नोएडा: गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में करीब दो साल से फरार चल रहे 10 हजार रुपये के इनामी आरोपी को नोएडा की थाना सेक्टर-63 पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी अपनी पहचान छिपाकर मुंबई के कुर्ला इलाके में रह रहा था और वहां वाहनों की डेंटिंग का काम कर रहा था। तकनीकी निगरानी और आरोपी के एक परिचित के मोबाइल से मिले महत्वपूर्ण इनपुट के आधार पर पुलिस उसके ठिकाने तक पहुंची।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान फिरोज अहमद के रूप में हुई है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के गौर थाना क्षेत्र स्थित सुजिया गांव का रहने वाला बताया गया है। नोएडा में रहने के दौरान वह बसई गांव में रह रहा था। पुलिस का दावा है कि फिरोज अपने साथियों के साथ मिलकर लूट और चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। उसके विरुद्ध फेज-3 थाने में कई आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 में फेज-3 थाना क्षेत्र में फिरोज और उसके साथियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए नोएडा छोड़कर मुंबई भाग गया। इसके बाद उसने अपना रहन-सहन और कामकाज बदल लिया, ताकि पुलिस को उसके बारे में कोई जानकारी न मिल सके।

कुर्ला के हनुमान नगर में बनाया ठिकाना

नोएडा से फरार होने के बाद फिरोज मुंबई के कुर्ला स्थित हनुमान नगर इलाके में रहने लगा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी वहां डेंटिंग का काम करके अपनी आजीविका चला रहा था। उसने स्थानीय स्तर पर खुद को एक सामान्य कामगार के रूप में स्थापित कर लिया था। इस दौरान वह कथित तौर पर अपने पुराने परिचितों से भी सीमित संपर्क रख रहा था, जिससे उसका ठिकाना आसानी से उजागर न हो।

काफी समय तक आरोपी का कोई ठोस सुराग नहीं मिलने पर पुलिस ने उसके परिचितों और संपर्क में रहने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसी दौरान उसके एक जानकार के मोबाइल से पुलिस को ऐसा इनपुट मिला, जिसके आधार पर आरोपी की मुंबई में मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके बाद सेक्टर-63 थाना पुलिस की एक टीम मुंबई भेजी गई।

स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने और आरोपी के ठिकाने की पुष्टि करने के बाद टीम ने शुक्रवार को कुर्ला के हनुमान नगर क्षेत्र में दबिश दी। पुलिस के अनुसार, आरोपी को संभलने या भागने का मौका दिए बिना गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई में मुंबई पुलिस से भी आवश्यक सहयोग लिया गया।

आरोपी पर घोषित था 10 हजार का इनाम

लगातार फरार रहने के कारण फिरोज अहमद की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस का कहना है कि उसके विरुद्ध लूट और चोरी सहित तीन आपराधिक मामले फेज-3 थाने में दर्ज हैं। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय संबंधित अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को मुंबई की सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया। वहां से पुलिस ने उसकी ट्रांजिट रिमांड हासिल की, जिसके बाद उसे नोएडा लाया जा रहा है। नोएडा पहुंचने के बाद उसे संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस आरोपी से उसके गिरोह के अन्य सदस्यों, पूर्व में की गई कथित वारदातों और फरारी के दौरान मदद करने वाले लोगों के संबंध में पूछताछ कर सकती है।

दो वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता रहा

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फिरोज की गिरफ्तारी आसान नहीं थी। वह करीब दो वर्षों तक लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा और पुलिस से बचने के लिए पुराने संपर्कों से दूरी बनाए हुए था। मुंबई जैसे महानगर में बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों के बीच सामान्य कामगार की तरह रहना उसके लिए पहचान छिपाने में मददगार साबित हुआ।

इसके बावजूद पुलिस ने पुराने मामलों और संपर्कों से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण जारी रखा। परिचित के मोबाइल से मिले इनपुट के बाद आरोपी की गतिविधियों को सत्यापित किया गया। पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद ही टीम को मुंबई रवाना किया गया। गिरफ्तारी के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।

टीम को सम्मानित करने की घोषणा

डीसीपी सेंट्रल नोएडा शैलेंद्र कुमार सिंह ने फरार इनामी आरोपी को गिरफ्तार करने वाली टीम के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने की बात कही है। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक सूची में शैलेंद्र कुमार सिंह का पद डीसीपी सेंट्रल नोएडा एवं अपराध दर्ज है।  

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी रहेगा। फिरोज की गिरफ्तारी को तकनीकी निगरानी और अलग-अलग राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय का परिणाम माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि मुंबई में रहने के दौरान आरोपी किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसने इस अवधि में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में भूमिका निभाई थी।

इस गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित अदालत के आदेशों के अनुसार की जाएगी। आरोपी के विरुद्ध लगे आरोपों को साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होगी और उसे अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त रहेगा। गिरफ्तारी से संबंधित प्रमुख विवरण स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में भी सामने आए हैं।  

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