लखनऊ। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवालों में आए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे मामले में बड़ा फैसला लिया गया है। परियोजना की कार्यदायी संस्था पीएनसी इंफ्राटेक (PNC) पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया गया है।

एक्सप्रेसवे की सड़क की परतें उखड़ने और एलिवेटेड रोड के प्लास्टर गिरने जैसी घटनाओं के बाद यह कार्रवाई की गई है। निर्माण में लापरवाही के आरोपों के बाद संबंधित एजेंसियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया है।

उद्घाटन के चार दिन बाद सामने आई थी समस्या

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होने के कुछ ही दिनों बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने लगी थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, उद्घाटन के चार दिन बाद ही सड़क की ऊपरी परत खराब होने लगी थी। इसके बाद एलिवेटेड रोड के हिस्से में प्लास्टर गिरने की घटना ने परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

इतने बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट में शुरुआती दिनों में ही खामियां सामने आने से प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।

PNC पर तीन साल का प्रतिबंध

मामले में कार्रवाई करते हुए परियोजना की कार्यदायी संस्था पीएनसी इंफ्राटेक पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया है।

प्रतिबंध के बाद कंपनी अब तय अवधि तक संबंधित सरकारी परियोजनाओं में भागीदारी नहीं कर सकेगी। यह कार्रवाई निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

अधिकारियों का कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सड़क की परत उखड़ने से बढ़ी चिंता

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को बेहतर कनेक्टिविटी और तेज यातायात सुविधा के उद्देश्य से विकसित किया गया था।

लेकिन उद्घाटन के बाद सड़क की परत उखड़ने की शिकायतों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए।

एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में सड़क की मजबूती और सुरक्षा सबसे अहम मानी जाती है। ऐसे में शुरुआती समय में आई खराबी को लेकर जांच और कार्रवाई की गई।

एलिवेटेड रोड का प्लास्टर गिरने का मामला

सड़क की समस्या के बाद एलिवेटेड रोड के प्लास्टर गिरने की घटना भी सामने आई।

इस घटना को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया, क्योंकि एलिवेटेड रोड यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ मामला है।

इसके बाद परियोजना की तकनीकी जांच और निर्माण गुणवत्ता की समीक्षा की गई।

एक लेन का संचालन किया गया था बंद

गुणवत्ता संबंधी समस्याओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कानपुर से लखनऊ की ओर आने वाले वाहनों वाली लेन का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।

इस दौरान आवश्यक जांच और मरम्मत कार्य किए गए।

अधिकारियों के अनुसार, अब इस लेन को 25 सितंबर से दोबारा शुरू किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी राहत

लेन बंद होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। खासकर कानपुर से लखनऊ आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ रहा था।

लेन शुरू होने के बाद यातायात व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है।

हालांकि, प्रशासन की नजर अब भी एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर बनी रहेगी।

निर्माण एजेंसियों के लिए संदेश

PNC इंफ्राटेक पर हुई कार्रवाई को निर्माण क्षेत्र में जिम्मेदारी तय करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार और संबंधित विभाग लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता।

ऐसी कार्रवाई से निर्माण कंपनियों पर बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ता है।

आगे भी जारी रहेगी निगरानी

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति पर संबंधित विभाग लगातार नजर रखेगा।

सड़क, एलिवेटेड रोड और अन्य संरचनाओं की नियमित जांच की जाएगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रशासन का उद्देश्य है कि एक्सप्रेसवे का संचालन सुरक्षित और सुचारू तरीके से हो।

एक्सप्रेसवे परियोजना की अहमियत

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य दोनों शहरों के बीच यात्रा समय कम करना और बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है।

ऐसे में निर्माण गुणवत्ता से जुड़े सवाल सामने आने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

PNC पर प्रतिबंध और लेन दोबारा खोलने के फैसले के बाद अब आगे की निगरानी और सुधार कार्य महत्वपूर्ण होंगे।

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