अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में आय और व्यय की निगरानी की व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। ट्रस्ट के नए कोषाध्यक्ष ने वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लेखा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। इसी क्रम में दिल्ली से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की एक टीम अयोध्या बुलाई गई है। नई व्यवस्था में ट्रस्ट की आय और खर्च के लेखे-जोखे की द्विस्तरीय निगरानी की जाएगी। राम मंदिर निर्माण और श्रद्धालुओं की ओर से मिलने वाले दान के कारण श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का वित्तीय प्रबंधन काफी व्यापक हो चुका है। देश-विदेश से श्रद्धालु मंदिर के लिए दान देते हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर के निर्माण, रखरखाव, श्रद्धालु सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर भी बड़ी राशि खर्च होती है। ऐसे में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

दिल्ली से बुलाई गई CA की टीम
नए कोषाध्यक्ष ने पदभार संभालने के बाद ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज की समीक्षा शुरू की है। इसी सिलसिले में दिल्ली से सीए की टीम को बुलाया गया है। यह टीम ट्रस्ट के आय-व्यय से जुड़े दस्तावेजों, खातों और वित्तीय प्रक्रियाओं का अध्ययन करेगी।
टीम यह देखेगी कि वर्तमान लेखा प्रणाली किस तरह काम कर रही है और उसमें कहां सुधार की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य वित्तीय रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है, ताकि प्राप्त होने वाले दान से लेकर विभिन्न मदों में होने वाले खर्च तक का स्पष्ट लेखा उपलब्ध रहे।
अब दो स्तर पर होगी खातों की निगरानी
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात आय-व्यय की द्विस्तरीय निगरानी है। ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की जांच एक स्तर पर होने के बाद दूसरे स्तर पर भी उसका सत्यापन किया जाएगा। इससे किसी त्रुटि या विसंगति को समय रहते पकड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। द्विस्तरीय व्यवस्था से खर्च की मंजूरी और उसके लेखांकन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है। इसके साथ ही वित्तीय रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा भी की जाएगी।
दान के हिसाब पर विशेष नजर
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और विभिन्न माध्यमों से दान देते हैं। दान पेटियों के अलावा ऑनलाइन माध्यम और बैंकिंग चैनलों से भी राशि प्राप्त होती है। नकद दान के साथ सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की जाती हैं। ऐसे में अलग-अलग माध्यमों से मिलने वाली राशि और वस्तुओं का सही रिकॉर्ड रखना ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण है। नई लेखा व्यवस्था में प्राप्त होने वाले दान को दर्ज करने से लेकर उसे संबंधित खाते में जमा करने तक की प्रक्रिया पर निगरानी मजबूत करने पर जोर रहेगा।
राम मंदिर निर्माण पर बड़ी राशि खर्च
अयोध्या में राम मंदिर और उससे जुड़े परिसर का निर्माण विशाल परियोजना है। मंदिर के मुख्य ढांचे के अलावा परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं और अन्य निर्माण कार्यों पर भी खर्च किया जा रहा है। निर्माण सामग्री, श्रमिक, तकनीकी कार्य, सुरक्षा, रखरखाव और विभिन्न सुविधाओं पर होने वाले खर्च का नियमित लेखा रखना आवश्यक है। इसलिए ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था केवल दान की गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण और संचालन से जुड़े खर्चों की निगरानी भी इसका अहम हिस्सा है।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
ट्रस्ट के सामने सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में श्रद्धालुओं से प्राप्त धन का पारदर्शी और निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करना है। द्विस्तरीय निगरानी व्यवस्था इसी दिशा में उठाया गया कदम मानी जा रही है। CA टीम वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा करने के साथ मौजूदा प्रणाली में आवश्यक सुधार को लेकर सुझाव दे सकती है। इससे ट्रस्ट के खातों को नियमित रूप से अपडेट रखने और आय-व्यय का मिलान करने की व्यवस्था अधिक मजबूत हो सकेगी।
डिजिटल रिकॉर्ड पर भी रहेगा फोकस
बड़े धार्मिक संस्थानों में वित्तीय लेन-देन की संख्या अधिक होने के कारण डिजिटल रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। बैंक ट्रांसफर, ऑनलाइन दान और दूसरे डिजिटल माध्यमों से प्राप्त राशि का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध होता है, लेकिन इसे ट्रस्ट की समग्र लेखा प्रणाली से सही तरीके से जोड़ना भी जरूरी है। नई व्यवस्था में डिजिटल और पारंपरिक दोनों माध्यमों से होने वाले वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। इससे किसी भी समय आय और खर्च की स्थिति का आकलन आसान हो सकेगा।
नए कोषाध्यक्ष के सामने बड़ी जिम्मेदारी
नए कोषाध्यक्ष के कार्यभार संभालने के बाद वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राम मंदिर से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है और ट्रस्ट को बड़ी मात्रा में दान प्राप्त होता है। इसलिए वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना ट्रस्ट के लिए बेहद अहम है। दिल्ली से सीए टीम बुलाने और आय-व्यय की द्विस्तरीय निगरानी लागू करने की तैयारी का उद्देश्य इसी वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना है। नई व्यवस्था प्रभावी होने के बाद ट्रस्ट के प्रत्येक महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन की जांच और सत्यापन अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। ट्रस्ट की कोशिश है कि राम मंदिर से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। अब सीए टीम की समीक्षा और उसके बाद लागू होने वाली नई लेखा व्यवस्था पर निगाह रहेगी।
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