यूपी | ब्रज की अनोखी परंपरा: लंगोटलंगोट वाली होली एक अनोखी और परंपरागत होली है, जो खासतौर पर उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में खेली जाती है। इसे अखाड़ों और पहलवानों की होली भी कहा जाता है।
क्या है लंगोट वाली होली?
- इस होली में अखाड़ों के पहलवान सिर्फ लंगोट पहनकर एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं।
- यह परंपरा कुश्ती और बलशाली परंपरा से जुड़ी हुई है, जहां पहलवान दांव-पेंच दिखाते हुए होली खेलते हैं।
- इसे शक्ति, सौहार्द और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
कहां खेली जाती है?
- मुख्य रूप से मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, बरसाना और ब्रज के अन्य क्षेत्रों में इसे देखा जाता है।
- कई स्थानों पर इसे हाथी घोड़े और ढोल-नगाड़ों के साथ बड़े स्तर पर मनाया जाता है।
इस होली की खास बातें
शुद्ध देसी माहौल – बिना किसी आधुनिक रंगों के, सिर्फ गुलाल और प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है।
शक्ति प्रदर्शन – पहलवान कुश्ती के दांव दिखाते हैं और एक-दूसरे को उठाकर हवा में घुमाने जैसी मस्ती करते हैं।
भक्ति से जुड़ा उत्सव – यह होली भगवान कृष्ण और उनके बाल्यकाल की लीलाओं से प्रेरित होती है।
क्यों है खास?
- यह शक्ति और परंपरा का अनूठा संगम है।
- इसमें आक्रामकता नहीं, बल्कि मित्रता और सौहार्द झलकता है।
- इस अनोखी होली को देखने के लिए देश-विदेश से लोग ब्रज क्षेत्र आते हैं।
निष्कर्ष
लंगोट वाली होली सिर्फ एक रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और भाईचारे की पहचान है। अगर आपने कभी ब्रज की यह अनोखी होली नहीं देखी, तो एक बार जरूर इसे अनुभव करें!