मेरठ। जिले में सड़क हादसों को कम करने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने संबंधित विभागों के अधिकारियों से सड़क सुरक्षा के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन कराने को कहा। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों को हाईवे पर बने सभी अवैध कट बंद कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मेरठ-करनाल और मेरठ-पौड़ी हाईवे पर पर्याप्त संख्या में फुट ओवर ब्रिज बनाने को कहा गया, ताकि पैदल यात्रियों को सुरक्षित तरीके से सड़क पार करने की सुविधा मिल सके और दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के कारणों और उन्हें रोकने के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। जिन स्थानों पर दुर्घटनाओं का खतरा अधिक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधारात्मक कार्य पूरे किए जाएं।
हाईवे पर बने अवैध कट को दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण मानते हुए जिलाधिकारी ने NHAI अधिकारियों को इन्हें बंद कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क पर निर्धारित स्थानों के अलावा बनाए गए कट से वाहन अचानक दूसरी लेन या दिशा में पहुंच जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे सभी स्थानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाए।
मेरठ-करनाल और मेरठ-पौड़ी हाईवे पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने NHAI अधिकारियों से इन दोनों हाईवे पर जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में फुट ओवर ब्रिज का निर्माण कराने को कहा। इससे लोगों को तेज रफ्तार वाहनों के बीच से सड़क पार करने की जरूरत कम होगी।
जिलाधिकारी ने जिले में चिह्नित ब्लैक स्पॉट की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि ब्लैक स्पॉट पर सुधार से जुड़े सभी जरूरी काम जल्द से जल्द पूरे किए जाएं। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल ब्लैक स्पॉट चिह्नित करना पर्याप्त नहीं है। दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाकर उनके समाधान के लिए जरूरी बदलाव भी किए जाने चाहिए। जहां सड़क की संरचना में सुधार की आवश्यकता हो, वहां संबंधित विभाग समयबद्ध तरीके से काम पूरा करें।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। बैठक में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी उपस्थित नहीं हुए थे। इस पर जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी की इस कार्रवाई से यह संदेश दिया गया कि सड़क सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय से संबंधित बैठकों में विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी है। सड़क सुरक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों में शिक्षा विभाग की भी भूमिका रहती है, इसलिए संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया।
बैठक में शहर के घंटाघर क्षेत्र की यातायात व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। घंटाघर के पास सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभों को यातायात में बाधा के रूप में देखते हुए जिलाधिकारी ने विद्युत विभाग को इन्हें हटाने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा।
उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिजली के खंभों को स्थानांतरित करने के लिए आवश्यक बजट की स्वीकृति कराई जाए और इसके बाद जल्द कार्रवाई की जाए। सड़क के बीच मौजूद खंभों के कारण यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश दिया। सड़क सुरक्षा के लिए NHAI, परिवहन विभाग, यातायात व्यवस्था से जुड़े विभाग, विद्युत विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी बताया गया।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सड़क हादसों को रोकने के लिए केवल वाहन चालकों को नियमों का पालन कराने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सड़क के बुनियादी ढांचे में मौजूद कमियों को भी दूर करना होगा। अवैध कट, ब्लैक स्पॉट और सड़क के बीच मौजूद बिजली के खंभों जैसी समस्याओं का समाधान इसी दिशा में किया जाना है।
हाईवे पर अवैध कट बंद कराने के साथ उन स्थानों की पहचान करने को कहा गया, जहां लोग बड़ी संख्या में सड़क पार करते हैं। ऐसे स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज की जरूरत का आकलन करते हुए निर्माण कराया जाएगा। विशेष रूप से मेरठ-करनाल और मेरठ-पौड़ी हाईवे पर इस दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से सड़क सुरक्षा के सभी निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन विभागों को जो जिम्मेदारी दी गई है, वे उसे तय समय के भीतर पूरा करें। कार्यों में अनावश्यक देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
ब्लैक स्पॉट सुधार के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश का उद्देश्य दुर्घटना संभावित स्थानों पर व्यवस्थित तरीके से काम करना है। संबंधित विभागों को प्रत्येक ब्लैक स्पॉट की समस्या का अध्ययन कर उसके अनुसार समाधान करने को कहा गया।
कहीं सड़क की डिजाइन में बदलाव की जरूरत हो सकती है तो कहीं संकेतक, बैरिकेडिंग या अन्य सुरक्षा उपायों की आवश्यकता हो सकती है। इन सभी पहलुओं को कार्ययोजना में शामिल कर प्राथमिकता तय करने के निर्देश दिए गए।
शहर के भीतर भी यातायात व्यवस्था में बाधा बनने वाले बिंदुओं को ठीक करने पर जोर दिया गया। घंटाघर के पास सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभों को हटाने का निर्देश इसी कड़ी का हिस्सा है। विद्युत विभाग को पहले इसके लिए बजट स्वीकृत कराने और फिर खंभों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई करने को कहा गया।
जिलाधिकारी ने सड़क सुरक्षा से संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि हादसों को कम करने के लिए नियमित निगरानी भी की जाए। जिन स्थानों पर बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं, वहां कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जाए।
बैठक में लिए गए फैसलों के बाद अब NHAI को हाईवे पर अवैध कट बंद कराने और फुट ओवर ब्रिज निर्माण की दिशा में कार्रवाई करनी होगी। वहीं संबंधित विभागों को ब्लैक स्पॉट पर सुधार के काम पूरे करने होंगे।
विद्युत विभाग के सामने घंटाघर क्षेत्र में सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभों को हटाने की जिम्मेदारी है। इसके लिए बजट की व्यवस्था करने के बाद काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करना सभी संबंधित विभागों की साझा जिम्मेदारी है। इसके लिए सड़क सुरक्षा नियमों के पालन के साथ बुनियादी ढांचे में सुधार और दुर्घटना संभावित स्थानों पर समय रहते कार्रवाई जरूरी है।
अब प्रशासन की प्राथमिकता हाईवे के अवैध कट बंद कराने, मेरठ-करनाल और मेरठ-पौड़ी हाईवे पर फुट ओवर ब्रिज बनाने, ब्लैक स्पॉट सुधारने और शहर में यातायात बाधित करने वाले बिजली के खंभों को हटाने पर रहेगी।