बरेली। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी की कथित हेल्पलाइन में संविदा पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर 36 लोगों से ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि दो व्यक्तियों ने खुद को एनसीबी हेल्पलाइन से जुड़ा अधिकारी और “सेंट्रल कम्युनिकेशन हेड” बताकर युवाओं को भरोसे में लिया। इसके बाद व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया, ऑनलाइन इंटरव्यू कराने का नाटक किया गया और आवेदन शुल्क के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से दो हजार रुपये वसूल लिए गए। नौकरी नहीं मिलने और मामला संदिग्ध लगने पर पीड़ित ने अलीगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिकी लिखकर प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
शाहजहांपुर के मदनापुर थाना क्षेत्र स्थित बड़ी खास गांव निवासी प्रशांत कुमार पाठक ने पुलिस को बताया कि उनका संपर्क अलीगंज थाना क्षेत्र के शिवनगर नैनोवा गांव निवासी अमित कुमार और विवेक शर्मा से हुआ था। शिकायत के मुताबिक दोनों ने अपना परिचय एनसीबी हेल्पलाइन के अधिकारी के रूप में दिया। उन्होंने दावा किया कि एनसीबी की हेल्पलाइन सेवा में संविदा के आधार पर कर्मचारियों की भर्ती निकली है और इच्छुक अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाई जा सकती है।
प्रशांत का आरोप है कि दोनों ने नौकरी को अच्छा अवसर बताते हुए उन्हें आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। आरोपियों ने यह भी कहा कि वे अपने परिचित बेरोजगार युवाओं के आवेदन करा सकते हैं। प्रत्येक अभ्यर्थी से ऑनलाइन आवेदन और पंजीकरण शुल्क के रूप में दो हजार रुपये जमा कराने की बात कही गई। सरकारी संस्था का नाम सामने आने और आरोपियों की ओर से प्रभावशाली पद का दावा किए जाने के कारण प्रशांत को उन पर भरोसा हो गया।
35 साथियों के दस्तावेज भी भेजे
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने अपने साथ नौकरी की तलाश कर रहे 35 अन्य लोगों को भी इस कथित भर्ती के बारे में जानकारी दी। सभी लोग संविदा पर नौकरी मिलने की उम्मीद में आवेदन के लिए तैयार हो गए। इसके बाद प्रशांत ने अपने और सभी 35 साथियों के शैक्षिक तथा पहचान संबंधी दस्तावेज आरोपी बताए गए व्यक्ति को भेज दिए।
कुल 36 अभ्यर्थियों से दो-दो हजार रुपये के हिसाब से 72 हजार रुपये का भुगतान कराया गया। यह रकम ऑनलाइन माध्यम से भेजे जाने की बात कही गई है। शिकायत में भुगतान के लेन-देन, व्हाट्सएप संदेश और भेजे गए दस्तावेजों का विवरण जांच के लिए पुलिस को उपलब्ध कराने की बात सामने आई है।
व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर कराया इंटरव्यू
आरोप है कि अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया वास्तविक लगने लगे, इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया। ग्रुप में भर्ती, इंटरव्यू और चयन से संबंधित सूचनाएं साझा की जाती थीं। इसके बाद अभ्यर्थियों का कथित रूप से ऑनलाइन इंटरव्यू भी कराया गया। इस प्रक्रिया से युवाओं को विश्वास हो गया कि उनका आवेदन किसी आधिकारिक भर्ती के अंतर्गत स्वीकार कर लिया गया है।
ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद अभ्यर्थियों को चयन और नियुक्ति का भरोसा दिया गया। आरोपियों की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें एनसीबी हेल्पलाइन में संविदा पर काम मिल जाएगा। काफी समय बीतने के बावजूद जब किसी को नियुक्ति पत्र नहीं मिला तो अभ्यर्थियों ने संपर्क करने का प्रयास किया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें ठगी का संदेह हुआ।
अलीगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज
नौकरी नहीं मिलने और जमा की गई रकम वापस न किए जाने पर प्रशांत ने अलीगंज थाने में शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने नामजद प्राथमिकी दर्ज की है। जांच में ऑनलाइन भुगतान से जुड़े बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप ग्रुप, कथित इंटरव्यू और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल की जा सकती है।
मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं। प्राथमिकी दर्ज होना आरोप सिद्ध होना नहीं है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उनकी भूमिका और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी। घटना के संबंध में उपलब्ध जानकारी का स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में भी उल्लेख किया गया है।
दस्तावेजों के दुरुपयोग का भी खतरा
इस मामले में केवल 72 हजार रुपये की कथित ठगी ही चिंता का विषय नहीं है। अभ्यर्थियों ने अपने पहचान और शैक्षिक दस्तावेज भी भेजे थे। यदि इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, अंकसूची, फोटो या बैंक संबंधी जानकारी शामिल है तो उनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल फर्जी खाते खुलवाने, सिम कार्ड हासिल करने या दूसरी अवैध गतिविधियों में किया जा सकता है।
प्रभावित अभ्यर्थियों को अपने बैंक खातों और मोबाइल नंबरों पर होने वाली गतिविधियों की निगरानी करनी चाहिए। किसी संदिग्ध लेन-देन या अनजान ऋण की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित बैंक और अधिकारियों को शिकायत देनी चाहिए। राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर भी वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की सूचना दी जा सकती है।
आधिकारिक वेबसाइट से करें भर्ती की पुष्टि
नौकरी तलाश रहे युवाओं को किसी भी केंद्रीय या राज्य स्तरीय सरकारी संस्था की भर्ती के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट और जारी विज्ञापन पर भरोसा करना चाहिए। व्हाट्सएप, टेलीग्राम या व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से आने वाले नौकरी प्रस्तावों की सत्यता जांचे बिना भुगतान नहीं करना चाहिए। कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर निजी खाते या यूपीआई नंबर पर शुल्क मांगे तो यह खतरे का संकेत हो सकता है।
अभ्यर्थियों को नियुक्ति से पहले संस्थान का आधिकारिक विज्ञापन, पदों की संख्या, आवेदन प्रक्रिया और शुल्क भुगतान की वैध व्यवस्था जांचनी चाहिए। सरकारी भर्ती में ऑनलाइन इंटरव्यू या चयन का दावा करने वाले व्यक्ति को दस्तावेज भेजने से पहले संबंधित विभाग से पुष्टि करना जरूरी है। इस प्रकरण ने एक बार फिर दिखाया है कि बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर ठगने वाले गिरोह नई तकनीक और प्रतिष्ठित संस्थाओं के नाम का सहारा ले रहे हैं।