Uttar Pradesh : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत, महान शिक्षाविद और समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन, महिला शिक्षा के प्रसार और नारी सशक्तीकरण के लिए ईश्वर चंद्र विद्यासागर द्वारा किए गए भगीरथ प्रयास आज भी पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि विद्यासागर का जीवन समाज सेवा, शिक्षा और मानवता के मूल्यों के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने ऐसे समय में समाज सुधार का बीड़ा उठाया, जब रूढ़िवादी सोच और सामाजिक कुरीतियां समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा थीं। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना और विशेष रूप से महिलाओं तथा वंचित वर्गों को शिक्षा से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया। उनके प्रयासों का ही परिणाम था कि महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा को लेकर समाज में नई जागरूकता का संचार हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधारों में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का समर्थन किया और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध समाज को जागरूक करने का कार्य किया। उनके अथक प्रयासों से वर्ष 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम लागू हुआ, जिसने भारतीय समाज में महिलाओं को सम्मानजनक जीवन का अधिकार दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव की नींव रखी। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से यह सिद्ध किया कि समाज में परिवर्तन केवल कानून से नहीं, बल्कि शिक्षा और जागरूकता से संभव है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर का मानना था कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। उन्होंने महिला शिक्षा के लिए विद्यालयों की स्थापना की और समाज को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों ने भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति सोच को बदलने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज देश में महिला सशक्तीकरण और शिक्षा के क्षेत्र में जो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं, उनमें विद्यासागर के विचारों की स्पष्ट झलक मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने भारतीय भाषाओं, विशेष रूप से बंगाली भाषा और साहित्य के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने शिक्षा प्रणाली को अधिक सरल, व्यावहारिक और जनसुलभ बनाने के लिए कई सुधार किए। उनकी लिखी पुस्तकें और शैक्षणिक कार्य आज भी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। उनका व्यक्तित्व ज्ञान, करुणा, सामाजिक संवेदनशीलता और मानव कल्याण के प्रति समर्पण का प्रतीक था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से ईश्वर चंद्र विद्यासागर के आदर्शों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज से अज्ञानता, भेदभाव और कुरीतियों को समाप्त करने के लिए शिक्षा का प्रसार सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि सभी को उनके बताए मार्ग पर चलते हुए महिलाओं के सम्मान, शिक्षा और समान अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जीवन हमें यह संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदनाओं के बल पर बड़े से बड़ा परिवर्तन संभव है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका योगदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा और आने वाली पीढ़ियां भी उनके विचारों से मार्गदर्शन प्राप्त करती रहेंगी।