अमरनाथ एक्सप्रेस से 5.88 करोड़ की चरस बरामद दो महिलाओं समेत तीन गिरफ्तार
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। डीआरआई ने गुरुवार देर रात अमरनाथ एक्सप्रेस में कार्रवाई करते हुए 5.88 किलोग्राम चरस बरामद की। मामले में दो महिलाओं समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बरामद चरस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 5.88 करोड़ रुपये बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक चरस को बिहार से पंजाब ले जाया जा रहा था। शुक्रवार को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
डीआरआई की टीम को मादक पदार्थों की तस्करी के संबंध में सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसी दौरान अमरनाथ एक्सप्रेस में सफर कर रहे तीन यात्रियों पर टीम को संदेह हुआ। इनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं।
डीआरआई की टीम ने तीनों को रोककर पूछताछ की और उनके सामान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान कथित तौर पर चरस बरामद हुई। वजन कराने पर मादक पदार्थ की कुल मात्रा करीब 5.88 किलोग्राम निकली। इतनी बड़ी मात्रा में चरस मिलने के बाद डीआरआई अधिकारियों ने तीनों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू कर दी।
जांच में सामने आई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बरामद चरस को बिहार से पंजाब पहुंचाया जाना था। आशंका है कि तस्करों ने मादक पदार्थों की खेप को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए रेल मार्ग का इस्तेमाल किया। डीआरआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि चरस कहां से उपलब्ध कराई गई थी और पंजाब में इसे किस व्यक्ति या गिरोह तक पहुंचाया जाना था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद 5.88 किलोग्राम चरस की अनुमानित कीमत 5.88 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इतनी बड़ी कीमत की खेप पकड़े जाने को मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ अहम कार्रवाई माना जा रहा है। डीआरआई की टीम इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
कार्रवाई में दो महिलाओं की गिरफ्तारी ने भी जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह अक्सर जांच एजेंसियों से बचने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। ऐसे में अब जांच का फोकस इस बात पर भी रहेगा कि गिरफ्तार किए गए तीनों लोग केवल खेप पहुंचाने का काम कर रहे थे या उनका किसी बड़े नेटवर्क से सीधा संबंध है।
गिरफ्तारी के बाद तीनों से पूछताछ की गई। इस दौरान उनके यात्रा मार्ग, संपर्क में रहने वाले लोगों और चरस की खेप के स्रोत के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया। इसके अलावा उनके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली जानकारियां भी तस्करी नेटवर्क की तह तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
शुक्रवार को डीआरआई ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत पेश किया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। अब मामले में आगे की जांच जारी रहेगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस खेप के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और पहले भी इसी रूट से मादक पदार्थ भेजे गए हैं या नहीं।
रेल मार्ग के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी जांच एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई है। लंबी दूरी की ट्रेनों में प्रतिदिन हजारों यात्री सफर करते हैं। तस्कर इसी भीड़ का फायदा उठाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक अवैध सामग्री पहुंचाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए कई बार सामान्य यात्रियों की तरह सफर करने वाले लोगों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल किए जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं।
गोरखपुर रेलवे स्टेशन पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख रेलवे जंक्शन है। यहां से बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों के लिए बड़ी संख्या में ट्रेनें गुजरती हैं। इसी वजह से सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लिए यह स्टेशन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। संदिग्ध गतिविधियों को लेकर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में समय-समय पर अभियान भी चलाए जाते हैं।
डीआरआई की इस कार्रवाई के बाद अब बिहार से पंजाब तक फैले संभावित नेटवर्क की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बरामद चरस की वास्तविक आपूर्ति किसने की थी और पंजाब पहुंचने के बाद इसे किसे सौंपा जाना था। गिरफ्तार आरोपियों से मिले सुराग के आधार पर आगे और लोगों तक जांच पहुंच सकती है।
फिलहाल 5.88 किलोग्राम चरस की बरामदगी के साथ एक बड़ी खेप अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले पकड़ ली गई है। दो महिलाओं समेत तीन लोगों को जेल भेजे जाने के बाद डीआरआई मामले में तस्करी के पूरे नेटवर्क और इसके संभावित संपर्कों की जांच में जुटी है।