नौ करोड़ के कोडीन सीरप मामले में जांच तेज गणेश फार्मा के रिकॉर्ड बने अहम सुराग
कोडीन सीरप के नौ करोड़ के खेल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सीरप की कथित अवैध आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जांच अब दिल्ली की गणेश फार्मा के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्म से कोडीनयुक्त सीरप की खेप उत्तर प्रदेश के किन-किन जिलों में भेजी गई और इसके बदले भुगतान कहां से आया। बैंक खातों की पड़ताल से पूरे सप्लाई नेटवर्क से जुड़े नए नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
गणेश फार्मा से जुड़े खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, बिल, बैंक ट्रांजैक्शन और दवा आपूर्ति के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों का फोकस उन फर्मों और व्यक्तियों पर है, जिन्होंने बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सीरप खरीदा या इसके लिए भुगतान किया। खातों में हुए लेनदेन का मिलान बिक्री के रिकॉर्ड से किया जा रहा है। कोडीन का इस्तेमाल कुछ चिकित्सकीय कफ सीरप में निर्धारित मात्रा में किया जाता है, लेकिन इसके नशीले प्रभाव के कारण इसकी बिक्री और वितरण पर कड़े नियम लागू होते हैं। वैध दवा कारोबार की आड़ में निर्धारित चैनल से बाहर इसकी बड़ी मात्रा में आपूर्ति होने की स्थिति में संबंधित रिकॉर्ड और लाइसेंस की जांच की जाती है।
जांच का एक अहम सवाल यह है कि दिल्ली से भेजी गई खेप वास्तव में लाइसेंसधारी विक्रेताओं तक पहुंची या इसे बीच रास्ते से किसी दूसरे नेटवर्क में भेज दिया गया। इसके लिए ट्रांसपोर्ट रिकॉर्ड, ई-वे बिल, इनवॉइस और बैंक खातों की जानकारी का मिलान किया जा रहा है। जिन जिलों या फर्मों से संदिग्ध भुगतान सामने आएगा, वहां जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
अधिकारियों के लिए बैंकिंग ट्रेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह पता लगाया जा सकता है कि खरीदारी के लिए भुगतान किस खाते से हुआ, रकम किसके पास पहुंची और बाद में उसे कहां ट्रांसफर किया गया। यदि दस्तावेजों में दिखाई गई दवा की मात्रा और वास्तविक आपूर्ति में अंतर मिलता है तो संबंधित फर्मों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जांच में उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक नेटवर्क फैले होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि किन-किन जिलों में गणेश फार्मा से सीधे कोडीनयुक्त सीरप पहुंचा, इसकी अंतिम और आधिकारिक सूची अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी जिले या दवा कारोबारी को अवैध नेटवर्क का हिस्सा मानना उचित नहीं होगा।
दवा की सप्लाई चेन से जुड़े रिकॉर्ड के साथ आरोपियों या संदिग्ध फर्मों के मोबाइल संपर्क और दूसरे डिजिटल साक्ष्य भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इनसे यह समझने में मदद मिलेगी कि ऑर्डर कैसे दिए जाते थे और माल की डिलीवरी किसके निर्देश पर होती थी। फिलहाल गणेश फार्मा और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल जारी है। बैंक खातों, बिल और सप्लाई रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कोडीनयुक्त सीरप की खेप उत्तर प्रदेश में कहां-कहां पहुंची और पूरे नेटवर्क में किन लोगों की क्या भूमिका थी।