उत्तर प्रदेश

सरयू की कटान का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा, गोपालनगर टाड़ी पर मांगी गई रिपोर्ट

Kavita2
14 Sept 2026 3:16 PM IST
सरयू की कटान का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा, गोपालनगर टाड़ी पर मांगी गई रिपोर्ट
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बलिया। बैरिया तहसील क्षेत्र के गोपालनगर टाड़ी गांव में सरयू नदी की कटान से पैदा हुए संकट का मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। गांव में लगातार हो रही कटान, मकानों के नदी में समाने और प्रभावित परिवारों की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट मांगी है। इस पहल के बाद कटान प्रभावित ग्रामीणों में समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद जगी है।

गोपालनगर टाड़ी में कई सप्ताह से सरयू नदी का दबाव बना हुआ है। नदी की तेज धारा लगातार आबादी वाले हिस्से के पास जमीन काट रही है। इससे कई मकान और कृषि भूमि प्रभावित हो चुके हैं। कुछ परिवार अपने घरों का सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए हैं, जबकि कटान के मुहाने पर रहने वाले लोगों में अभी भी भय का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कटान की समस्या को लेकर उन्होंने तहसील और जिला स्तर के अधिकारियों से कई बार शिकायत की। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण भी किया था। बताया जा रहा है कि निरीक्षण के बाद स्थिति सामान्य होने की रिपोर्ट दी गई, लेकिन इसके बावजूद नदी का कटाव नहीं रुका। बाद में दो और मकान सरयू में समा गए, जिससे प्रशासनिक आकलन पर सवाल उठने लगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

ग्रामीणों की शिकायत और लगातार सामने आ रही कटान की घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिला प्रशासन से वस्तुस्थिति की रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में प्रभावित परिवारों की संख्या, नदी में समाए मकानों, कटान के खतरे में आए घरों, राहत कार्यों और बचाव के लिए किए गए उपायों की जानकारी शामिल किए जाने की संभावना है।

जिला प्रशासन को यह भी बताना होगा कि मौके पर निरीक्षण कब किया गया, उस दौरान क्या स्थिति मिली और कटान रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए। यदि पहले दी गई रिपोर्ट में स्थिति सामान्य बताई गई थी तो उसके बाद मकानों के नदी में समाने की परिस्थितियों का भी परीक्षण किया जा सकता है।

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय से रिपोर्ट मांगे जाने संबंधी आधिकारिक पत्र अथवा उसकी समयसीमा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को जिला प्रशासन या मुख्यमंत्री कार्यालय से औपचारिक पुष्टि मिलने तक संबंधित खबरों और स्थानीय जानकारी के आधार पर ही लिखा जाना उचित होगा।

निरीक्षण के बाद भी जारी रही कटान

गोपालनगर टाड़ी में सरयू की कटान कोई नई समस्या नहीं है। नदी का जलस्तर बढ़ने और धारा का रुख आबादी की ओर होने से बरसात के मौसम में स्थिति गंभीर हो जाती है। मिट्टी कटने के कारण पहले खेत प्रभावित होते हैं और बाद में नदी मकानों के करीब पहुंच जाती है। ग्रामीणों के सामने अपना घर बचाने के साथ परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की चुनौती रहती है।

अधिकारियों ने पूर्व में गांव का निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निरीक्षण के बावजूद पर्याप्त कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया। स्थिति को सामान्य बताने के बाद नदी ने दो और मकानों को अपनी चपेट में ले लिया। इससे उन परिवारों की चिंता और बढ़ गई है जिनके मकान नदी से कुछ ही दूरी पर रह गए हैं।

अगस्त में भी गोपालनगर टाड़ी में कई मकानों के सरयू नदी में समाने की खबरें सामने आई थीं। अलग-अलग रिपोर्टों में प्रभावित मकानों की संख्या भिन्न बताई गई, इसलिए कुल नुकसान की पुष्टि राजस्व विभाग के आधिकारिक सर्वे से ही हो सकेगी। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट

सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग

कटान से प्रभावित परिवार प्रशासन से तत्काल राहत के साथ स्थायी पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। जिन परिवारों के मकान नदी में समा चुके हैं, उनके सामने रहने और घरेलू सामान सुरक्षित रखने का संकट है। वहीं कटान के मुहाने पर स्थित घरों के लोग रात में भी नदी की गतिविधि पर नजर रखने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल राहत सामग्री बांटना पर्याप्त नहीं है। प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित जमीन, आवास और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था होनी चाहिए। परिवारों की सूची तैयार कर उन्हें नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

कटान प्रभावित क्षेत्र में पशुओं के लिए चारा, स्वच्छ पेयजल, अस्थायी शौचालय और चिकित्सा सुविधा की जरूरत भी बनी हुई है। बारिश और दूषित पानी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को नियमित रूप से प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने की आवश्यकता है।

कटानरोधी कार्यों की प्रभावशीलता पर सवाल

सरयू नदी की कटान रोकने के लिए आमतौर पर बोल्डर पिचिंग, जियो बैग, बांस की बल्लियों और अन्य अस्थायी उपायों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन तेज धारा और बढ़ते जलस्तर के बीच ये उपाय कई बार पर्याप्त साबित नहीं होते। ग्रामीण स्थायी परियोजना बनाकर आबादी वाले हिस्से को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार नदी की धारा, किनारे की मिट्टी, जलस्तर और कटान की दिशा का तकनीकी सर्वे कराए बिना प्रभावी योजना बनाना कठिन होता है। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग को संवेदनशील स्थानों की पहचान कर दीर्घकालीन योजना तैयार करनी होगी। केवल संकट बढ़ने के बाद अस्थायी उपाय करने से हर साल समस्या दोहराने की आशंका बनी रहती है।

मीडिया रिपोर्टों के बाद बढ़ी सक्रियता

सरयू की कटान और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर स्थानीय तथा क्षेत्रीय मीडिया में लगातार खबरें सामने आती रही हैं। दैनिक जागरण सहित विभिन्न समाचार माध्यमों ने प्रभावित परिवारों की स्थिति, नदी में समाते मकानों और प्रशासनिक प्रयासों पर रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके बाद मामला उच्च स्तर तक पहुंचने की बात सामने आई है।

अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अधिकारी दोबारा मौके का विस्तृत निरीक्षण करेंगे। वे चाहते हैं कि केवल कागजी रिपोर्ट तैयार करने के बजाय प्रभावित परिवारों से बातचीत कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए।

मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्देश जारी हो सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता कटान के मुहाने पर रहने वाले परिवारों को सुरक्षित करना, नुकसान का सर्वे कराना और राहत उपलब्ध कराना है। यदि समय रहते प्रभावी कटानरोधी कार्य और पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है तो कई परिवारों के आशियाने बचाए जा सकते हैं।

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