछा कि नाबालिग को शराब क्यों दी जा रही है। आरोप है कि इस पर सेल्समैन ने नियमों को नजरअंदाज करते हुए आपत्तिजनक जवाब दिया। ग्राहक और सेल्समैन के बीच हुई बहस का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया गया।

वीडियो में सेल्समैन कथित रूप से यह कहते सुनाई दे रहा था कि बच्चा हो या बड़ा, जो पैसे देगा उसे सामान दे दिया जाएगा। यह वीडियो एक्स और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से प्रसारित हुआ। लोगों ने दुकान के कर्मचारी के व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आबकारी विभाग से कार्रवाई की मांग की। कई उपयोगकर्ताओं ने सवाल किया कि यदि अधिकृत शराब दुकानों पर आयु संबंधी नियमों का पालन नहीं होगा तो बच्चों को नशे की पहुंच से कैसे बचाया जा सकेगा।

मामला सामने आने के बाद जिला आबकारी अधिकारी ने वीडियो और संबंधित दुकान के बारे में जांच के निर्देश दिए। आबकारी विभाग की टीम ने दुकान पर पहुंचकर अनुज्ञापी, सेल्समैन और वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। दुकान के रिकॉर्ड और वायरल वीडियो का भी परीक्षण किया गया। जांच के आधार पर विभाग ने सेल्समैन के आचरण को अनुचित मानते हुए उसे दुकान से हटाने का निर्देश दिया।

दुकान के लाइसेंसधारक की जिम्मेदारी भी तय की गई। आबकारी विभाग ने अनुज्ञापी पर 30 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। दुकान संचालक को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में वहां तैनात कोई कर्मचारी नाबालिग या निर्धारित आयु से कम व्यक्ति को शराब न बेचे। कर्मचारियों को बिक्री संबंधी नियमों की जानकारी देने और ग्राहकों की आयु संदिग्ध होने पर वैध पहचान पत्र देखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उत्तर प्रदेश में शराब की बिक्री लाइसेंस की निर्धारित शर्तों के अनुसार की जाती है। अधिकृत दुकान का संचालक और वहां काम करने वाले कर्मचारी इन शर्तों का पालन करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। नाबालिग को शराब बेचना केवल लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। नियम तोड़ने पर दुकान के खिलाफ जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या अन्य विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

आबकारी विभाग ने राजधानी की शराब दुकानों और मॉडल शॉप संचालकों को सतर्क रहने के लिए कहा है। कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि कम उम्र दिखाई देने वाले ग्राहकों को बिना आयु प्रमाण के शराब न दी जाए। किसी बच्चे को परिवार के किसी बड़े सदस्य के लिए भी शराब खरीदने भेजा जाता है तो दुकान को बिक्री से इनकार करना होगा। विभाग ने कहा है कि दुकानों पर नियमों और चेतावनियों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

इस घटना ने शराब की दुकानों पर आयु सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। सामान्य तौर पर कर्मचारियों को ग्राहक की उम्र को लेकर संदेह होने पर पहचान पत्र मांगना चाहिए, लेकिन कई दुकानों पर इस प्रक्रिया का नियमित पालन नहीं होने की शिकायतें मिलती रहती हैं। भीड़भाड़ या जल्द बिक्री के दबाव में नियमों की अनदेखी बच्चों और किशोरों तक शराब की पहुंच आसान बना सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में शराब का सेवन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास जारी रहता है और इस दौरान नशीले पदार्थों की आदत पढ़ाई, व्यवहार और पारिवारिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि नाबालिगों को शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रखने के लिए परिवार, दुकानदार, प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी जरूरी मानी जाती है।

प्रदेश सरकार अवैध और जहरीली शराब के खिलाफ अभियान चलाने के साथ अधिकृत दुकानों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने का दावा करती रही है। विकास नगर की घटना ने दिखाया कि केवल अवैध बिक्री रोकना पर्याप्त नहीं है। लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर भी नियमित निगरानी और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद हुई कार्रवाई को इसी दिशा में चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, किसी वायरल वीडियो के आधार पर तत्काल निष्कर्ष निकालने के बजाय उसकी सत्यता और पूरा संदर्भ जांचना जरूरी होता है। इस मामले में विभाग ने जांच कराने के बाद कार्रवाई करने की बात कही है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि दुकानों पर होने वाले नियम उल्लंघन की फोटो या वीडियो संबंधित विभाग तक पहुंचने पर उस पर संज्ञान लिया जा सकता है।

आबकारी अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में निरीक्षण बढ़ाने और संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग दुकानों के सीसीटीवी फुटेज, बिक्री व्यवस्था और कर्मचारियों के सत्यापन की जांच भी कर सकता है। दोबारा उल्लंघन मिलने पर अधिक कठोर कार्रवाई की संभावना है।

विकास नगर के इस मामले में सेल्समैन को हटाने और दुकान पर आर्थिक दंड लगाने के बाद विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों को शराब बेचना स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब चुनौती यह है कि ऐसी कार्रवाई केवल वायरल वीडियो वाले मामलों तक सीमित न रहे, बल्कि सभी शराब दुकानों पर आयु सत्यापन को नियमित और प्रभावी व्यवस्था बनाया जाए।

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