लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आरजेडी की ओर से SIR को लेकर की जा रही बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल खड़े करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
सीएम योगी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति से देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर कथित मतभेदों की खबरों के बाद विवाद तेज हुआ है। हालांकि, चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद स्पष्ट किया कि देशभर में SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए थे।
EVM को लेकर विपक्ष के आरोपों पर भी बोले योगी
मुख्यमंत्री ने EVM को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर राजनीतिक दल इसे अपनी मेहनत का परिणाम बताते हैं, लेकिन हार के बाद चुनाव आयोग और EVM पर सवाल उठाए जाते हैं।
योगी ने EVM को ‘ब्लैक बॉक्स’ कहे जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने राहुल गांधी के विदेश में दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए न्यायपालिका और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी कांग्रेस की आलोचना की।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस EVM के जरिए कांग्रेस को अलग-अलग समय पर केंद्र और राज्यों में चुनावी जीत मिली, उसी व्यवस्था पर सवाल उठाना विरोधाभासी है। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आकलन और विपक्ष पर उनकी आलोचना थी।
पुराने SIR का भी किया जिक्र
सीएम योगी ने कहा कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कोई नई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने 1952, 1962 और 2003 में हुए SIR का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से जिस तरह विरोध किया जा रहा है, वह उनके अनुसार उचित नहीं है।
वहीं, मौजूदा SIR को लेकर चुनाव आयोग ने हाल में कई प्रक्रियात्मक बदलावों की जानकारी दी है। आयोग के मुताबिक, जिन मतदाताओं को दस्तावेजों में विसंगति या पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग की समस्या के कारण नोटिस मिला है, उनके घर जाकर BLO दस्तावेज एकत्र कर सकेंगे। सामान्य तौर पर ऐसे मतदाताओं को ERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी।
आपातकाल और ऑपरेशन सिंदूर का भी उठाया मुद्दा
प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस के शासनकाल के आपातकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था और उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर दौर था।
उन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रियाओं पर भी सवाल उठाए। योगी ने कहा कि सैन्य अभियानों पर सवाल खड़े करने को लेकर विपक्ष को अपने रुख पर विचार करना चाहिए। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आईं।
चुनाव आयोग के फैसलों पर भी हुई चर्चा
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपनी बैठक में मतदाताओं से जुड़ी कई व्यवस्थाओं को लेकर फैसले किए। आयोग ने ECINET पोर्टल की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाने और IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को इसमें शामिल करने की बात कही। साथ ही नए IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़े प्रस्तावों पर आयोग के स्तर पर चर्चा के बाद मंजूरी की व्यवस्था बताई गई है।
आयोग ने दिल्ली में SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा भी 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई है। इसके अलावा जरूरतमंद, बेघर और श्रमिक वर्ग के लोगों के लिए विशेष सहायता केंद्र और कैंप लगाने की बात कही गई है।
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग ने अपने हालिया बयान में SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। ऐसे में SIR, EVM और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।
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