हापुड़ : जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में तेंदुए के हमले की सूचना मिलने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। ग्राम नयागांव निवासी नेपाल सिंह के तेंदुए के कथित हमले में घायल होने की सूचना मिलने पर वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मंगलवार को डीएफओ हापुड़ गौतम सिंह वन विभाग के कर्मचारियों के साथ गढ़मुक्तेश्वर अस्पताल पहुंचे और घायल नेपाल सिंह से मुलाकात कर घटना के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद वन विभाग की टीम ने संबंधित गांवों और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा ग्रामीणों से बातचीत कर किसी वन्यजीव की मौजूदगी के बारे में जानकारी जुटाई।
जानकारी के अनुसार, नेपाल सिंह के घायल होने के बाद स्थानीय स्तर पर यह सूचना सामने आई कि उन पर तेंदुए ने हमला किया है। सूचना वन विभाग तक पहुंचते ही अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। डीएफओ गौतम सिंह अपनी टीम के साथ गढ़मुक्तेश्वर अस्पताल पहुंचे, जहां नेपाल सिंह का उपचार चल रहा था। डीएफओ ने घायल से घटना के बारे में जानकारी ली और उनके शरीर पर लगी चोटों का भी निरीक्षण किया। वन विभाग की टीम ने यह समझने की कोशिश की कि घटना किस परिस्थिति में हुई और घायल व्यक्ति को किस तरह की चोटें आई हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नेपाल सिंह के शरीर पर दिखाई दे रहे खरोंच के निशानों की जांच करने पर प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ये निशान तेंदुए के पंजों के हैं। डीएफओ गौतम सिंह के मुताबिक, शरीर पर दिखाई दे रहे खरोंच के निशान बहुत अधिक गहरे नहीं हैं और उनकी लंबाई भी ऐसी है, जिससे प्रथम दृष्टया उन्हें तेंदुए के पंजों के निशान मानना स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के निशान किसी अन्य जानवर के कारण भी हो सकते हैं। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी और जांच का काम जारी रखा है।
नेपाल सिंह का अस्पताल में उपचार कराया गया। वन विभाग के कर्मचारी भी अस्पताल में मौजूद रहे और घायल की स्थिति की जानकारी लेते रहे। घटना को लेकर ग्रामीणों के बीच भी चर्चा का माहौल बना हुआ है। तेंदुए के हमले की सूचना सामने आने के बाद आसपास के गांवों में लोगों में चिंता बढ़ गई। ऐसे में वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को समझने का प्रयास किया और उन्हें किसी भी तरह की अफवाह से बचने की सलाह दी।
अस्पताल में घायल नेपाल सिंह से मुलाकात के बाद डीएफओ गौतम सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने नयागांव, आलमपुर और भगवंतपुर क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम ने गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से पूछा कि क्या उन्होंने हाल के दिनों में किसी तेंदुए या अन्य वन्यजीव को इलाके में देखा है। इसके अलावा वन विभाग ने क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों से संबंधित किसी अन्य घटना की जानकारी भी जुटाई।
ग्रामीणों को वन विभाग की ओर से सावधानी बरतने की सलाह दी गई। अधिकारियों ने कहा कि खेतों, जंगल के आसपास और सुनसान इलाकों में जाते समय विशेष सतर्कता बरती जाए। यदि किसी व्यक्ति को कोई संदिग्ध वन्यजीव दिखाई देता है तो उसके पास जाने, उसे घेरने या पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देना सबसे सुरक्षित तरीका है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेंदुए या किसी अन्य वन्यजीव के दिखाई देने की स्थिति में भीड़ एकत्र न करें। वन्यजीव को उकसाने या उसका पीछा करने से स्थिति खतरनाक हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना मिलने पर विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करेगी और आवश्यकता के अनुसार कार्रवाई करेगी।
गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में तेंदुए के कथित हमले की सूचना के बाद वन विभाग की सक्रियता से ग्रामीणों को भी राहत मिली है। फिलहाल विभाग की ओर से क्षेत्र में निगरानी रखने और ग्रामीणों को जागरूक करने का काम जारी है। अधिकारियों ने लोगों से स्पष्ट कहा है कि बिना पुष्टि किसी भी सूचना को सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलाने से बचें। यदि किसी व्यक्ति को वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देती है तो सीधे वन विभाग को इसकी जानकारी दें।
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में नेपाल सिंह के शरीर पर मिले निशानों को तेंदुए के पंजों के निशान नहीं माना गया है। ऐसे में वास्तविक घटना की स्थिति और चोटों के कारण को लेकर आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल विभाग की टीम संबंधित क्षेत्रों में निगरानी कर रही है और ग्रामीणों से लगातार जानकारी जुटाई जा रही है।